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DART Mission: डार्ट मिशन के परीक्षण पर बोले भारतीय वैज्ञानिक- एस्टेरॉयड की पृथ्वी से टकराने के आशंका बहुत कम

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 27 Sep 2022 07:56 PM IST
सार

भारतीय वैज्ञानिक कार्तिक कहते हैं, हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं।

नासा का डार्ट मिशन लॉन्च
नासा का डार्ट मिशन लॉन्च - फोटो : Nasa
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विस्तार

अमेरिकी अंतरिक्ष एंजेसी नासा का डार्ट मिशन सोमवार को सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इस मिशन के तहत एक यान को 'एस्टेरॉयड' (क्षुद्रग्रह) से टकराया गया। जिससे टकराते ही वह चूर-चूर हो गया। ये परीक्षण इसलिए किया गया ताकि भविष्य में पृथ्वी से कोई क्षुद्रग्रह टकराने वाला हो तो उसे रोका जा सके या उसके मार्ग को बदला जा सके। मिशन की सफलता को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। 



भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे जीवनकाल में पृथ्वी से किसी क्षुद्रग्रह के टकराने की आशंका बहुत कम है। बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिक क्रिसफिन कार्तिक कहते हैं, "हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं। फिर भी पृथ्वी के भविष्य की सुरक्षा की तैयारी करना अच्छा कदम है।' 

 
कार्तिक, डार्ट मिशन में भी शामिल हैं। उनका कहना है कि भविष्य की ऐसी किसी भी संभावित घटना के लिए दुनिया को तैयार करने की दिशा में यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है। कार्तिक ने आगे बताया कि डार्ट मिशन का यह परीक्षण उसका एक उदाहरण है। हम जानते हैं कि इतने छोटे क्षुद्र ग्रह को अंतरिक्ष यान के जरिए कैसे सटीक रूप से लक्षित करना है। हम इस मिशन की सफलता के बाद अवलोकन करेंगे। हम भविष्य में किसी बड़े क्षुद्र ग्रह को भी टक्कर मारने की तैयारी कर सकते हैं। 

इसी तरह वरिष्ठ वैज्ञानिक गौतम चट्टोपाध्याय नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के लिए काम करते हैं। डार्ट मिशन को लेकर वह कहते हैं कि यह अभियान भविष्य में खतरनाक क्षुद्रग्रहों की संभावित टक्कर से पृथ्वी को बचाने में मदद करेगा। इस प्रयोग से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की ओर आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसका रास्ता बदला जा सकता है। चट्टोपाध्याय ने आगे कहा, हालांकि इसकी संभावना शून्य नहीं है और हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए।  

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