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ज्योतिष शास्त्र: जानिए मंदिर की ध्वजा और ग्रहों का संबंध

Krishna Guruji कृष्णा गुरुजी
Updated Wed, 28 Jul 2021 06:52 AM IST

सार

ग्रहों की स्थिति सदा बदलती रहती है, इसीलिए इंसान का जीवन भी एक समान नहीं होता। इंसान या तो अपने या अपनों की शारिरिक पीड़ा के विकार से ग्रस्त रहता है।सूर्य ग्रह पिता, हड्डियों और ह्रदय के कारक ग्रह हैं। पिता संबंधी रिश्तों में सुधार स्वयं की पत्रिका में सूर्य पीड़ित हो, तब पिता के नाम से ध्वजा लगाएं।
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किसी मंदिर की ध्वजारोहण से हम ग्रहों की मारक शक्ति या अपनी सहन शक्ति कैसे बढ़ाएं।
किसी मंदिर की ध्वजारोहण से हम ग्रहों की मारक शक्ति या अपनी सहन शक्ति कैसे बढ़ाएं।
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विस्तार

शास्त्रों में शिखर दर्शन ध्वजा को संपूर्ण दर्शन का फल प्राप्त होने का कहा गया है। सम्पूर्ण ऊर्जा का केंद्र जिस प्रकार मनुष्य का सहसत्रधार चक्र होता है,उसी प्रकार मंदिर का सर्वोच्च भाग ध्वजा भी आकाशीय ब्रह्मांड ऊर्जा का एक प्रकार का टावर होता है। अपने जन्म नक्षत्र का दिन जो श्रावण में आता है उस दिन ध्वजा अपने नाम से लगवाकर पूजन में शामिल हो। विज्ञान कहता है कि ग्रह भी अलग अलग पांच तत्वों से बने है। जिन पांच तत्वों से शरीर बना है। ज्योतिष तो पहले से ही कहता आ रहा है, पर आज विज्ञान भी यह मानता है कि ग्रहों का प्रभाव पंच तत्वीय शरीर पड़ता है।
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ग्रहों की स्थिति सदा बदलती रहती है, इसीलिए इंसान का जीवन भी एक समान नहीं होता। इंसान या तो अपने या अपनों की शारिरिक पीड़ा के विकार से ग्रस्त रहता है। रिश्तों में आए मनमुटाव और विवाद इन सभी विकारो के लिए एक हद तक ग्रह जिम्मेदार होते हैं। आइए जानते हैं किसी मंदिर की ध्वजारोहण से हम ग्रहों की मारक शक्ति या अपनी सहन शक्ति कैसे बढ़ाएं। अलग-अलग रिश्तों के नाम ध्वजा लगवाना भी एक ग्रह विज्ञान है। जानें कैसे?


सूर्य- सूर्य ग्रह पिता, हड्डियों और ह्रदय के कारक ग्रह हैं। पिता संबंधी रिश्तों में सुधार स्वयं की पत्रिका में सूर्य पीड़ित हो, तब पिता के नाम से ध्वजा लगाएं।

चंद्र- चंद्रमा मन, माता का और फेफड़े संबंधी विकारों का कारक ग्रह है। पत्रिका में चंद्र ग्रह पीड़ित होने पर अपनी माता जी के नाम से ध्वजा लगवाएं।

मंगल- मंगल भाई, रक्त, क्रोध का कारक ग्रह होता है। भाईयों के बीच विवाद क्रोध अधिक हो, रक्त संबंधी विकार होने पर अपने भाई के नाम से ध्वजा लगवाएं।

बुध- बुध ग्रह त्वचा और ज्ञान का कारक ग्रह होता है। आंत संबंधी विकार होने पर अपने मामा के नाम से ध्वजा लगवाएं।

गुरु- गुरु लिवर, पति-पत्नी और बच्चे का कारक ग्रह है। साथ ही आध्यात्मिक गुरु भी इसमें आता है। इन संबंधी या गुरु पीड़ित होने पर अपने पति बच्चे या आध्यात्मिक गुरु के नाम से ध्वजा लगवाएं।

शुक्र- शुक्र ग्रह सुख समृद्धि, सेक्स और ऐशोआराम का कारक ग्रह होता है। यौन संबंधित विकार होने पर या शुक्र ग्रह पीड़ित होने पर पत्नी के नाम से या अपनी कुल देवी के नाम से ध्वजा लगवाना हितकर होगा।

शनि-  शनि देव अगर पीड़ित है या बार बार नौकरी से संबंधित समस्या आ रही है, कार्य में देरी, घुटनों में दर्द और  साढ़ेसाती के वक्त कानूनी परेशानियां आ रही है तो अपने घर के सबसे पुराने नौकर के नाम से या घर के बुजुर्ग के नाम से ध्वजा लगवाने से आराम मिलता है।

राहु- राहु ग्रह अटैचमेंट का कारक है इसके अलावा नशा, जुआ, शराब की लत राहु देव की पीड़ित होने की निशानी है। छुपा हुआ रोग और यह आपके दादा जी नानाजी का प्रतिनिधित्व करता है। दादा जी के नाम से ध्वजा लगवाएं।

केतु- केतु ग्रह व्यवसाय नौकरी में अस्थिरता, क्रोनिक बीमारी और छुपा रोग का कारक है। नानाजी के नाम से ध्वजा लगवाएं।

मंदिर में आप जाते भी है तो मूर्ति के आगे हाथ जोड़ कुछ पल आंखे खोल आंखे बंद कर लेते है। आध्यात्मिक ईश्वरीय चेतना को अपने में समाहित करने हेतु आंखे स्वतः बंद हो जाती है। अतः किसी मजबूरी में दर्शन न कर पाए तो शिखर ध्वजा दर्शन कर ऊर्जा केंद्र का अनुभव करते है। हवा में एक ओर लहराता ध्वज केतु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। कोई ग्रह आपके लिए खराब तो बच्चे के लिए अच्छा हो सकता है। किसी ग्रह को दोष ना दें। उपाय ज्योतिष के माध्यम से प्राप्त करें।

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