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अनूठी मिसाल: हिंदू-मुस्लिम खींचेंगे रघुनाथ का रथ, सिख छिड़केंगे इत्र

राकेश राणा/अमर उजाला, कुल्लू Updated Tue, 11 Oct 2016 09:54 AM IST
International kullu dussehra festival celebrations by hindu muslim and sikhs
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देव-मानस मिलन के प्रतीक अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार सांप्रदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश होगी। मंगलवार से शुरू हो रहे इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव की ऐतिहासिक रथ यात्रा में हिंदू और मुस्लिम एक साथ भगवान रघुनाथ का रथ खींचेंगे। सिख समुदाय के लोग रथ के आगे चलते हुए इत्र का छिड़काव करेंगे। देव महाकुंभ के नाम से प्रख्यात कुल्लू दशहरा में तीनों समुदायों के लोग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करके सांप्रदायिक सद्भाव का पूरी दुनिया को संदेश देंगे। 

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कुल्लू दशहरा महोत्सव का आगाज मंगलवार को भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ होगा। रथ यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों देवी-देवताओं के साथ हजारों की तादाद में लोग शामिल होते हैं। हर साल सभी धर्मों के लोग इसमें शामिल होते हैं। इस बार कार सेवा दल गुरुद्वारा साहिब कुल्लू रथ यात्रा में प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। सेवा दल के अध्यक्ष मनदीप सिंह का कहना है कि पहली बार रथ यात्रा के आगे चलते हुए इत्र छिड़ककर माहौल को और खुशनुमा बनाया जाएगा।

वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन भी खींचेंगे भगवान रघुनाथ का रथ

इसके लिए क्षेत्र के अधिष्ठाता देव रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार से बात हो चुकी है। उधर, मुस्लिम समुदाय के लोग भी रथ यात्रा में भाग लेने को तैयार हैं। 

वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एवं मुस्लिम नेता गुलजार भारती का कहना है कि मंगलवार को वे भी भगवान रघुनाथ का रथ खींचेंगे। कुल्लू दशहरा में भगवान रघुनाथ के रथ को खींचना शुभ माना जाता है। 

भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि कार सेवा दल गुरुद्वारा साहिब कुल्लू के पदाधिकारी इत्र छिड़कने को लेकर मिले हैं। यदि कोई दूसरे समुदाय के लोग भी फूलों की बारिश करना चाहते हैं तो यह अच्छी बात है।

सात दिन बाद लंका दहन, नहीं जलते पुतले

देशभर में भले ही मंगलवार को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाएंगे लेकिन कुल्लू में लंका दहन एक सप्ताह बाद होता है। यहां पुतले नहीं जलाए जाते हैं। कुल्लू दशहरा का समापन लंका दहन बलि के 

साथ सप्ताह बाद होता है। अब हाईकोर्ट के आदेश पर बलि प्रथा पूर्ण रूप से बंद है। माना जाता है कि रावण पर जीत के बाद भगवान रघुनाथ के अयोध्या लौटने पर खुशियां मनाई गई थीं। इसी तर्ज पर कुल्लू में सात दिन खुशियां मनाई जाती हैं।

ढालपुर पहुंचे कई देवी-देवता

कुल्लू दशहरा महोत्सव भगवान रघुनाथ से जुड़ा है। इस देव महाकुंभ में क्षेत्र के सैकड़ों देवी- देवता भाग लेते हैं। देवताओं के प्रतीक के रूप में उनके रथ दशहरा में लोग लाते हैं। कई किलोमीटर पैदल कंधों पर देवताओं के रथ को उठाकर लाते हैं। मंगलवार को दशहरा 

उत्सव के लिए कई देवी-देवता सोमवार को ही लाव लश्कर के साथ ढालपुर पहुंच गए हैं। कुल्लू दशहरा का शुभारंभ करने को राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी कुल्लू पहुंच गए हैं। इसके अलावा रथ यात्रा का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लोग कुल्लू पहुंच रहे हैं। 
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