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Himachal Chunav: कम अंतर से जीतीं ज्यादा सीटें दे सकती हैं सत्ता की चाबी, एग्जिट पोल में उलझे नेता

सुरेश शांडिल्य, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 07 Dec 2022 10:40 AM IST
सार

राज्य विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशतता अच्छी रही हो तो भी जरूरी नहीं है कि कोई राजनीतिक दल ज्यादा सीटें ले रहा है। एग्जिट पोल में कई एजेंसियों ने बेशक दोनों दलों को करीब बराबर-बराबर मत पड़ने का अनुमान लगाया है, मगर इसके बावजूद नतीजे पिछले कई चुनाव की तरह भी हो सकते हैं।

Himachal Election 2022
Himachal Election 2022 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कम अंतर से जीती हुई ज्यादा सीटें ही हिमाचल प्रदेश में किसी भी दल को सत्ता की चाबी दे सकती हैं। एग्जिट पोल आने के बाद दोनों ही राजनीतिक दलों के नेता दोबारा से जीत-हार के समीकरण हल करने में जुट गए हैं। राज्य विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशतता अच्छी रही हो तो भी जरूरी नहीं है कि कोई राजनीतिक दल ज्यादा सीटें ले रहा है। एग्जिट पोल में कई एजेंसियों ने बेशक दोनों दलों को करीब बराबर-बराबर मत पड़ने का अनुमान लगाया है, मगर इसके बावजूद नतीजे पिछले कई चुनाव की तरह भी हो सकते हैं। कुल वोट प्रतिशत करीब बराबरी पर रहा तो कुछ सीटों पर ज्यादा मतों का अंतर नुकसान पहुंचा सकता है। पांच साल पहले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में मत प्रतिशतता का अंतर महज सात फीसदी का रहा। फिर भी कांग्रेस 21 सीटों तक सिमट गई, जबकि भाजपा ने इससे दोगुने से भी ज्यादा 44 सीटें लेकर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई। 



उदाहरण के लिए वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जीतने वाले दल भाजपा ने कुल 48.79 प्रतिशत वोट लिए थे। हारने वाले दल कांग्रेस ने कुल 41.68 प्रतिशत मत प्राप्त किए। यानी जीत-हार का अंतर महज 7.11 प्रतिशत वोट का ही रहा। पर असल में कई सीटों पर कांग्रेस की भाजपा से बहुत ज्यादा मत प्रतिशतता रही। कसुम्पटी में कांग्रेस प्रत्याशी अनिरुद्ध सिंह 9,397 मतों के मार्जिन से विजयी हुए और यहां कांग्रेस की भाजपा से मत प्रतिशतता 22.74 प्रतिशत अधिक रही। यहां पर कांग्रेस को 53.46 प्रतिशत वोट पडे़, जबकि भाजपा को 30.74 मत ही पड़े। इसी तरह रोहडू़ में कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लाल ब्राक्टा 9,408 मतों के मार्जिन से जीते। यहां कांग्रेस को कुल मत 58.17 प्रतिशत मिले तो भाजपा को 39.29 प्रतिशत ही पड़े।


यानी कांग्रेस को भाजपा से 18.72 प्रतिशत मत ज्यादा हासिल हुए। हरोली में भी कांग्रेस 11.42 प्रतिशत मतों से भाजपा से आगे रही। यहां मुकेश अग्निहोत्री 7,377 मतों के मार्जिन से जीते। ऐसे में एग्जिट पोल में कई एजेंसियों ने दोनों दलों को अच्छे मत मिलने की बात का उल्लेख किया है, मगर पिछलेचुनाव पर गौर करें तो एक बात साफ होती है कि किसी भी दल की अच्छी मत प्रतिशतता इस बात को जाहिर नहीं करती है कि उसे उसी अनुपात में सीटें मिल रही हैं। यह स्थिति पिछले कई चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के साथ भी रह चुकी है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. हरीश ठाकुर ने बताया कि किसी पार्टी के  पक्ष में मत प्रतिशतता ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि  उसकी सीटें भी ज्यादा आ रही हैं। कई बार अधिक मार्जिन से कुछ सीटों पर जीत होने की स्थिति में भी मत प्रतिशतता ज्यादा हो जाती है। अभी तो बराबर-बराबर मत प्रतिशतता का पूर्वानुमान भर ही है। 

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