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Vivah panchami 2022: आज विवाह पंचमी के दिन पढ़ें श्रीराम और सीताजी के विवाह की कथा, वैवाहिक समस्याएं होंगी दूर

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Mon, 28 Nov 2022 10:02 AM IST
विवाह पंचमी के दिन पढ़ें श्रीराम और सीताजी के विवाह की कथा
विवाह पंचमी के दिन पढ़ें श्रीराम और सीताजी के विवाह की कथा - फोटो : iStock
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Vivah panchami 2022: हिंदू पंंचाग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। विवाह पंचमी तिथि पर भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस साल 28 नवंबर 2022 को विवाह पंचमी का पावन पर्व है। विवाह पंचमी पर भगवान राम और माता सीता के मंदिरों में भव्य आयोजन किए जाते हैं। विधि-विधान के साथ प्रभु राम और माता सीता का पूजन किया जाता है। साथ ही इस दिन भगवान राम और माता सीता के विवाह की कथा पढ़ने का विशेष महत्व माना गया है। श्रीराम और सीताजी के विवाह की कथा इस प्रकार है- 



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माता सीता और भगवान राम के विवाह की कथा
प्रचलित कथाओं के अनुसार, एक बार राजा जनक हल चला रहे थे, उस समय उन्हें धरती से एक कन्या की प्राप्ति हुई इस कन्या का नाम ही उन्होंने सीता रखा। राजा जनक देवी सीता को पुत्र रूप में पाकर अति प्रसन्न हुए और बहुत ही प्रेम के साथ उन्होंने माता सीता का पालन-पोषण किया। 

एक बार माता सीता ने भगवान शिव का धनुष उठा लिया। इस धनुष को उठाने का सामर्थ्य परशुराम जी के अलावा किसी और में नहीं था। ये देख राजा जनक समझ गए कि ये कोई साधारण बालिका नहीं है और उन्होंने उसी समय निर्णय लिया कि जो भी शिव जी के इस धनुष को उठा लेगा उसी के साथ वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे।

जब देवी सीता विवाह के योग्य हुई तो राजा जनक ने उनके लिए स्वयंवर रखा और यह घोषणा कर दी कि जो भी इस धनुष को उठाकर प्रत्युंचा चढ़ा देगा वे उसी के साथ अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे। महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्ष्मण जी भी स्वयंवर में उपस्थित थे। 

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स्वयंवर आरंभ होने के बाद कोई भी उस धनुष को उठा नहीं पाया तो राजा जनक अत्यंत निराश हुए और बोले कि क्या कोई भी ऐसा नहीं है जो मेरी पुत्री के योग्य हो। तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। उनकी आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया। तब राजा जनक ने श्री राम जी से सीता का विवाह करा दिया। इस प्रकार माता सीता और भगवान राम का विवाह हो गया। आज भी उन्हें एक आदर्श दंपत्ति माना जाता है।

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