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अब यमुनाघाटी में महकेगी कश्मीर के केशर की खुशबू

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 03 Oct 2022 10:12 PM IST
सार

गंगा घाटी के बाद अब यमुना घाटी भी अब कश्मीर के केसर से महकेगी।उद्यान विभाग ने यमुना घाटी के राना गांव में काश्तकारों को इसके बीज बांटे हैं।इससे उत्साहित होकर विभाग इस साल योजना को गंगा घाटी में विस्तार देने के साथ यमुना घाटी में भी केसर की खेती का परीक्षण करने जा रहा है।

Now the fragrance of Kashmir's saffron will smell in the Yamuna valley
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विस्तार

गंगा घाटी के बाद अब यमुना घाटी भी अब कश्मीर के केसर से महकेगी। उद्यान विभाग ने यमुना घाटी के राना गांव में काश्तकारों को इसके बीज बांटे हैं। गंगा घाटी के निचला टकनौर क्षेत्र के दो व बाड़ागड्डी के एक गांव में भी काश्तकारों को यह बीज दिए गए हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ ने गंगा घाटी के हर्षिल क्षेत्र में केसर की खेती का सफल परीक्षण किया था। यहां पिछले साल उद्यान विभाग ने घाटी के सुक्की, झाला, मुखबा, पुराली व जसपुर सहित कुल पांच गांव के 38 काश्तकारों को केसर के बीज बांटे थे जिन पर एक से डेढ़ माह में फूल खिल गए थे। इससे उत्साहित होकर विभाग इस साल योजना को गंगा घाटी में विस्तार देने के साथ यमुना घाटी में भी केसर की खेती का परीक्षण करने जा रहा है। अपर उद्यान अधिकारी डा. पूजा उनियाल ने बताया कि गंगाघाटी के निचला टकनौर क्षेत्र के रैथल व पिलंग में 6 तथा बाड़ागड्डी पट्टी के किशनपुर गांव में 2 काश्तकारों को कश्मीर से मंगवाकर केसर के बीज उपलब्ध कराए हैं। साथ ही यमुनाघाटी के राना गांव में दो काश्तकारों और हर्षिल क्षेत्र में केसर का उत्पादन बढ़ाने के लिए 16 काश्तकारों को बीज बांटे हैं। बताया कि केसर अनुसंधान स्टेशन पंपोर कश्मीर से करीब पांच क्विंटल केसर के बीज मंगवाकर यहां वितरित किए हैं। उक्त सभी क्षेत्रों में ठंडी जलवायु होने के चलते यहां केसर की खेती का परीक्षण सफल रहने की उम्मीद है।

गुणवत्ता रिपोर्ट का है इंतजार
गंगा घाटी के हर्षिल क्षेत्र में उत्पादित केसर की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट का भी इंतजार है। पिछले साल उद्यान विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ से यहां काश्तकारों की ओर से उत्पादित केसर की गुणवत्ता जांचने का अनुरोध किया था जिसके बाद केविके ने केसर के सैंपल को गुणवत्ता परीक्षण के लिए कश्मीर भेजा था। मगर इसकी अब तक रिपोर्ट नहीं आई है। केविके के उद्यान विशेषज्ञ डा. पंकज नौटियाल ने बताया कि केसर के सैंपल आईआईएम जम्मू भेजे गए थे। जहां तकनीकी कारणों के चलते रिपोर्ट नहीं मिली है। अब आईएचबीटी पालमपुर से जांच करवाई जाएगी।
कोट
गंगा घाटी के हर्षिल क्षेत्र में केसर की खेती का परिणाम अच्छा रहा जिसके बाद अन्य क्षेत्रों में भी इसके परीक्षण की योजना है। इसी उद्देश्य से गंगा घाटी के अन्य क्षेत्रों के साथ यमुनाघाटी के राना गांव में काश्तकारों को केसर के बीज बांटे गए हैं। - डा.रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।

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