भड़का चीन: अमेरिका के सैनिक ट्रेनर साल भर से तैनात हैं ताइवान में, गुपचुप उठाया कदम

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Oct 2021 06:02 PM IST

सार

ताजा खबर सामने आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में अमेरिका से ताइवान को सैनिक मदद तुरंत रोकने की मांग की है। बयान में कहा गया- ‘चीन अपनी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।’
चीन-ताइवान
चीन-ताइवान - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

हाल में अमेरिका ने चीन को ये आश्वासन दिया है कि ताइवान के मामले में उसका अपनी नीति बदलने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन एक ताजा खुलासे से सामने आया है कि अमेरिका के सैनिक प्रशिक्षक कम से कम एक साल से ताइवान में तैनात हैं। खुद अमेरिकी मीडिया की टिप्पणियों में इस खबर को चीन से अमेरिका की जारी प्रतिद्वंद्विता के बीच दांव और बढ़ाने वाले एक कदम के रूप में देखा गया है।
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अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने गुरुवार को ये खबर छापी कि अमेरिका विशेष बलों के सैनिक और नौसैनिक ताइवान की सेना को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इन प्रशिक्षकों की संख्या कितनी है, इस बारे में इस खबर में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसमें यह जरूर बताया गया है कि इन प्रशिक्षकों को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ताइवान भेजा गया था, लेकिन ये खबर अब तक गोपनीय रखी गई थी।


इस रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि 1979 के बाद से अमेरिकी सैनिकों को कभी ताइवान में स्थायी रूप से तैनात नहीं किया गया। उसी वर्ष अमेरिका ने वन चाइना पॉलिसी अपनाते हुए कम्युनिस्ट चीन के साथ राजनयिक संबंध कायम किए थे। वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपी रिपोर्ट के बारे में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन सपल ने सीधे शब्दों में कुछ कहने से इंकार किया। लेकिन उन्होंने कहा- ‘ताइवान को हमारा समर्थन और उससे हमारा रक्षा संबंध चीन की तरफ से पेश आ रहे मौजूदा खतरे के खिलाफ है।’

थिंक टैंक सेंटर फॉर न्यू अमेरिकन सिक्युरिटी के इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम में फेलॉ जैकब स्टोक्स ने इस संबंध में ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘यह महत्वपूर्ण कदम है, जिसका मकसद ताइवान के बलों की रक्षा क्षमता में सुधार करना है। लेकिन यह चीन को भड़काने वाला कदम नहीं है।’ ताइवान में अमेरिकी नौसैनिकों की मौजूदगी के बारे में इसके पहले भी खबर आई थी। तब ताइवान के नौसैनिक कमांड ने उसकी पुष्टि की थी। उसने इसे ताइवान और अमेरिकी सेना के बीच सामान्य आदान-प्रदान और ट्रेनिंग में सहयोग बताया था। लेकिन नवंबर 2020 में अमेरिकी अधिकारियों ने इस खबर को गलत तथ्यों पर आधारित ठहरा दिया।

ताजा खबर सामने आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में अमेरिका से ताइवान को सैनिक मदद तुरंत रोकने की मांग की है। बयान में कहा गया- ‘चीन अपनी संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।’ चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने शुक्रवार को एक टिप्पणी में कहा कि ताइवान और अमेरिका के बीच किसी प्रकार के सैनिक संबंध का चीन मजबूती से विरोध करता है।

इस बीच गुरुवार को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने इस खबर की पुष्टि की कि उसने चीन संबंधी सूचनाएं जुटाने के लिए एक विशेष ‘मिशन सेंटर’ का गठन किया है। सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने कहा- ‘21वीं सदी में चीन सरकार अमेरिका के लिए सबसे अहम भू-राजनीतिक खतरा है।’ पर्यवेक्षकों का कहना है कि इन घटनाओं को देखते हुए ऐसा लगता है कि हाल में अमेरिका और चीन के अधिकारियों की बातचीत के बाद तनाव घटने की जो संभवना जताई गई थी, उसमें ज्यादा दम नहीं है।
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