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कोरोना वायरस: दो कोविड वैक्सीनों से हो सकती हैं सात किस्म की न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Oct 2021 06:00 PM IST

सार

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 वायरस से संक्रमित लोगों में ये सातों न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होने की दर कहीं ज्यादा देख गई है। देखा गया है कि संक्रमित होने वाले हर एक करोड़ लोगों में लगभग साढ़े 14 लाख मरीज गुइलेइन-बैरे सिंड्रॉम से पीड़ित होते हैं। उनके अलावा लगभग सवा 12 लाख कोविड मरीज मानसिक ज्वर, दिमाग में सूजन या रीढ़ में सूजन की समस्याओं से पीड़ित हुए...
कोरोना वैक्सीन
कोरोना वैक्सीन - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार

फाइजर/बायोएनटेक और ऑक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनिका के कोरोना वायरस टीकों की वजह से सात किस्म की न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिकातंत्र संबंधी) समस्याएं हो रही हैं। ऐसी समस्याएं आम तौर पर सामान्य लोगों में देखने को नहीं मिलतीं। इन दोनों वैक्सीन पर किए गए एक व्यापक अध्ययन से ये निष्कर्ष सामने आया है।

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गुइलेइन-बैरे सिंड्रॉम

ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन में इंग्लैंड के ऐसे तीन करोड़ 20 लाख लोगों से संबंधित सूचनाओं को शामिल किया गया, जिन्होंने इन दोनों में से कोई एक टीका लगवाया है। इससे सामने आया कि ऑक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनिका का टीका लेने वाले 38 फीसदी लोगों को पहला डोज लेने के बाद गुइलेइन-बैरे सिंड्रॉम नाम की समस्या का सामना करना पड़ा। इस समस्या में अंगों में दर्द या कमजोरी महसूस होती है। लेकिन ये समस्या अस्थायी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक 38 फीसदी एक बड़ी संख्या है। ब्रिटेन में इसका मतलब लगभग एक करोड़ लोग हैं।



अध्ययन के दौरान पाया गया कि फाइजर/ बायोएनटेक का टीका लेने के 28 दिन बाद संबंधित व्यक्तियों में हेमोरहैजिक स्ट्रोक का खतरा हुआ दिखता है। इस समस्या का मतलब दिमाग के अंदर खून बहना होता है। देखा गया कि हर एक करोड़ आबादी पर आम लोगों की तुलना में ये टीका लेने वाले व्यक्तियों में से ऐसे 60 अतिरिक्त मामले सामने आए। यह भी देखा गया कि यह खतरा महिला मरीजों में ज्यादा रहता है।

अनुसंधानकर्ताओं ने स्कॉटलैंड में टीका लगवाने लोगों के सैंपल भी हासिल किए। हालांकि इनकी संख्या कम थी, लेकिन उनसे भी एस्ट्राजेनिका के वैक्सीन और गुइलेइन-बैरे सिंड्रोम के बीच संबंध साबित हुआ। लेकिन स्कॉटलैंड के सैंपल से फाइजर के वैक्सीन और हेमोरहैजिक स्ट्रोक के बीच संबंध की पुष्टि नही हुई।

हेमोरहैजिक स्ट्रोक के शिकार होने का खतरा

यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबरा में प्राइमरी केयर अनुसंधान के विशेषज्ञ प्रोफेसर अजीज शेख ने कहा कि इन समस्याओं से गंभीर रूप से किसी के बीमार होने के मामले इक्के-दुक्के ही सामने आए हैं। हेमोरहैजिक स्ट्रोक की मिसाल भी टीका लगवाने के 28 दिन बाद देखने को मिली। उन्होंने कहा- ‘कोविड-19 संक्रमण से जितना खतरा है, उसकी तुलना में वैक्सीन के कारण होने वाली समस्या बहुत कम है।’


विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 वायरस से संक्रमित लोगों में ये सातों न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होने की दर कहीं ज्यादा देख गई है। देखा गया है कि संक्रमित होने वाले हर एक करोड़ लोगों में लगभग साढ़े 14 लाख मरीज गुइलेइन-बैरे सिंड्रॉम से पीड़ित होते हैं। उनके अलावा लगभग सवा 12 लाख कोविड मरीज मानसिक ज्वर, दिमाग में सूजन या रीढ़ में सूजन की समस्याओं से पीड़ित हुए। कोविड मरीजों के हेमोरहैजिक स्ट्रोक का शिकार होने का खतरा भी बढ़ा हुआ रहता है। लेकिन ऐसा खतरा कोविड पॉजिटिव होने के बाद पहले सात दिन के अंदर ही रहता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में संक्रामक रोग की प्रोफेसर जुलिया हिपिस्ली-कॉक्स ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि एस्ट्राजेनिका के वैक्सीन से गुइलेन-बैरे सिंड्रॉम होने की बात पहले भी एक विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय अध्ययन से सामने आई थी। जुलिया इस वैक्सीन को विकसित करने के प्रयोगों से संबंधित नहीं रही हैँ। उधर फाइजर कंपनी ने कहा कि वह वैक्सीन के दुष्प्रभाव से संबंधित खबरों को गंभीरता से लेती है। वह संबंधित सूचनाएं विनियामक संस्थाओं को भेजेगी। लेकिन एस्ट्राजेनिका कंपनी ने इस बारे में फाइनेशियल टाइम्स के सवालों पर जवाब नहीं दिया।

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