राजस्थान: घरेलू हिंसा पीड़ित विदेशी नागरिक भारत में दर्ज करा सकती है शिकायत, हाईकोर्ट का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 24 Nov 2021 10:47 PM IST

सार

कैथरीन ने 2019 में जोधपुर में रहने के दौरान रॉबर्टो के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करायी थी। रॉबर्टो ने सबसे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत को चुनौती दी और उसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत (महिला अत्याचार मामले) में चुनौती दी।
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock
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विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि घरेलू हिंसा की पीड़ित विदेशी नागरिक भी अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती है, बशर्ते उसके साथ हिंसा भारत में रहने के दौरान हुई हो।  जस्टिस विनीत कुमार माथुर ने कैथरीन नीडू के पति रॉबर्टो नीडू की याचिका खारिज कर दी। रॉबर्टो ने उसके विदेशी नागरिक होने के आधार पर याचिका के सुनवाई योग्य होने पर सवाल खड़े करते हुए उसके खिलाफ कैथरीन की शिकायत को खारिज किए जाने का अनुरोध किया था।
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कैथरीन ने 2019 में जोधपुर में रहने के दौरान रॉबर्टो के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज करायी थी। रॉबर्टो ने सबसे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत को चुनौती दी और उसके बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत (महिला अत्याचार मामले) में चुनौती दी। दोनों अदालतों ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद रॉबर्टो ने कैथरीन के भारतीय नागरिक न होने का हवाला देते हुए शिकायत के सुनवाई योग्य न होने के आधार पर दोनों फैसलों को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। 


मामले पर बहस करते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी भारतीय नागरिक नहीं है। इसका विरोध करते हुए प्रतिवादी के वकील ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून 2005 की धारा दो (ए) के अनुसार ‘पीड़ित व्यक्ति’ की परिभाषा दी गयी और खुद परिभाषा के अनुसार, विदेशी नागरिक समेत कोई भी महिला जो घरेलू हिंसा का शिकार हुई है, वह निचली अदालत में अर्जी दायर कर सकती है। 

दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस माथुर ने कहा कि प्रतिवादी पिछले करीब 25 वर्षों से जोधपुर में रह रही है और याचिकाकर्ता से शादी करने के बाद शिकायत में दर्ज घटना जोधपुर की है और घरेलू हिंसा कानून 2005 की धारा दो (ए) और 12 के तहत निकली परिभाषाओं के मद्देनजर कैथरीन की शिकायत सुनवाई योग्य है।

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