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Kumbh Mela

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महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिवेणी संगम पर पारिवारिक सुख, खुशहाली, समृद्धि और शुभ स्वास्थ्य हेतु रुद्राभिषेक
1100/-

पूजा की तिथि: 4 मार्च 2019, सोमवार

पूजा का स्थान: कुंभ, प्रयागराज

पूजा का पूरा विवरण पढ़ें
ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर्व पर पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन संगम के पवित्र जल से रुद्राभिषेक करने वाले भक्त को अल्पकाल में ही देव कृपा से पारिवारिक खुशहाली, समृद्धि, शुभ स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह तिथि अगर सोमवार के दिन पड़ती है तब इसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। अगर सोमवार हो और साथ ही कुंभ लगा हो तब इसका महत्व अनन्त गुणा हो जाता है।
4 मार्च 2014 को महाशिवरात्रि, सोमवार और कुम्भ का योग अति पावन है। इस पावन योग में Amarujala.com कुंभ त्रिवेणी स्थल के पास रुद्राभिषेक का आयोजन कर रहा है।

यह रुद्राभिषेक कैसे किया जाएगा?
आपके Amarujala.com पर इस पूजा को ऑर्डर करने के पश्चात्, हम आप से फोन पर पूजा का संकल्प लेंगे। आपसे संकल्प लेने के बाद, वैदिक कर्मकांड और परंपराओं का सख्ती से पालन करने वाले हमारे अनुभवी पंडित आपकी ओर से रुद्राभिषेक संपन्न करेंगे।
पूजा समाप्त होने के बाद आपको निम्नलिखित प्रसाद भेजा जाएगा:
1. पंचमेवा
2. रुद्राभिषेक में सक्रिय किया गया पंचमुखी रूद्राक्ष (इसे आप अपने पूजा स्थल में रखें, नित्य इसके दर्शन करने से आपके घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का वास रहेगा) Buy Now For 1100/-

स्नान कार्यक्रम

मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
15 जनवरी 2019
पौष पूर्णिमा
21 जनवरी 2019
मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान)
4 फरवरी 2019, सोमवार
बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019
माघी पूर्णिमा
19 फरवरी 2019
महाशिवरात्रि
4 मार्च 2019

प्रयागराज कुंभ 2019

भारतीय संस्कृति और आस्था के महापर्व कुंभ मेले का आयोजन देश के 4 प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। कुंभ मेले में साधु-संतों से जुड़े 13 अखाड़ों की पेशवाई और पावन तिथियों पर शाही स्नान इस महामेले को और दिव्य और भव्य बनाता है।

आस्था के महामेले कुंभ में जब शंकराचार्य की सेना अपने आराध्य संग डुबकी लगाने पहुंचती है तो कुंभ मेले की रौनक बढ़ जाती है। दीन-दुनिया से अमूमन दूर तप-साधना में लीन रहने वाले नागा साधुओं का जीवन एक आम आदमी के मुकाबले कितना कठिन होता है, इस मेले में पहुंचने पर अनुभव होता है।

संगम तीरे रोशनी से नहाई हुई पंडालों की नगरी और घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र और धूप-दीप की सुगंध आपको अनयास अपने ओर खींच लाएगी। दुनिया के सबसे बड़े कुंभ मेले जैसा धार्मिक-आध्यात्मिक अनुभव शायद ही कहीं मिले।

तीरथ में मनोरथ की चाह लिए, बगैर किसी निमंत्रण के श्रद्धालु गठरी-मुठरी बांधे संगमतट पहुंचता है और आस्था डुबकी लगाकर वापस लौट जाता है। बोलियां, पहनावा और खान-पान अलग-अलग होने के बावजूद उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक पुण्य की डुबकी होती है।

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