यूएनजीए में भारत: कोरोना से लड़ते हुए 20 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्त व्यवस्था की मुख्य धारा में लाए

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 06 Oct 2021 09:11 PM IST

सार

भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में कहा कि हमने कोरोना वायरस महामारी से लड़ते हुए 20 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्तीय व्यवस्था की मुख्य धारा में लेकर आए हैं। इसके साथ ही हम तकनीकी और इंटरनेट को पहले से कहीं अधिक बड़े स्तर पर उपयोग कर रहे हैं।
स्नेहा दुबे
स्नेहा दुबे - फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)
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विस्तार

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76वें सत्र में भारत ने कहा कि हम पिछले दो साल में आर्थिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहन देते हुए 20 करोड़ से अधिक महिलाओं को वित्त व्यवस्था की मुख्य धारा में लाए हैं। इस दौरान हमने कोविड-19 वैश्विक महामारी से भी जंग लड़ी, जिसने पूरी दुनिया को बुरी तरह से प्रभावित किया है।
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बुधवार को यूएनजीए सेकंड कमेटी में सतत विकास और वैश्वीकरण और पारस्परिक निर्भरता के लिए सूचना व संचार तकनीक (आईसीटी) पर चर्चा हुई। इस दौरान भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा कि महामारी के दौरान भारत ने एक सामाजिक सुरक्षा पहल की जो गरीबों के हित में थी और व्यापक स्तर पर पहुंच वाली थी।


दुबे ने कहा, 'डिजिटल तकनीकी और इंटरनेट की ताकत इस पहल में ताकत को कई गुना बढ़ाने वाली साबित हुई है। 80 करोड़ लोगों को मुफ्त भोजन पहुंचाने और 40 करोड़ लोगों तक वित्तीय मदद पहुंचाने का कार्यक्रम को डिजिटल तकनीकी की मदद से संचालित किया गया। वित्तीय समावेश की रफ्तार बढ़ाई गई है।'

'आरोग्य सेतु' और 'को-विन' का उल्लेख किया
उन्होंने कहा कि भारत का 'आरोग्य सेतु' कोविड-19 की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में प्रभावी है। दुबे ने कहा, 'हमारा स्वदेशी प्लेटफॉर्म आरोग्य सेतु प्रभावी कोविड कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की सुविधा देता है। भारत का को-विन प्लेटफॉर्म टीकाकरण प्रबंधन के लिए है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रम नें आईसीटी का बड़े स्तर पर उपयोग किया गया है।'

तैयार की मजबूत और जीवंत डिजिटल व्यवस्था
स्नेहा दुबे ने इस दौरान यह भी कहा कि भारत ने एक मजबूत, पारदर्शी और जीवंत डिजिटल व्यवस्था तैयार की है जो समावेशी है और सशक्त करने वाली है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था ने गरीबी से लड़ने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और कोविड-19 के दौरान उत्पादकता को बढ़ाने में बेहद जरूरी समाधान प्रदान किया है।

तकनीकी के चलते चुनौतियां भी सामने आई हैं
देश की प्रथम सचिव दुबे ने इस पर सहमति जताई कि तकनीकी कुछ अभूतपूर्व चुनौतियां भी प्रस्तुत कर रही है और इससे डिजिटल विभाजन का दबाव भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम इससे इनकार नहीं कर सकते कि निजता का हनन, गलत सूचनाओं का प्रसार और साइबर हमले आदि मानवाधिकारों के लिए खतरे की तरह हैं।

भारत ने यूएनजीए में कहा कि भारत अंतरर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (सीसीआईटी) के मसौदे को शीघ्र अंतिम रूप देने की आवश्यकता को दोहराता है, जिसे भारत द्वारा 1996 में शुरू किया गया था। हम राज्यों से हमारे प्रयासों में एकजुट होने और सीसीआईटी को अपनाने से रोकने के इस गतिरोध को समाप्त करने का आग्रह करते हैं।

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