राजस्थान : आरएसएस प्रमुख भागवत ने संघ के स्वयं सेवकों द्वारा प्रशासन में हस्तक्षेप के आरोपों को किया खारिज 

पीटीआई, उदयपुर Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 20 Sep 2021 12:33 AM IST

सार

मोहन भागवत ने रविवार को राजस्थान के उदयपुर में बुद्धिजीवियों के सम्मेलन में संघ के स्वयं सेवकों द्वारा प्रशासन में हस्तक्षेप करने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने  कहा, संघ की सत्ता में भागीदारी भ्रामक है, यह आरोप मीडिया की देन है।
मोहन भागवत
मोहन भागवत - फोटो : Facebook
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विस्तार

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को संघ के स्वयं सेवकों द्वारा प्रशासन में हस्तक्षेप करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं से मिलना या उनके साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना सत्ता में भागीदारी के समान नहीं है। भागवत ने कहा कि यह आरोप मीडिया की देन है।
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उदयपुर में प्रबुद्ध लोगों से बातचीत के दौरान भागवत ने कहा, 'सत्ता में संघ की भागीदारी गुमराह करने वाली बात है और यह मीडिया की देन है।' उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस के स्वयंसेवक विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक नेताओं से मिलते हैं, तो इसे सत्ता में भागीदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


संघ द्वारा जारी विज्ञप्ति में भागवत ने कहा है कि कम्युनिस्टों सहित अन्य सरकारें भी कई कार्यों में संघ के स्वयंसेवकों का सहयोग लेती रही हैं। भागवत ने एक बुद्धिजीवियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए और उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बाद कही।

जहां भी हिंदू आबादी घटी वहां समस्याएं खड़ी हुईं
भागवत ने कहा कि संघ स्वयं सेवक लोगों के चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से काम करते हैं। संघ के संस्थापक केबी हेडगेवार का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि वह कहते थे कि हिंदू समाज का संगठन देश की सभी समस्याओं का समाधान कर सकता है।

उन्होंने कहा, 'हिंदू विचारधारा शांति और सच्चाई की है। देश और समाज को कमजोर करने के मकसद से ऐसा अभियान चलाया जा रहा है कि हम हिंदू नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जहां हिंदू आबादी कम हुई है, वहां समस्याएं पैदा हुईं।'

संघ का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना 
पश्चिम बंगाल और केरल में स्वयंसेवकों पर अत्याचार के प्रश्न पर भागवत ने कहा कि जिस परिस्थिति से समाज गुजर रहा है, उसी स्थिति से स्वयंसेवक भी गुजर रहे हैं। हालांकि वह भयभीत  होकर भागते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य पूरे हिंदू समाज को संगठित करना है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान संघ के स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा हिंदुत्व का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि संघ किसी प्रशंसा या नाम के लिए लालायित नहीं है, 80 के दशक तक 'हिंदू' शब्द को सार्वजनिक रूप से टाला जाता था और संघ ने ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में काम किया।

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