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उत्तराखंड: सात दिन में मात्र दो घंटे के लिए खुला हेलंग-उर्गम मार्ग, मलारी हाईवे के न खुलने से आफत में नीती घाटी के ग्रामीण

उर्गम घाटी के करीब एक दर्जन गांवों को यातायात से जोड़ने वाली हेलंग-उर्गम सड़क 17 अक्तूबर को देर रात से बंद पड़ी है। शनिवार को शाम चार बजे सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए खोला गया, लेकिन शाम छह बजे पहाड़ी से बोल्डर और भारी मात्रा में मलबा आने से सड़क फिर अवरुद्ध हो गई। 

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शुरूआत के पांच किलोमीटर तक सड़क खस्ताहाल में पहुंच गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजीएसवाई के तहत दस साल पहले इस सड़क का निर्माण कार्य पूरा हुआ था। लेकिन आज तक सड़क की स्थिति को सुधारा नहीं गया है। सड़क पर कहीं पुश्ते निर्माण नहीं है तो कहीं नाली नहीं है। जिससे बारिश होने पर सड़क जगह-जगह ध्वस्त हो जाती है। उर्गम घाटी में पंचम केदार कल्पेश्वर और पंच बदरी में ध्यानबदरी मंदिर स्थित है, जिससे यहां पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की वर्षभर आवाजाही बनी रहती है।

साथ ही इस सड़क से उर्गम घाटी की करीब 15 हजार आबादी जुड़ी हुई है। लेकिन सड़क कभी कभार ही सही हालत में रहती है। सड़क से डामर भी पूरी तरह से उखड़ चुका है। जगह-जगह पुस्ते टूटे पड़े हैं। क्षेत्र में हर साल हजारों पर्यटक और यात्री आते हैं, सड़क की दयनीय स्थिति के चलते कई बार पर्यटक आधे रास्ते से ही लौट जाते हैं। बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़क पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ब्लॉक प्रमुख जोशीमठ हरीश परमार, प्रधान संगठन के अध्यक्ष अनूप सिंह, ग्राम प्रधान देवग्राम देवेंद्र रावत, उप प्रधान चंद्रप्रकाश नेगी, उर्गम प्रधान मिंकल देवी, भर्की प्रधान मंजू देवी और जनदेश संस्था के सचिव लक्ष्मण नेगी ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सड़क के तृतीय फेज के तहत सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए बजट स्वीकृत करने की मांग उठाई है।
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मन की बात:  प्रधानमंत्री मोदी ने की बागेश्वर की पूनम से बात, जिले में शतप्रतिशत टीकाकरण होने पर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में बागेश्वर की हेल्थ वर्कर पूनम नौटियाल से बात की। पूनम बागेश्वर के स्वास्थ्य उपकेंद्र चामी में एएनएम पद पर तैनात हैं। प्रधानमंत्री ने बागेश्वर जिले में शतप्रतिशत टीकाकरण होने पर बागेश्वर के लोगों को बधाई दी।

हेल्थ वर्कर्स की भूमिका की सराहना की
प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में शत प्रतिशत टीकाकरण को लेकर शुभकामनाएं दीं और टीकाकरण को संपन्न कराने में हेल्थ वर्कर्स की भूमिका की सराहना की। उन्होंने पूनम से बातचीत के दौरान टीकाकरण को लेकर लोगों में उत्साह, पहाड़ों में टीकाकरण कराने को लेकर आई परेशानी को लेकर बातचीत की। पूनम ने बताया कि जनवरी में टीकाकरण की शुरुआत होने के बाद से वह लगातार इस कार्य में जुटी हैं। स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण कराने के अलावा घर-घर जाकर भी लोगों को टीके लगाए। अधिकांश लोगों ने टीकाकरण को लेकर उत्साह दिखाया। लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित किया गया। बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों को घर-घर जाकर टीके लगाए। टीका लगवाने से बच रहे लोगों को बताया गया कि टीका पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है।

स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले लागों की लिस्ट बनाई
पीएम ने पूनम से कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि उन्होंने (पूनम) आउट ऑफ वे जाकर कार्य किया है। पूनम ने बताया कि उन्होंने लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया। स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले लोगों की लिस्ट बनाई। जिन लोगों ने टीकाकरण नहीं कराया था, उन्हें घर-घर जाकर टीका लगाया। पीएम ने पूछा कि एक दिन में कितना क्षेत्र कवर करना पड़ता था। पूनम ने बताया कि एक दिन में आठ से 10 किमी के एरिया में टीकाकरण किया। पीएम ने कहा कि पहाड़ों में आठ से 10 किमी चलने में पूरा दिन निकल जाता है। पूनम ने बताया कि उनकी पांच लोगों की टीम ने घर-घर जाकर टीकाकरण कराया। जिसमें डॉक्टर, एएनएम, फार्मासिस्ट, आशा और डाटा इंट्री ऑपरेटर होते थे। पीएम ने संचार नेटवर्क की दिक्कत के बारे में पूछा तो पूनम ने बताया कि कुछ गांवों में संचार सुविधा नहीं होने के कारण डाटा बागेश्वर आकर फीड किया जाता था।

प्रधानमंत्री से बात करने के बारे में कभी सोचा नहीं
पीएम मोदी से बात करने के बाद एएनएम पूनम ने बताया कि प्रधानमंत्री से बात करने के बारे में कभी सोचा नहीं था। जिले के शतप्रतिशत टीकाकरण ने यह अवसर दिलाया। जब पता चला कि पीएम बात करेंगे तो बातचीत से पहले कई तरह के ख्याल आ रहे थे। प्रधानमंत्री से किस तरह से बात होगी। वह क्या-क्या सवाल पूछेंगे, लेकिन उन्होंने बड़ी सहजता से बात की। जिसके कारण बात करने से पहले जो मन में डर था, वह चला गया। उन्होंने टीकाकरण को लेकर किए गए कार्य की सराहना की, जो हमारे कार्य और विभाग के लिए उत्साहवर्धक है।
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उत्तराखंड आपदा:  हल्द्वानी में बही थी गौला पुल की एप्रोच रोड, निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

बीते दिनों उत्तराखंड में आई आपदा में हल्द्वानी के गौला पुल की एप्रोच रोड बह गई थी। जिससे पुल को भी खतरा पैदा हो गया था। रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिहं धामी पुल का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने जल्द से जल्द रोड निर्माण के आदेश दिए।

हल्द्वानी में गौला पुल की एप्रोच रोड बही, पुल को भी खतरा
नदी के उफान में आने से बाईपास में गौला नदी में बने पुल की 30 मीटर एप्रोच रोड बह गई थी। इससे पुल को खतरा पैदा हो गया है। एनएचएआई और लोनिवि के अधिकारियों ने पुल का निरीक्षण कर एप्रोच रोड के बहने का कारण अवैध खनन बताया है। हालांकि एनएचएआई के अधिकारियों ने प्रथम दृष्टया गौला पुल को सुरक्षित बताया है।

आपदा के दौरान गौला नदी ने पुल की एप्रोच रोड को काटना शुरू कर दिया था। इससे 30 मीटर एप्रोच रोड पूरी तरह कट गई थी। इससे पुल और एप्रोच रोड के बीच बनी सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त हो गई। पुल की साइड वॉल की बुनियाद भी दिखने लगी थी। करीब 25 मीटर गहरा गड्ढा हो गया था।

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पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पुल के दोनों ओर बैरीकेड कर लोगों को वहां से हटाया। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर योगेंद्र शर्मा और लोनिवि के अधिशासी अभियंता अशोक चौधरी मौके पर पहुंचे। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि अवैध खनन के कारण एप्रोच रोड बही है। कहा कि अवैध खनन को लेकर कई बार जिला प्रशासन को अवगत कराया गया था। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

अवैध खनन पर प्रशासन मूकदर्शक बना रहा
नदी के पुल के दोनों ओर एक किलोमीटर तक खनन शासन ने प्रतिबंधित किया हुआ है, लेकिन हल्द्वानी गौला पुल के नीचे अवैध खनन बदस्तूर जारी रहा। अमर उजाला की ओर से भी कई बार इसको लेकर खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की टीम ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि लोनिवि और एनएचएआई के अधिकारी अवैध खनन को लेकर कई बार डीएम से शिकायत भी कर चुके हैं। इसके बाद भी अवैध खनन पर ध्यान नहीं दिया गया।
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उत्तराखंड: रात बर्फबारी के बीच केदारनाथ में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, सुबह बर्फ से सराबोर दिखी केदारघाटी, तस्वीरें

चारधाम की ऊंची पहाड़ियों पर रविवार शाम को बर्फबारी होने से ठंड में इजाफा हो गया है। वहीं, केदारनाथ धाम में रविवार देर शाम जमकर बर्फबारी हुई। इस बीच सांयकालीन आरती के लिए  श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा रहा। श्रद्धालु छाता लेकर पूजा करते नजर आए। वहीं, रात भी बर्फबारी हुई तो सुबह धाम बर्फ से सराबोर नजर आया।

हालांकि सुबह से मौसम सामान्य बना हुआ है। सोनप्रयाग से केदारनाथ के लिए निरंतर यात्री भेजे जा रहे हैं। हेलीपैड सहित यात्रा मार्ग पर हल्की बर्फ जमी है। रास्तों व हैलीपेड से बर्फ हटाई जा रही है। जिससे हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित हो गई है।

उत्तराखंड समेत जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले एक सप्ताह से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से एक बार फिर राजधानी देहरादून के अलावा उत्तरकाशी, टिहरी और चमोली जैसे जिलों में मौसम बदल गया है। 

उत्तराखंड: सात दिन में मात्र दो घंटे के लिए खुला हेलंग-उर्गम मार्ग, मलारी हाईवे के न खुलने से आफत में नीती घाटी के ग्रामीण

रविवार को राजधानी देहरादून समेत आसपास के इलाकों में तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश हुई, वहीं पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एवं वरिष्ठ मौसम विज्ञानी विक्रम सिंह के मुताबिक आज मौसम साफ बना रहेगा। लेकिन आने वाले दिनों में पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी हो सकती है। 
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केदारनाथ में बर्फबारी केदारनाथ में बर्फबारी

उत्तराखंड: लालकुआं में खुला देश का पहला एरोमेटिक गार्डन, देखें खूबसूरत तस्वीरें

उत्तराखंड के हल्द्वानी में लालकुआं के वन अनुसंधान केंद्र में देश की पहली सुरभि वाटिका (एरोमेटिक गार्डन) तैयार की गई है। तीन एकड़ क्षेत्रफल में तैयार इस वाटिका में 140 सगंध प्रजातियों को लगाया गया है।

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इस वाटिका को तीन साल में तैयार किया गया है। इसका उद्घाटन रविवार को महाराष्ट्र की वन टच एग्रीकान संस्था की संचालिका बीणा राव और मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया।

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मुख्य वन संरक्षक संजीव ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से सगंध प्रजातियों को लाकर यहां लगाया गया है। यह देश की पहला सुरभि वाटिका है। इसके बनने से प्रजातियों के संरक्षण, शोध, जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा आजीविका से जुड़े कार्यों में यह मददगार साबित हो सकेगी। वाटिका को नौ हिस्सों में तैयार किया गया है।
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चारधाम यात्रा 2021: केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टर की ब्लैक टिकटिंग पर रखी जा रही पैनी नजर

केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टर के लिए ब्लैक टिकटिंग को रोकने के लिए इस बार जिला प्रशासन ने कड़ी निगरानी कर रहा है। हेलीकॉप्टर सेवा के नोडल अधिकारी के द्वारा हेली कंपनियों के काउंटर का प्रतिदिन निरीक्षण के साथ टिकट बुकिंग की रिपोर्ट मांगी जा रही है। साथ ही यात्रियों से भी फीडबैक लिया जा रहा है। वहीं, जिलाधिकारी कार्यालय से भी हेलीकॉप्टर सेवा की मॉनीटरिंग की जा रही है।

केदारनाथ के लिए इस वर्ष 6 हेली कंपनियों के द्वारा गुप्तकाशी, फाटा व शेरसी से हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन किया जा रहा है। 23 दिनों में हेलीकॉप्टरों के द्वारा अलग-अलग हेलीपैड से दो तरफा 3526 शटल की गई हैं। इस दौरान 18961 यात्री हेलीकॉप्टर से केदारनाथ पहुंचे हैं। जबकि बाबा केदार के दर्शन कर 18578 यात्री वापस भी लौटे हैं।

अमर उजाला खास: केदारनाथ धाम में हेली कंपनियां उड़ा रहीं नियमों की धज्जियां

प्रतिदिन हेलीकॉप्टर से ढाई सौ से अधिक शटल हो रही हैं। इस बार खास बात यह है कि अभी तक किसी भी हेली कंपनी के द्वारा टिकट ब्लैक नहीं किए गए हैं। क्योंकि प्रशासन द्वारा तैनात नोडल अधिकारी/जिला पर्यटन व सहासिक खेल अधिकारी सुशील नौटियाल द्वारा प्रत्येक हेली कंपनी के बुकिंग काउंटर से प्रतिदिन की टिकट बुकिंग रिपोर्ट मांगी जा रही है।

साथ ही गुप्तकाशी से शेरसी तक वे दिन में कम से कम दो से तीन कंपनियों के कार्यालय में दो से तीन घंटे बैठकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं। यही नहीं, नोडल अधिकारी द्वारा हेलीकॉप्टर से धाम जाने व लौटने वाले यात्रियों से फीडबैक भी लिया जा रहा है, जिसके माध्यम से व्यवस्था को और दुरस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथ ही पुलिस द्वारा भी हेलीपैड व हेली कंपनियों के कार्यालयों से निरंतर संपर्क बना हुआ है। इधर, जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि हेलीकॉप्टर सेवा में ब्लैक टिकटिंग को लेकर अभी तक कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है। इसके लिए नोडल अधिकारी बधाई के पात्र हैं। यात्रा कंट्रोल रूम से हेली सेवा की नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।

2019 में छह मुकदमे हुए थे दर्ज 
केदारनाथ यात्रा में हेली कंपनियों की मनमानी, ब्लैक टिकटिंग और यात्रियों के साथ अभद्रता नई बात नहीं है। वर्ष 2019 में ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर एजेंटों के माध्यम से कई हेली कंपनियों ने मोटी कमाई का प्रयास भी किया। इस दौरान यात्रियों की शिकायत पर सोनप्रयाग, फाटा व गुप्तकाशी पुलिस कोतवाली/चौकी व थाना में मुकदमे भी दर्ज किए गए थे। तब, जांच के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था। वर्ष 2017 व 2018 में भी इस तरह के 10 से अधिक मामलों में सात लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
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उत्तराखंड में बदला मौसम: चारधाम की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, मैदान में बारिश से बढ़ी ठंड, तस्वीरें

उत्तराखंड में रविवार को मौसम ने एक बार फिर करवट बदली। सुबह से प्रदेशभर में धूप खिली रही, लेकिन शाम होते ही पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो गई तो मैदान में बारिश ने ठंड बढ़ा दी। बदरीनाथ और केदारनाथ की चोटियां बर्फ से ढकी नजर आईं। वहीं, यमुनोत्री धाम में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। गंगोत्री की ऊंची चोटियां भी बर्फ से ढकी हैं।

उत्तराखंड: पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के लिए बनेगी एसओपी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दिए निर्देश

उत्तराखंड समेत जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले एक सप्ताह से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ से एक बार फिर राजधानी देहरादून के अलावा उत्तरकाशी, टिहरी और चमोली जैसे जिलों में मौसम बदल गया। राजधानी समेत आसपास के इलाकों में तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश हुई, वहीं विकासनगर व मसूरी के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई।  राजधानी दून में अचानक पारा नौ डिग्री गिरकर 21 डिग्री पर पहुंच गया। 
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उत्तराखंड में कोरोना: रविवार को छह नए संक्रमित मिले, एक मरीज की हुई मौत

उत्तराखंड में बिगड़ा मौसम
उत्तराखंड में अब कोरोना संक्रमण कम हो रहा है। बीते 24 घंटे में प्रदेश में छह नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, एक मरीज की मौत हुई है। जबकि नौ मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। सक्रिय मरीजों की संख्या 163 पहुंच गई है। 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, रविवार को 9871 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। 10 जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, हरिद्वार, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी, ऊधमसिंह नगर और उत्तरकाशी में एक भी संक्रमित मरीज नहीं मिला है। वहीं,  चंपावत में एक, देहरादून में तीन और नैनीताल में दो संक्रमित मरीज मिले हैं।

उत्तराखंड: रुड़की में बेकाबू हो रहा डेंगू, 55 नए मरीजों में हुई पुष्टि, एक संदिग्ध की मौत

संक्रमण दर 0.06 प्रतिशत पहुंची
प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 343821 हो गई है। इनमें से 330121 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7399 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदेश की रिकवरी दर 96.02 प्रतिशत और संक्रमण दर 0.06 प्रतिशत दर्ज की गई है। 
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उत्तराखंड आपदा: वायु सेना ने दारमा घाटी में फंसे सभी पर्यटक सुरक्षित निकाले, अग्रिम चौकी के लिए भेजी रसद 

आपदा के कारण दारमा घाटी में फंसे सभी पर्यटकों को वायु सेना ने चार दिन के रेस्क्यू अभियान के बाद निकाल लिया है। रविवार को 11 पर्यटकों समेत 18 लोगों को हेलीकॉप्टर से धारचूला लाया गया। सेना ने  हेलीकॉप्टर से चीन सीमा के निकट स्थित अग्रिम पोस्ट के लिए 15 क्विंटल रसद भी भेजी।

17 से 19 अक्तूबर तक हुई बारिश और बर्फबारी के कारण सड़कें बंद होने से पंचाचूली घूमने गए पर्यटक दारमा घाटी में फंस गए थे। स्थिति को देखते हुए सरकार ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को निकालने के लिए वायुसेना की मदद से चार दिन तक राहत और बचाव अभियान चलाया।

उत्तराखंड में बदला मौसम: चारधाम की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, मैदान में बारिश से बढ़ी ठंड, तस्वीरें

शनिवार को व्यास घाटी से फंसे पर्यटकों को तो निकाल लिया गया लेकिन मौसम खराब होने के कारण दारमा घाटी में बचाव कार्य नहीं हो पाया था। रविवार को मौसम ठीक होने पर वायुसेना के एएलएच हेलीकॉप्टर ने 18 लोगों को सुरक्षित निकाला। इनमें 11 पर्यटक, चल गांव में पोस्टमार्टम करने गई स्वास्थ्य टीम के चार सदस्य और तीन स्थानीय नागरिक शामिल हैं। डीएम ने दो लोगों की मेडिकल टीम को हेलीकॉप्टर से दुग्तु गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए भेजा। 
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उत्तराखंड में बिगड़ा मौसम: आपदा से अभी उभरे नहीं, फिर जोरदार बारिश ने डराया, शासन-प्रशासन अलर्ट

उत्तराखंड में 17, 18 और 19 अक्तूबर को हुई भारी बारिश के बाद आई आपदा से अभी संभले भी नहीं थे कि रविवार शाम प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुई जोरदार बारिश ने एक बार फिर लोगों को डरा दिया। इस दौरान शासन-प्रशासन से जुड़े लोग एक बार फिर अलर्ट मोड पर आ गए।

रविवार को राज्य सचिवालय स्थित आपातकालीन परिचालन केंद्र में फिर से हलचल बढ़ गई। हालांकि मौसम विभाग की ओर से राज्य के उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल सहित चंपावत जिले में हल्की वर्षा, गर्जन के साथ बौछारें पड़ने की चेतावनी जारी की गई थी। इसके देखते हुए शासन-प्रशासन पहले ही अलर्ट मोड में था। लेकिन बारिश शुरू होते ही लोगों के बीच डर का माहौल बन गया। खासकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोग सहमे रहे।

उत्तराखंड में बदला मौसम: चारधाम की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, मैदान में बारिश से बढ़ी ठंड, तस्वीरें

हालांकि राहत की बात यह रही कि इस दौरान राज्य में बारिश से किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है। प्रदेश में रविवार तक सरकारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 72 ही थी, जबकि कुल मरने वालों की संख्या 80 बताई जा रही है। सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली सूचना के अनुसार, आपदा में अल्मोड़ा में छह की मौत हुई दो घायल हुए, चंपावत में 11 की मौत हुई चार घायल हुए, बागेश्वर में एक मौत हुई।

नैनीताल में मरने वालों की संख्या 35 है, जबकि घायलों की संख्या पांच बताई गई है। इसी तरह से यूएसनगर में दो मौत, तीन घायल, पौड़ी में तीन की मौत, दो घायल, पिथौरागढ़ में तीन की मौत, दो घायल, चमोली में एक की मौत और चार घायल और उत्तरकाशी में दस की मौत और चार लोग घायल बताए गए हैं।

क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों की संख्या 224 पहुंची
जैसे-जैसे आपदा में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है, क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। रविवार तो क्षतिग्रस्त भवनों की संख्या 224 पहुंच गई थी। इनमें अल्मोड़ा में 40, चंपावत में 2, नैनीताल में 74, यूएस नगर में सर्वाधित 93 और चमोली में 15 भवनों को नुकसान पहुंचा है। इनमें आवासीय के साथ व्यवसायिक भवन भी शामिल हैं। कुछ भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं तो कुछ को आंशिक क्षति पहुंची है।
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Karwa Chauth 2021: सुहागिनों ने चांद का दीदार कर मांगा अखंड सौभाग्य, देवभूमि में ऐसी रही करवाचौथ की रौनक, तस्वीरें...

पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने दिनभर व्रत रखने के बाद रात को चांद का दीदार कर अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। उत्तराखंड में सुहागिनों ने दिन भर के निर्जला व्रत रखा और दोपहर में विधि-विधान से पूजा अर्चना की। शाम को सोलह श्रंगार कर उन्होंने चांद निकलने का इंतजार किया। रात 8.11 बजे चांद निकलने के बाद रस्म के अनुसार चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य दिया और व्रत का उद्यापन किया।  

इसके बाद पति की आरती कर व्रत खोला और पतियों ने आकर्षक उपहार भी दिए। इससे पहले दिनभर घरों और मंदिरों में करवा चौथ को लेकर विशेष आयोजन हुए। कई जगह घरों में सुहागिनों ने सामूहिक रूप से करवाचौथ की कथा सुनी। 

लेकिन शाम को मौसम खराब होने के कारण कई जगहों पर चांद नहीं दिखाई दिया। ऐसे में सुहागिनों ने चांद की दिशा को देखकर भी व्रत खोला। वहीं, कई जगहों पर लोगों ने ऑनलाइन दूसरे शहरों में निकले चांद को देखकर व्रत खोला। 
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उत्तराखंड: हरक से बोले हरीश रावत, आपदा में तो सांप और नेवला भी एक हो जाते हैं, आप तो मेरे भाई हैं 

अब तक मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये संवाद के सिलसिले को गति दे रहे पूर्व सीएम हरीश रावत और वन मंत्री हरक सिंह रावत की रविवार को टेलीफोन पर बात भी हो गई। बातचीत का मकसद भले ही रामनगर के आपदाग्रस्त चुकुम गांव में राहत और बचाव कार्य पर फोकस रहा हो मगर हरीश रावत ने बातचीत की शुरुआत में ही ‘आपदा में तो सांप और नेवला भी एक हो जाते हैं, आप तो मेरे भाई हैं..’ कहकर दोनों के बीच कई दिनों से जारी सियासी कड़वाहट को खत्म करने की कवायद को एक दिशा दे दी।

रविवार को हरीश रावत रामनगर के चुकुम गांव में आपदा प्रभावितों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान हरीश रावत ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को वन मंत्री हरक सिंह रावत को फोन लगाने के लिए कहा। बातचीत शुरू होते ही हरीश रावत ने हरक से चुकुम और सुंदरखाल गांव के ग्रामीणों की मदद करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि वह (हरक सिंह) सत्ता में बैठे हैं। वह कुछ कर सकने में सक्षम हैं, इसलिए वह एक बार इन गांवों का दौरा करें और ग्रामीणों के विस्थापन में मदद करें। हरीश रावत की फोन पर हुई बातचीत के फिर से सियासी मायने निकाले जाने लगे हैं। यह बातचीत तब हुई है जब वन मंत्री हरक सिंह रावत की ओर से पूर्व सीएम हरीश रावत से माफी मांगने की बात वायरल हुई थी।
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उत्तराखंड: आपदा में क्षतिग्रस्त मकानों की मुआवजा राशि बढ़ाएगी सरकार, कैबिनेट बैठक में आएगा प्रस्ताव

प्रदेश में आई आपदा में जनहानि के साथ जिन लोगों के मकान-दुकान इत्यादि पूरी तरह से ढह गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं, ऐसे लोगों को मिलने वाली मुआवजा राशि को सरकार बढ़ाने जा रही है। इस आशय का प्रस्ताव आगामी 28 अक्तूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा। सरकार बैठक से पहले ही इसकी घोषणा कर सकती है।

प्रदेश में अभी तक आपदा में पूर्णरूप से ध्वस्त हुए आवासीय भवनों, व्यावसायिक भवनों की मुआवजा राशि के रूप में एक लाख नौ हजार रुपये सरकार की ओर से प्रदान किए जाते हैं, जो बहुत कम हैं। ऐसे में सरकार इस मुआवजा राशि को बढ़ाने पर विचार कर रही है।

प्रदेश के आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ चर्चा हुई है। प्रदेश में विभिन्न मदों में आपदा राहत राशि को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। आवासीय भवनों के साथ व्यवसायिक भवनों, कृषि भूमि, फसलों के नुकसान आदि पर दी जानी वाली मुआवजा राशि बढ़ाई जाएगी। शासन स्तर पर इस पर विचार किया जा रहा है। सरकार शीघ्र ही इसकी घोषणा कर सकती है। प्रस्ताव आगामी कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा।

उत्तराखंड में बिगड़ा मौसम: आपदा से अभी उभरे नहीं, फिर जोरदार बारिश ने डराया, शासन-प्रशासन अलर्ट

मंत्री ने बताया कि प्रदेश में आपदा में मारे गए लोगों के परिजनों को चार लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतर मृतकों के परिजनों को मुआवजा राशि दी जा चुकी है। प्रदेश में बद सड़कों को खोलने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इसके अलावा कृषि भूमि और फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

सभी जिलों के प्रशासन से शीघ्र आकलन कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई टीम भी आपदा से हुए नुकसान का जायजा ले रही है। जो शीघ्र ही केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। क्या इस रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार प्रदेश के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा करेगी, यह पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि यह परिस्थितियों और हालात पर निर्भर करेगा। यह केंद्र का विषय है, इस पर वह अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते हैं।
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