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RRB NTPC Protest: आरआबी-एनटीपीसी परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठनों ने आज बिहार बंद का किया आह्वान, विपक्षी नेताओं का मिला साथ

पीटीआई, पटना Published by: देव कश्यप Updated Fri, 28 Jan 2022 04:28 AM IST

सार

आइसा के महासचिव और विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के लिए रेल मंत्रालय द्वारा गठित समिति उत्तरप्रदेश में चुनाव तक मामले को स्थगित करने की ‘साजिश’ कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह केंद्र सरकार का धोखा है।
बिहार में छात्रों का विरोध- प्रदर्शन।
बिहार में छात्रों का विरोध- प्रदर्शन। - फोटो : ANI
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विस्तार

रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) समेत कई छात्र संगठनों ने आज (28 जनवरी) पूरे बिहार बंद का आह्वान किया है। महागठबंधन में शामिल सभी विपक्षी दलों ने इस बंद का समर्थन किया है।

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विपक्षी दलों ने समर्थन का किया एलान
बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल राजद, कांग्रेस, भाकपा एवं माकपा ने गुरुवार को संयुक्त रूप से एक बयान जारी कर कहा, ‘‘बिहार में देश में सबसे ज्यादा युवा हैं और यहां बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा है। केंद्र और बिहार सरकार द्वारा छात्रों को ठगा जा रहा है। सरकारें उनके लिए नौकरियों का वादा करती रहती है लेकिन जब वे नौकरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरते हैं तो नीतीश कुमार सरकार उन पर लाठियां बरसाती है।’’


महागठबंधन के नेताओं ने राजद के प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को संयुक्त रूप से संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि 'केंद्र की राजग सरकार को उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की ज्यादा चिंता है, न कि प्रदर्शनकारी छात्रों के भविष्य की।' उन्होंने कहा कि 'महागठबंधन के सभी दलों ने 28 जनवरी को छात्र संघ द्वारा आहूत बिहार बंद का समर्थन करने का फैसला लिया है। हम यह भी मांग करते हैं कि राज्य पुलिस द्वारा छात्रों या कोचिंग संस्थानों के खिलाफ दर्ज सभी मामले तुरंत वापस लिए जाने चाहिए।'

आइसा के महासचिव और विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा में अनियमितताओं की जांच के लिए रेल मंत्रालय द्वारा गठित समिति उत्तरप्रदेश में चुनाव तक मामले को स्थगित करने की ‘साजिश’ कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह केंद्र सरकार का धोखा है। सौरभ ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बेरोजगार युवकों को नौकरी नहीं देना चाहती।

इस बीच पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह एवं वरीय पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने कोचिंग संचालकों, प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने तथा विधि व्यवस्था बनाये रखने के समाहरणालय सभागार में एक बैठक की।

छह कोचिंग संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, चार अभ्यर्थी गिरफ्तार
दरअसल, 24 जनवरी को राजेंद्रनगर ट्रैक को जाम करने तथा उत्पन्न विधि व्यवस्था से निपटने के दौरान चार अभ्यार्थियों को हिरासत मे लिया गया था। उन चार अभ्यर्थियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उन्हें कोचिंग संचालकों, प्रतिनिधियों के द्वारा यहां पर आने के लिए मार्गदर्शन किया गया है तथा उनका नाम भी बताया। पुलिस द्वारा सोशल मीडिया से वीडियो फुटेज भी प्राप्त किए गए। इन सबके बाद इस मामले में छह कोचिंग संचालकों, प्रतिनिधियों के विरुद्ध पत्रकार नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पूछताछ के दौरान हिरासत में लिए गए अभ्यर्थियों के द्वारा जिन व्यक्तियों का नाम लिया गया तथा प्राथमिकी दर्ज की गई उनमें खान सर, एसके झा सर, नवीन सर, अमरनाथ सर, गगन प्रताप सर और गोपाल वर्मा सर शामिल हैं। जिला प्रशासन द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार जिन व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है उन व्यक्तियों को नोटिस निर्गत किया जाएगा तथा उन्हें निर्धारित तिथि, स्थान एवं समय पर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी प्रकार की पूर्वाग्रह आधारित अथवा बदले की भावना से कार्य नहीं किए जाएंगे बल्कि पूरी पारदर्शिता एवं साक्ष्य के आधार पर ही विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गैरकानूनी तथा गैर जिम्मेदाराना कार्य करने वाले तथा समूह को उग्र एवं हिंसात्मक स्वरूप देते हुए आंदोलन के लिए प्रेरित करने वाले असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जीतन राम मांझी ने दी हालात बिगड़ने की चेतावनी
बिहार में सत्ताधारी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘पटना में कोचिंग संस्थानों के कई शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का कदम छात्रों के आंदोलन को तेज करने में मदद कर सकता है। खान सर जैसे शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर छात्रों को बिहार में अघोषित आंदोलन के लिए और भड़का सकती है।" उन्होंने कहा कि "संविधान में हिंसा और तोडफोड़ का अधिकार किसी को नहीं। वैसे अब वक्त आ गया है जब सरकार रोजगार के विषय में बात करे और समाधान निकाले, नहीं तो हालात इससे भी भयानक हो सकते हैं।’’

इन मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था प्रदर्शन
राज्य में विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब कई छात्रों ने दावा किया कि आरआरबी भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियां थीं। आरआरबी गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (एनटीपीसी) के लिए दो कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (सीबीटी) आयोजित करने के सरकार के फैसले ने राज्य भर में हजारों छात्रों को परेशान किया, जो एक ही परीक्षा चाहते हैं।

ग्रुप-डी नौकरियों के लिए सीबीटी-I के परिणाम 14 जनवरी को जारी किए गए थे, जिसमें सीबीटी-द्वितीय के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया था कि भर्ती के लिए इस मानदंड को आवेदकों को आमंत्रित करने वाले प्रारंभिक आरआरबी नोटिस में स्पष्ट किया गया था। उन्होंने कहा कि नोटिस में केवल एक परीक्षा की बात कही गई है।

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