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HP High Court: 2003 के बाद नियमित होने वाले कर्मचारी को जीपीएफ नंबर देने के आदेश

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Sep 2022 09:40 PM IST
सार

 प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के बाद नियमित होने वाले कर्मचारी को जीपीएफ नंबर देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने मितर देव को पेंशन का हकदार ठहराया है। 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के बाद नियमित होने वाले कर्मचारी को जीपीएफ नंबर देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने मितर देव को पेंशन का हकदार ठहराया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को तीन महीनों की भीतर जीपीएफ नंबर दिए जाने  के आदेश दिए है। याचिकाकर्ता वर्ष 1991 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर वन विभाग करसोग के कार्यरत था। पहली जनवरी 2002 से उसे वर्क चार्ज प्रदान किया गया। उसकी सेवाएं वर्ष 2006 से नियमित की गई। वर्ष 2006 में राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन किया था कि जिन कर्मचारियों की सेवाएं  15 मई 2003 के बाद नियमित की गई है, वे पेंशन के हकदार नहीं है। उन्हें अंशदायी पेंशन योजना के तहत पेंशन का लाभ दिया जाएगा।



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याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब उसे पहली जनवरी 2002 से उसे वर्क चार्ज प्रदान किया गया तो उस स्थिति में वर्ष 2002 से उसके नियमितीकरण की अवधि पेंशन के लिए गिनी जानी चाहिए। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को पेंशन का लाभ न दिया जाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का सरासर उल्लंघन है। अदालत ने शीर्ष अदालत के निर्णय का हवाला देते हुए अपने निर्णय में कहा कि वर्कचार्ज से नियमितीकरण की अवधि पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ के लिए गिनी जाएगी। अदालत ने कहा कि जब वर्कचार्ज की अवधि पेंशन के लाभ दिए जाने के लिए गिना जाएगा तो स्वाभाविक है कि उसकी सेवाएं पेंशन नियम से शासित होगी। अदालत ने याचिकाकर्ता को अंशदायी पेंशन योजना के अंतर्गत लाने वाले विभाग के आदेश को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। 

कर्मचारी चयन आयोग को सही उत्तर कुंजी अपलोड करने के आदेश 
प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग को सही उत्तर कुंजी अपलोड करने के आदेश दिए हैं। एकलपीठ के निर्णय को संशोधित करते हुए खंडपीठ ने आयोग पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने को माफ कर दिया है। अदालत ने आयोग को आदेश दिए कि वह उत्तर कुंजी के खिलाफ दर्ज की गई आपत्तियों को निर्धारित समय के भीतर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि आयोग विवादित प्रश्नों के क्रमांक, विवादित उत्तर इत्यादि और आपत्तियों का सार सहित जानकारी सांझा करें। जो अभ्यर्थी उन आपत्तियों के संदर्भ में अपना जवाब देना चाहें उन्हें अपने जवाब देने के लिए समय  निर्धारित किया जाए। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए उत्तर कुंजी  प्रकाशित करने के आदेश दिए गए हैं।  

बता दें कि याचिकाकर्ता अंशुल गुलेरिया ने वर्ष 2013 में शारीरिक शिक्षक पद के लिए लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी। आयोग ने लिखित परीक्षा की उत्तर कुंजी अपनी वेबसाइट पर अपलोड़ की थी। याचिकाकर्ता ने कुछ प्रश्नों के उत्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज की थी।  आयोग ने आपत्तियों के आधार पर उत्तर कुंजी में संशोधन किया था। संशोधित कुंजी के हिसाब से याचिकाकर्ता के कुछ उत्तर गलत हो गए। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2019 मेें प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में आवेदन दायर किया था। अदालत से गुहार लगाई गई थी कि याचिकाकर्ता को शारीरिक शिक्षक के पद पर तैनाती देने की सिफारिश की जाए। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए आयोग की कार्यशैली पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।  

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