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AMACON : नपुंसकता देता है हृदय रोगों को दावत, इस पर खुलकर बात करने की जरूरत

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 26 Sep 2022 12:19 AM IST
सार

उन्होंने कहा कि अक्सर लोग शर्म के कारण नपुंसकता को छिपाते हैं, जबकि यह गंभीर बीमारी है। नपुंसकता का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो आने वाले 4 से 5 सालों में इसके कारण हृदय रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि इस बारे में खुलकर बात की जाए।

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Prayagraj News : एमकॉन में आयोजित विशेषज्ञ चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

नपुंसकता बेहद गंभीर बीमारी है। इसके कई दुष्परिणाम भी देखने को मिलते है। खासतौर पर नपुंसकता के कारण हृदय से संबंधित रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बातें रविवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से आयोजित हुए 23वें एएमएकोन में मुंबई से आए सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. दीपक जुमानी ने कहीं।




उन्होंने कहा कि अक्सर लोग शर्म के कारण नपुंसकता को छिपाते हैं, जबकि यह गंभीर बीमारी है। नपुंसकता का सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो आने वाले 4 से 5 सालों में इसके कारण हृदय रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि इस बारे में खुलकर बात की जाए। अभिभावकों को अपने 30 से 35 साल के बच्चों से इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए, अगर ऐसी बीमारी है तो उनको इसका इलाज कराना चाहिए।  

एएमएकोन में जुटे विशेषज्ञों में बंगलुरू से आई नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चैत्रा जयदेव ने कोविड काल में ऑनलाइन क्लासेस के कारण बच्चों की आंखों में आने वाली समस्याओं पर चर्चा की। कहा कि पिछले दो सालों में बच्चों की आंखों पर ऑनलाइन क्लासेस के कारण अधिक असर पड़ा है। मोबाइल या लैपटाप का अधिक प्रयोग करने से लेजिया नाम की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर जिन बच्चों को चश्मा लगा है। उनमें इसके होने का खतरा अधिक होता है। इस बीमारी में आंखों की रौशनी कम हो जाती है, इसलिए इससे बचाव के लिए बच्चों को आउटडोर खेल में प्रतिभाग करना चाहिए।

त्वचा रोगों पर चर्चा करते हुए नागपुर से आए डॉक्टर विक्रांत सावजी ने कहा कि ज्यादा गोरे होने के चक्कर में अक्सर लोग बाजार से क्रीम खरीदकर उसका प्रयोग करते हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के उत्पादों का प्रयोग करने से पहले डॉक्टरों से जरूर पूछना चाहिए। बाजार से कोई भी गोरे होने की क्रीम खरीदकर लगाने से शरीर की चमड़ी खराब होने का खतरा होता है। क्योकि शरीर की चमड़ी पतली होती है। लंबे समय तक इसका प्रयोग करने से चमड़ी सख्त हो जाती है।

इसके पहले कार्यक्रम के शुरूआत  में एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. सुजीत सिंह व सचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता ने आए हुए सभी डॉक्टरों का स्वागत किया। इसके बाद विशेषज्ञों ने अपने विचार विभिन्न रोगों पर सांझा किए। इसमें नई दिल्ली से आए एंडोक्रानोलॉजिस्ट डॉ. दीप दत्त ने हार्मोन से जुड़ी बीमारियों पर बात की। गुरुग्राम से आए गैस्ट्रोइंट्रोलाजिस्ट डॉ. गौरदास चौधरी, फूट सर्जन डॉ. संजय शर्मा ने पल्मोनोलाजिस्ट पर चर्चा की। इसी प्रकार नोएडा से आयी डॉ. दीप्शा कृपलानी आदि ने भी अपने विचार रखें। इस मौके पर डॉ. सुबोध जैन, डॉ. सरिता बजाज, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. संतोष सिंह, डॉ. अनूप चौहान, डॉ. केके अग्रवाल और डॉ. अंकित अग्रवाल समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।
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