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हिंदी हैं हमः कविता-कहानी लिखने से पहले खूब पढ़ना जरूरी : प्रेम कुमार

Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 03:33 PM IST
संबोधित करते प्रेम कुमार व मंचासीन प्रधानाचार्य दीप्ती गोविला, रचना गुप्ता, नीतू गुप्ता।
संबोधित करते प्रेम कुमार व मंचासीन प्रधानाचार्य दीप्ती गोविला, रचना गुप्ता, नीतू गुप्ता। - फोटो : CITY OFFICE
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लेख कोई रॉकेट साइंस नहीं है। हृदय की संवेदनशीलता और उससे अभिव्यक्त करने का कौशल किसी को भी साहित्यकार बना सकता है। लिखने से पहले खूब पढ़ना चाहिए। सिर्फ किताब ही नहीं, आसपास की जिंदगी और परिवेश को भी पढ़ना चाहिए। किसी किताब से पढ़ा गया कौन सा वाक्य या जिंदगी में देखा गया कौन सा दृश्य आपकी भावनाओं को जगा दे, कहा नहीं जा सकता है। भावनाएं जागृत होंगी तो रचनाकार बनने का रास्ता अपने आप खुलने लगेगा।
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ये बातें कहानीकार डॉ. प्रेम कुमार ने अमर उजाला फाउंडेशन के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत धर्म समाज बाल मंदिर स्कूल में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, उन्हें खूब किताबें पढ़नी चाहिए। पढ़ना ही लिखने का आधार है, क्योंकि किताबों से शब्द और विचारों का सृजन होता है। उन्होंने कहा कि वह आज जो भी हैं, वह केवल ढेर सारी किताबों को पढ़ने की वजह से हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें खूब सवाल पूछने चाहिए। मस्तिष्क में जो सवाल उठते हैं, उन्हें फौरन पूछ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि किताबों को पढ़ने के साथ-साथ परिवेश, लोक, शास्त्र, दुख-दर्द के अनुभव से भी विचार पल्लवित-पुष्पित होते हैं, जो साहित्यकार बनने में मददगार साबित होते हैं।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि साहित्य पढ़ने से आप हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई नहीं, बल्कि इंसान होंगे। जब पढ़ेंगे तो विचारधारा भी पनपेगी और सच को सच और झूठ को झूठ कहने की हिम्मत भी होगी, तभी अफगानिस्तान, सीरिया में मासूमों के कत्ल पर रो सकते हैं और अमेरिका की कार्रवाई पर गुस्सा भी कर सकते हैं।
डॉ. प्रेम कुमार ने अपने बचपन के संस्मरण को साझा करते हुए कहा कि उन्हें बचपन में किताबें पढ़ने का जो चस्का लगा, वह आज भी बदस्तूर जारी है। वर्ष 1968 में पहली बार हाईस्कूल में कहानी लिखी, उसे पढ़कर वह खूब रोए। उनकी कहानी पत्रिका में छपी, जिसकी तारीफ साधारण लोगों ने की, जो उनके लिए सबसे बड़ा इनाम था। इसके बाद प्रतिष्ठित पत्रिका सारिका में उनकी कहानी दोमुंहे सांप छपी। इसके बाद लिखने का सिलसिला शुरू हो गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्या दीप्ति गोविला, उप प्रधानाचार्या नीतू गोयल, हेड मिस्ट्रेस रचना गुप्ता, टीचर्स इंचार्ज पूजा जैन सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
छात्रा ने संवाद के दौरान ही लिखी कविता
डॉ. प्रेम कुमार की सृजन यात्रा और उनकी बातों से प्रेरित होकर छात्रा अंशु जादौन ने संवाद के दौरान ही एक कविता लिख दी। जब उसने कविता सुनाई तो खूब प्रशंसा मिली। प्रेम कुमार ने कहा कि इस संवाद के माध्यम से आए कुछ बच्चों में लिखने-पढ़ने के प्रति अनुराग जागृत हुुआ है तो यह ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की बड़ी सफलता है।
इन्होंने किए सवाल
कहानीकार डॉ. प्रेम कुमार से लेखन, कविता सृजन, गोपालदास नीरज से सहमति व असहमति से संबंधी सवाल शिक्षिका डॉ. हैप्पी सक्सेना, सुधा शर्मा, डॉ. स्नेह लता शर्मा, छात्र तनिष अग्रवाल ने सवाल किए।
अमर उजाला का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान सराहनीय है। स्कूल में कहानीकार डॉ. प्रेम कुमार का बच्चों से संवाद एक सार्थक पहल है। इससे बच्चे जरूर लाभान्वित होंगे।
-संजय कुमार गोयल, प्रबंधक, डीएस बाल मंदिर स्कूल
साहित्यकार डॉ. प्रेम कुमार की ज्ञानवर्धक बातें विद्यार्थियों के सकारात्मक व सृजनात्मक सोच को प्रवाह देंगी। स्कूल में सफल आयोजन के लिए अमर उजाला को बधाई देती हूं।
-दीप्ति गोविला, प्रधानाचार्या, डीएस बाल मंदिर स्कूल

 हिंदी हैं हम के तहत आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षिकाएं व छात्र छात्राएं। संवाद

हिंदी हैं हम के तहत आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षिकाएं व छात्र छात्राएं। संवाद- फोटो : CITY OFFICE

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