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Power Crisis: क्या अंधेरे में दिवाली मनाएंगे राजस्थानी? कोयला खत्म होने से 11 यूनिट बंद, मांग और बढ़ेगी

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 04 Oct 2022 09:17 PM IST
सार

Power Crisis: प्रदेश के सभी पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता के साथ चलाने के लिए रोजाना 37 रैक कोयले की सप्लाई होनी चाहिए। अब तक प्रदेश को औसतन 20 रैक कोयला रोजाना मिल रहा था, लेकिन अब यह घटकर 14 रैक पर ही आ गया है।

प्रदेश के चार बिजली घरों की 11 हजार यूनिट ठप पड़ी हैं।
प्रदेश के चार बिजली घरों की 11 हजार यूनिट ठप पड़ी हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Power Crisis: दीपावली की रोशनी से पहले राजस्थान में बिजली संकट गहरा गया है। प्रदेश के चार बिजली घरों की 11 यूनिट ठप पड़ी हैं।  छबड़ा थर्मल पावर प्लांट की एक, रामगढ़ की एक, सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की चार, कोटा थर्मल पावर प्लांट की 3 और राजवेस्ट थर्मल पावर प्लांट की 2 यूनिट्स बंद पड़ी हैं। कल दशहरा का महापर्व है। वहीं इसके बाद रोशनी का सबसे बड़ा त्योहार यानी दीपावली आने वाली है। ऐसे में प्रदेश में बिजली की खपत और बढ़ेगी, लेकिन वर्तमान हालात को देखकर अंदेशा जताया जा रहा है कि प्रदेश के 1.5 करोड़ परिवारों को अंधेरे में दीपावली मनानी पड़ सकती है। 



हालात यह हैं कि दिपावली से पहले मेंटेनेंस के नाम पर रोजाना चार घंटे अधिक समय के लिए बिजली कटौती की जा रही है। सबसे ज्यादा बिजली कटौती ग्रामीण इलाकों में की जा रही है। इससे त्योहारी सीजन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि प्रदेश में बिजली की किल्लत पहली बार नहीं है। एक साल से यहां बिजली संकट गहरा रहा है।  


राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अफसरों की बड़ी लापरवाही के कारण प्रदेश आज बिजली कटौती के दौर से गुजर रहा है। वहीं इस त्योहारी सीजन में बिजली की डिमांड 17 हजार 700 मेगावाट तक पहुंच सकती है। अगर, जल्द ही हालात नहीं सुधरे को प्रदेशवासियों को दिवाली पर भी अंधेरे का सामना करना पड़ सकता है।  

क्यों बिगड़ रहे हालात?
कोयले की सप्लाई में कमी और बिजली प्रोडक्शन में सुधार नहीं होने के कारण इस तरह के हालात बन रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजस्थान के थर्मल पावर प्लांट में औसत 4 दिन का ही कोयला स्टॉक बचा है, जबकि कम से कम यह 26 दिन का होना चाहिए। केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार इससे कम बजे कॉयले के स्टॉक को कमी माना जाता है। कोटा थर्मल पावर स्टेशन में तीन, सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन में पांच, सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन में सात, छबड़ा थर्मल पावर स्टेशन में    तीन, छबड़ा सुपर क्रटिकल थर्मल पावर प्लांट में पांच और कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट में तीन दिन का ही कोयला बचा है।  

कोयले की किल्लत क्यों? 
राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को छत्तीसगढ़ में कोल माइंस अलॉट की गई है। विद्युत निगम की पारसा ईस्ट एंड कैंटे बासन कोल ब्लॉक में कोयला खत्म हो गया है। इससे 9 रैक यानी 36000 मीट्रिक टन कोयला आना बंद हो गया है। कोयले की सप्लाई में आई कमी का असर बिजली उत्पादन पर पड़ा। कोयले की कमी से करीब 2000 मेगावाट बिजली प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है।

रोजाना कितने रैक कोयला चाहिए?
प्रदेश के सभी पावर प्लांट्स को पूरी क्षमता के साथ चलाने के लिए रोजाना 37 रैक कोयले की सप्लाई होनी चाहिए। अब तक प्रदेश को औसतन 20 रैक कोयला रोजाना मिल रहा था, लेकिन अब यह घटकर 14 रैक पर ही आ गया है। इससे के 11 थर्मल पावर प्लांट ठप पड़ें हैं, वहीं कई बंद होने की कगार पर हैं। 

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