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Sri Lanka: श्रीलंका में अपना ‘आयरन हैंड’ चला नहीं पा रहे हैं राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 03 Oct 2022 03:53 PM IST
सार

Sri Lanka: विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया था कि देश में आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं, जिससे नए सिरे से जन आंदोलन खड़ा होने की संभावना मजबूत हो रही है। सरकार ने उसे देखते हुए ही ये कठोर कदम उठाया था। लेकिन उससे सरकार के प्रति जन विरोध और बढ़ने के संकेत मिले...

Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe
Sri Lanka President Ranil Wickremesinghe - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ‘आयरन हैंड’ से शासन करने की अपनी मंशा पूरी करने में लगातार नाकाम हो रहे हैं। बीते शनिवार और फिर रविवार को उनकी सरकार को भारी जन विरोध के कारण अपने दो फैसले वापस लेने पड़े। इससे देश पर राष्ट्रपति की पकड़ को लेकर नए सिरे से सवाल उठ सकते हैं।   

विक्रमसिंघे ने शनिवार को वह आदेश वापस लिया था, जिसमें राजधानी कोलंबो में प्रमुख सरकारी और कारोबारी स्थलों को युद्धकाल जैसे सुरक्षा क्षेत्र में बदलने की बात कही गई थी। बीते हफ्ते वकीलों के संगठन- बार एसोसिएशन ऑफ श्रीलंका ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। बार एसोसिएशन ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि यह आदेश गैर-कानूनी है। इसके पहले कि मामले पर कोर्ट में सुनवाई होती, विक्रमसिंघे सरकार ने आदेश वापस ले लिया।

रविवार को विक्रमसिंघे सरकार ने सेनेटरी नैपकिंस पर हाल में लगाए गए सभी करों को वापस लेने की घोषणा की। अब श्रीलंका में सेनेटरी नैपकिंस पर शून्य वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) लगेगा। सरकार के इस कदम की देश भर में कड़ी आलोचना हुई थी। इसे महिलाओं की सेहत से खिलवाड़ बताया गया था। रविवार को जारी आदेश में राष्ट्रपति के मीडिया विभाग ने कहा- ‘देश में बनने वाले सेनेटरी नैपकिंस के उत्पादन के लिए आयातित सभी कच्चे माल पर लगाए गए सारे शुल्क हटाए जा रहे हैं। उत्पादित सेनेटरी नैपकिंस पर शून्य वैट लगेगा। राष्ट्रपति ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इस छूट के पूरे लाभ उपभोक्ताओं को हस्तांतरित हों।’

इसके पहले श्रीलंका की शिक्षक यूनियनों और कई विपक्षी नेताओं ने कहा था कि देश जिस समय गहरे आर्थिक संकट में है, सेनेटरी नैपकिंस को महंगा करना सरकार का बेरहम फैसला है। उन्होंने कहा था कि इस समय परिवार सारे खर्च घटा कर भोजन का इंतजाम करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में सेनेटरी नैपकिंस को महंगा करना बिल्कुल वाजिब नहीं है।

सरकार ने सेनेटरी नैपकिंस के लिए आयात होने वाले कच्चे माल पर 15 फीसदी कस्टम ड्यूटी, 10 फीसदी सेस, 10 फीसदी बंदरगाह या हवाई अड्डा शुल्क लगाने का फैसला किया था। सेनेटरी नैपकिंस के लिए मुख्य रूप से पांच सामग्रियां देश में आयात की जाती हैं।
कोलंबो के प्रमुख इलाकों को हाई सिक्योरिटी जोन बनाने का आदेश बीते 23 सितंबर को जारी किया गया था। बताया गया था कि उस इलाके में महीनों से जारी जन प्रदर्शनों को रोकने के लिए ये कदम उठाया गया।

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विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया था कि देश में आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीदें लगातार टूट रही हैं, जिससे नए सिरे से जन आंदोलन खड़ा होने की संभावना मजबूत हो रही है। सरकार ने उसे देखते हुए ही ये कठोर कदम उठाया था। लेकिन उससे सरकार के प्रति जन विरोध और बढ़ने के संकेत मिले।

राष्ट्रपति के निकट सूत्रों ने मीडिया को बताया था कि कोलंबो में जारी प्रदर्शनों का खराब असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां देश में जारी अस्थिरता से चिंतित हैं और इसके बीच श्रीलंका को मदद देने को लेकर उनमें आशंका है। लेकिन ऐसी दलीलें ना तो विपक्ष को मंजूर हुईं, ना ही जनता में इन्हें समर्थन मिला। इसलिए राष्ट्रपति को मुंह की खानी पड़ी है।

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