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शनि साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति के लिए करें ये उपाय

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 29 Apr 2021 05:48 PM IST

सार

  • शनिदेव को सभी ग्रहों में न्याय का देवता, न्यायप्रिय और कर्मफलदाता माना गया है।
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shanidev - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ज्योतिषशास्त्र में शनिदेव को बहुत ही मारक समझा जाता है। शनिदेव को सभी ग्रहों में न्याय का देवता, न्यायप्रिय और कर्मफलदाता माना गया है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मो के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। जिन जातकों की कुंडली में शनिदेव शत्रुभाव में विराजमान होते हैं उनको तमाम तरह की परेशानियों से दो चार होना पड़ता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है तो उसे कई तरह की परेशानी होती है। लेकिन शास्त्रों में शनि को शुभ और अच्छा फल प्रदान के लिए कुछ उपाय बताए गए...
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  • शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
  • शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
  • भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
  • शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी। इसी तरह काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दांयी बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि उन्नति में सहायक होंगे।
  • शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें।
  • शनिवार या अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें। फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।

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