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kaushambi : तीन करोड़ की लूट मामले में 48 घंटे बाद भी पुलिस मौन, व्यापारी बोला- फ्लाइट से आ रहा हूं

अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 03 Oct 2022 10:33 PM IST
सार

सोमवार को व्यापारी के बारे में भी कुछ बोलने से अधिकारी कतराते रहे। गौरतलब है कि 30 सितंबर की रात हाईवे पर ककोढ़ा गांव के पास एक्सयूवी गाड़ी से तीन करोड़ रुपये लूट लिए गए थे। गाड़ी में विशेष रूप से बनी कैविटी में रखी रकम लूटकर बदमाश भाग निकले थे।

Kaushambi :  लूट की शिकार कार के टूटे शीशे के टुकड़े एकत्र करती फारेंसिक टीम।
Kaushambi : लूट की शिकार कार के टूटे शीशे के टुकड़े एकत्र करती फारेंसिक टीम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

छुटभैये अपराधी को भी पकड़कर मीडिया के जरिए अपनी उपलब्धि का बखान करने वाली पुलिस तीन करोड़ की लूट के मामले में पुलिस 48 घंटे बाद भी मौन रही। कोखराज में प्रयागराज-वाराणसी हाईवे पर हुई इस घटना में दो दिन की जांच में पुलिस किस नतीजे पर पहुंची, इस बारे में थानेदार से लेकर अधिकारी तक कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए। 


एक दिन पहले तक लूटी गई रकम वाराणसी के जिस व्यापारी की बताई जा रही थी, उसका लोकेशन दूसरे दिन मिला। बताया जा रहा है कि फोन से बातचीत में व्यापारी ने कहा कि वह फ्लाइट से आ रहा है। 



हालांकि सोमवार को व्यापारी के बारे में भी कुछ बोलने से अधिकारी कतराते रहे। गौरतलब है कि 30 सितंबर की रात हाईवे पर ककोढ़ा गांव के पास एक्सयूवी गाड़ी से तीन करोड़ रुपये लूट लिए गए थे। गाड़ी में विशेष रूप से बनी कैविटी में रखी रकम लूटकर बदमाश भाग निकले थे। साथ ही कार को भी मौके पर ही छोड़ दिया था। 

फ्लाइट से आने की कही थी बात
उधर सूत्रों के मुताबिक, एक चर्चा यह भी रही कि रकम गुजरात के एक कारोबारी की थी, जिसे वाया वाराणसी-प्रयागराज-दिल्ली चेन्नई पहुंचाया जाना था। सूत्रों का यह भी कहना है कि रात में फोन पर हुई बातचीत में गुजरात के व्यापारी ने फ्लाइट से प्रयागराज के लिए रवाना होने की बात बताई थी। हालांकि, सोमवार शाम तक वह कोखराज नहीं पहुंचा। इस बाबत पूछने पर एएसपी समर बहादुर ने एक बार फिर रटा-रटाया जवाब दिया। कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

किसे बचा रही पुलिस
इस मामल में जिस तरह से पुलिस ने चुप्पी साध रखी है, उससे अब पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रकम का मालिक जांच में सहयोग नहीं कर रहा है, तो उसे पकड़ने के लिए क्या कदम उठाए गए। व्यापारी का एक दफ्तर वाराणसी में होने की बात एक दिन पहले अधिकारियों ने खुद बताई थी। तो क्या अब तक जांच के लिए कौशाम्बी की कोई टीम वाराणसी भेजी गई।


सवाल यह भी है कि रकम के बेनामी होने की भी आशंका है तो इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को दी गई या नहीं। एक चर्चा यह भी है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि बेनामी रकम के लेनदेन का सरगना कोई बेहद रसूखदार शख्स हो, जिसे बचाने के लिए ही दो दिन से जांच जारी होने की ही बात कही जा रही हो। 

जवाब देने से भी बचते रहे अफसर
इस मामले में एसपी कौशाम्बी हेमराज मीणा से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वह जवाब देने से बचते रहे। सीयूजी नंबर पर फोन करने पर पीआरओ ने कॉल रिसीव की। जो साहब के व्यस्त होने की बात बताता रहा। निजी नंबर पर भी उनसे संपर्क नहीं हो सका। उधर आईजी डॉ. राकेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने भी यही कहा कि जांच जारी है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा। 

गुजरात का व्यापारी, प्रयागराज की गाड़ी, सोची समझी साजिश तो नहीं? 

तीन करोड़ की लूट के मामले में एक और चौंकाने वाली बात यह है कि दो दिन भी एक्सयूवी गाड़ी के मालिक का पता नहीं चल सका। उधर अब तक सामने आई बातों से इस बात की भी आशंका है कि करोड़ों रुपये के लेनदेन के इस खेल के पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है। 


दअरसल गाड़ी जिस विनयराज सिंह वाघेला के नाम पर दर्ज है, वह मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा का रहने वाला है। हालांकि उसने अस्थायी पते के रूप में बाघंबरी हाउसिंग स्कीम अल्लापुर दर्ज कराया है। साजिश की आशंका का सबसे बड़ा कारण यह है कि उसने जनवरी में ही किराये का मकान छोड़ दिया था। लेकिन गाड़ी अप्रैल में यानी चार महीने बाद खरीदने के बावजूद उसने पता अल्लापुर का ही दर्ज कराया। 


जानकारों का कहना है कि पता दर्ज कराने के लिए गाड़ी मालिक ने ड्राइविंग लाइसेंस, आधार या अन्य कोई आईडी प्रूफ दिया होगा। इसका मतलब यह है कि उसने किराये पर रहने के दौरान अल्लापुर के ही पते पर आईडी प्रूफ भी बनवा लिया था। बड़ा सवाल यही है कि यह महज संयोग है या किसी सोची समझी साजिश के तहत ऐसा किया गया। 

पांच महीने पहले ही आया था
गाड़ी मालिक के बारे में एक और यह बात पता चली है कि वह पांच महीने पहले ही किराये पर रहने आया था। उसके साथ उसका परिवार भी रहता था। वह खुद को मसालों का कारोबारी बताता था। कौशाम्बी पुलिस की सूचना पर जब जार्जटाउन पुलिस बताए गए पते पर पहुंची तो मकान मालिक ने उसके मकान छोड़कर जनवरी में ही चले जाने की बात बताई। हालांकि वह यह नहीं बता सका कि वह कहां गया। 
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