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Hydrogen Fuel Cell कैसे खोलेगा विकास की नई संभावनाओं के द्वार, प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाने में अहम

Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 22 Aug 2022 03:42 PM IST
सार

Hydrogen Fuel Cell: ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला को बताया कि हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने की तकनीकी बहुत मुश्किल नहीं है, भारत में पानी और हवा से हाइड्रोजन को प्राप्त कर उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की कई योजनाओं पर काम चल रहा है

Union Minister Dr Jitendra Singh unveiled India's first indigenously built Hydrogen Fuel Cell Bus
Union Minister Dr Jitendra Singh unveiled India's first indigenously built Hydrogen Fuel Cell Bus - फोटो : Agency
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विस्तार

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को पुणे में देश की पहली पूर्ण स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चालित बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ऊर्जा तकनीकी के क्षेत्र में यह बेहद महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यदि यह कार्यक्रम सफल रहता है, तो इससे न केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की राह खुलेगी, बल्कि भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो ऊर्जा के संदर्भ में आत्मनिर्भर हैं। भारत फॉसिल फ्यूल्स को छोड़कर पूर्ण हरित ऊर्जा क्षेत्र अपनाने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है और योजना है कि देश 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल कर ले। यह योजना इस लक्ष्य को हासिल करने में बड़ा कदम साबित हो सकती है।



एक सामान्य डीजल-पेट्रोल वाहन अपनी कुल ईँधन खपत का 12 से 14 फीसदी हिस्सा केवल कार्बन उत्सर्जन और पीएम 2.5 कणों के उत्सर्जन में निकाल देता है। डीजल चालित सामान्य बस जो लंबी दूरी की यात्रा तय करती है, साल भर में लगभग 100 टन कार्बन डाई ऑक्साइड पैदा करती है। इसी तरह मालवाहक ट्रकों और अन्य व्यावसायिक वाहनों में कार्बन उत्सर्जन की सीमा बहुत ज्यादा है। भारत जैसे देश में कार्बन उत्सर्जन की यह मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जहां प्रति दिन लाखों ट्रक देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक की यात्रा करते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पुणे में केपीआईटी-सीएसआईआर के सहयोग से बनी हाइड्रोन फ्यूल सेल इन सभी समस्याओं से भारत को छुटकारा दिला सकती है।


हाइड्रोजन ईंधन उत्पन्न करने में भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है, और यह पूरी ऊर्जा सौर ऊर्जा से प्राप्त करने की योजना बनाई गई है। हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग के बाद वाहनों के इंजन से धुएं के स्थान पर पानी निकलेगा जो प्रदूषण से मुक्त होगा, लिहाजा हाइड्रोजन को लगभग सौ फीसदी प्रदूषण मुक्त ऊर्जा कहा जा रहा है।  

हाइड्रोजन क्षेत्र में क्या है देश की स्थिति

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला को बताया कि हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने की तकनीकी बहुत मुश्किल नहीं है, भारत में पानी और हवा से हाइड्रोजन को प्राप्त कर उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की कई योजनाओं पर काम चल रहा है। पुणे का केपीआईटी-सीएसआईआर सहयोग कार्यक्रम इन्हीं में से एक है। लेकिन अभी यह पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ही चलाया जा रहा है। व्यावसायिक स्तर पर इसे लोगों के बीच उपलब्ध होने में चार से सात साल का समय लग सकता है जिसे इसका उपयोग देखते हुए बहुत ज्यादा नहीं कहा जा सकता।


नरेंद्र तनेजा के मुताबिक, हाइड्रोजन ऊर्जा में सबसे बड़ी बाधा इसे सुरक्षित बनाने की है। हाइड्रोजन अति ज्वलनशील गैस होती है, जिसके इस्तेमाल में थोड़ी सी भी चूक बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकती है, लिहाजा वैज्ञानिकों का पूरा ध्यान इसे सुरक्षित बनाने पर लगा हुआ है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि पेट्रोल-डीजल भी काफी ज्वलनशील पदार्थ होते हैं, लेकिन इन्हें सुरक्षित ईंधन तक की यात्रा तय करने में लगभग 150 साल का समय लग गया। ऐसी स्थिति में हाइड्रोजन फ्यूल को व्यावसायिक स्तर पर सफल होने में कुछ समय लगने को उचित ही माना जा सकता है।

भारत की ऊर्जा टोकरी में हाइड्रोजन की भूमिका

देश अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 86 फीसदी तेल, 54 फीसदी गैस, 85 फीसदी सौर ऊर्जा उपकरण और काफी मात्रा में कोयला आयात करता है। इसमें देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी प़ड़ती है। यदि भारत अपने यहां हाइड्रोजन फ्यूल सेल, सौर ऊर्जा उपकरण और इसके निर्माण की तकनीकी विकसित कर लेता है तो यह न केवल भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है, बल्कि इससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत होगी जो देश की कल्याणकारी योजनाओं, वैज्ञानिक और रक्षा अनुसंधान में खर्च की जा सकती है। यह कई क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर खोलेगा जो हमारी युवा आबादी को नए विकल्प दे सकता है, इसलिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल को भारत के विकास की कुंजी भी कहा जा सकता है।

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