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Kumbh Mela

Kumbh Mela Kumbh Mela

स्नान कार्यक्रम

मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)
15 जनवरी 2019
पौष पूर्णिमा
21 जनवरी 2019
मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान)
4 फरवरी 2019, सोमवार
बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)
10 फरवरी 2019
माघी पूर्णिमा
19 फरवरी 2019
महाशिवरात्रि
4 मार्च 2019

पूजा सेवाएं

कुंभ के पावन अवसर पर अपने ईश्वर को पूजा अर्पित करें, आशीर्वाद प्राप्त करें और प्रसाद की होम डिलीवरी पायें

धन, सुख-समृद्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए पौष पूर्णिमा के दिन श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ
1100/-

पूजा की तिथि: 21 जनवरी 2019, शुक्रवार

पूजा का स्थान: कुंभ, प्रयागराज

ऐसा माना जाता है कि कुंभ के समय संगम के पवित्र जल में सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति के विद्युत चुम्बकीय विकिरण के कारण भक्तों को अद्भुत शक्ति और लाभ प्राप्त होते हैं। हमारे प्राचीन ग्रंथों में किसी भी पवित्र स्थान पर नदी के समीप पूजा-अर्चना करने से इसका फल कई लाख गुना बताया गया है।
यह सर्वविदित है कि पूर्णिमा के दिन अगर विष्णु भगवान की पूजा की जाए तो उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। अगर पूर्णिमा हो और साथ ही कुंभ भी लगा हो तब इसका महत्व अनन्त गुणा बढ़ जाता है। इस दिन संगम के पवित्र जल के पास श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ करने से जातक अल् काल में ही देव कृपा से अतुल धन और भौतिक सुखों को प्राप्त कर लेता है।
21 जनवरी 2019 को पौष पूर्णिमा के दौरान Amarujala.com कुंभ त्रिवेणी स्थल के पास श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ का आयोजन कर रहा है। पूजा का पूरा विवरण पढ़ें
यह यज्ञ कैसे किया जाएगा?
आपके Amarujala.com पर इस पूजा को ऑर्डर करने के पश्चात्, हम आप से फोन पर पूजा का संकल्प लेंगे। आपसे संकल्प लेने के बाद, वैदिक कर्मकांड और परंपराओं का सख्ती से पालन करने वाले हमारे अनुभवी पंडित आपकी ओर से श्री लक्ष्मी नारायण यज्ञ करेंगे।
पूजा समाप्त होने के बाद आपको निम्नलिखित प्रसाद भेजा जाएगा:
1. पंचमेवा
2. यज्ञ में सक्रिय की गई मौली। कृपया इसे अपने सीधे हाथ की कलाई पर 21 दिन तक बांधे रखें। Buy Now For 1100/-
व्यापार, राजनीति और पद प्रतिष्ठा प्राप्ति हेतु मौनी अमावस्या के दिन सामूहिक शनि पूजा
1100/-

पूजा की तिथि: 04 फरवरी 2019, सोमवार

पूजा का स्थान: कुंभ, प्रयागराज

ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है। इस विशेष दिन संगम के पवित्र जल के पास शनि पूजा करने से जातक अल्पकाल में ही देव कृपा से व्यवसायिक, राजनैतिक सफलता और पद- प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेता है। यह तिथि अगर सोमवार के दिन पड़ती है तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अगर सोमवार हो और साथ ही कुंभ लगा हो तब इसका महत्व अनन्त गुना हो जाता है।
4 फरवरी 2019 को मौनी अमावस्या और कुम्भ के योग में Amarujala.com कुंभ त्रिवेणी स्थल के पास शनि पूजा का आयोजन कर रहा है। पूजा का पूरा विवरण पढ़ें
यह यज्ञ कैसे किया जाएगा?
एक बार जब आप हमारी साइट Amarujala.com पर इस पूजा का आर्डर कर देंगे तो हम आपको फोन करेंगे। आपसे फोन पर पूजा का संकल्प लिया जाएगा। आपसे संकल्प लेने के बाद वैदिक कर्मकांड और परंपराओं का सख्ती से पालन करने वाले हमारे अनुभवी पंडित आपकी ओर से सूर्य पूजा करेंगे।
पूजा समाप्त होने के बाद आपको निम्नलिखित प्रसाद भेजा जाएगा:
1. पंचमेवा
2. यज्ञ में सक्रिय की गई मौली। कृपया इसे अपने सीधे हाथ की कलाई पर 21 दिन तक बांधे रखें। Buy Now For 1100/-
बसंत पंचमी के मौके पर प्रतियोगी परीक्षा और प्रतिस्पर्धा में सफलता हेतु सरस्वती पूजा
1100/-

पूजा की तिथि: 10 फरवरी 2019, रविवार

पूजा का स्थान: कुंभ, प्रयागराज

बसन्त पंचमी का दिन माँ सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है - प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। अर्थात, ये परम चेतना हैं। माँ सरस्वती हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। छात्रों के लिए यह दिन अति महत्वपूर्ण होता है। यह सर्वविदित है कि त्रिवेणी संगम में माँ सरस्वती का भी समावेश है। बसंत पंचमी के दिन त्रिवेणी संगम के किनारे माँ सरस्वती की आराधना का विशेष महत्त्व है। यदि कुंभ इस दौरान लगा हो तब इसका महत्व अनन्त गुणा हो जाता है। इस दिन संगम के पवित्र जल के पास सरस्वती पूजा करने से जातक अल्पकाल में ही देवी कृपा से अतुल बुद्धि, स्मरण शक्ति प्राप्त कर हर परीक्षा में उत्तम स्थिति के साथ उत्तीर्ण हो सकता है।
10 फरवरी 2019 को Amarujala.com कुंभ त्रिवेणी स्थल के पास सरस्वती पूजा का आयोजन कर रहा है। पूजा का पूरा विवरण पढ़ें
यह पूजा कैसे की जाएगी?
आपके Amarujala.com पर इस पूजा को ऑर्डर करने के पश्चात्, हम आप से फोन पर पूजा का संकल्प लेंगे। आपसे संकल्प लेने के बाद, वैदिक कर्मकांड और परंपराओं का सख्ती से पालन करने वाले हमारे अनुभवी पंडित आपकी ओर से सरस्वती पूजा करेंगे।
पूजा समाप्त होने के बाद आपको निम्नलिखित प्रसाद भेजा जाएगा:
1. पंचमेवा
2. पीले वस्त्रों में लिपटी सक्रिय पीली हल्दी की गांठ और हल्दी युक्त चावल (किसी भी परीक्षा या प्रतियोगिता में जाते समय आप इसे अपनी जेब में रखें) Buy Now For 1100/-
महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिवेणी संगम पर पारिवारिक सुख, खुशहाली, समृद्धि और शुभ स्वास्थ्य हेतु रुद्राभिषेक
1100/-

पूजा की तिथि: 4 मार्च 2019, सोमवार

पूजा का स्थान: कुंभ, प्रयागराज

ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर्व पर पवित्र संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन संगम के पवित्र जल से रुद्राभिषेक करने वाले भक्त को अल्पकाल में ही देव कृपा से पारिवारिक खुशहाली, समृद्धि, शुभ स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह तिथि अगर सोमवार के दिन पड़ती है तब इसका महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। अगर सोमवार हो और साथ ही कुंभ लगा हो तब इसका महत्व अनन्त गुणा हो जाता है।
4 मार्च 2014 को महाशिवरात्रि, सोमवार और कुम्भ का योग अति पावन है। इस पावन योग में Amarujala.com कुंभ त्रिवेणी स्थल के पास रुद्राभिषेक का आयोजन कर रहा है। पूजा का पूरा विवरण पढ़ें
यह रुद्राभिषेक कैसे किया जाएगा?
आपके Amarujala.com पर इस पूजा को ऑर्डर करने के पश्चात्, हम आप से फोन पर पूजा का संकल्प लेंगे। आपसे संकल्प लेने के बाद, वैदिक कर्मकांड और परंपराओं का सख्ती से पालन करने वाले हमारे अनुभवी पंडित आपकी ओर से रुद्राभिषेक संपन्न करेंगे।
पूजा समाप्त होने के बाद आपको निम्नलिखित प्रसाद भेजा जाएगा:
1. पंचमेवा
2. रुद्राभिषेक में सक्रिय किया गया पंचमुखी रूद्राक्ष (इसे आप अपने पूजा स्थल में रखें, नित्य इसके दर्शन करने से आपके घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का वास रहेगा) Buy Now For 1100/-

प्रयागराज कुंभ 2019

भारतीय संस्कृति और आस्था के महापर्व कुंभ मेले का आयोजन देश के 4 प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। कुंभ मेले में साधु-संतों से जुड़े 13 अखाड़ों की पेशवाई और पावन तिथियों पर शाही स्नान इस महामेले को और दिव्य और भव्य बनाता है।

आस्था के महामेले कुंभ में जब शंकराचार्य की सेना अपने आराध्य संग डुबकी लगाने पहुंचती है तो कुंभ मेले की रौनक बढ़ जाती है। दीन-दुनिया से अमूमन दूर तप-साधना में लीन रहने वाले नागा साधुओं का जीवन एक आम आदमी के मुकाबले कितना कठिन होता है, इस मेले में पहुंचने पर अनुभव होता है।

संगम तीरे रोशनी से नहाई हुई पंडालों की नगरी और घंटा-घड़ियालों के साथ गूंजते वैदिक मंत्र और धूप-दीप की सुगंध आपको अनयास अपने ओर खींच लाएगी। दुनिया के सबसे बड़े कुंभ मेले जैसा धार्मिक-आध्यात्मिक अनुभव शायद ही कहीं मिले।

तीरथ में मनोरथ की चाह लिए, बगैर किसी निमंत्रण के श्रद्धालु गठरी-मुठरी बांधे संगमतट पहुंचता है और आस्था डुबकी लगाकर वापस लौट जाता है। बोलियां, पहनावा और खान-पान अलग-अलग होने के बावजूद उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ एक पुण्य की डुबकी होती है।

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