हमारे पास सत्य की शक्ति, चीनी कम्युनिस्टों के पास बंदूक की ताकत: दलाई लामा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बोधगया Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 25 Dec 2019 11:45 AM IST
बोधगया में दलाई लामा
बोधगया में दलाई लामा - फोटो : ANI
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अध्यात्मिक धर्मगुरु दलाईलामा ने बुधवार को चीन को शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पास सच्चाई की ताकत है, जबकि चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के पास बंदूक की ताकत है। तिब्बती बौद्ध सच्चाई की ताकत के बल पर चीन की बंदूक की ताकत से लड़ते रहेंगे। लंबी रेस में सच की ताकत, बंदूक से ज्यादा मजबूत साबित होती है।
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दरअसल, दलाईलामा से पूछा गया था कि वह चीन को क्या संदेश देना चाहते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि अहिंसा और करुणा दुनिया की जरूरत बन गई है। शांति के पथ पर चलकर अमन और तरक्की की कल्पना की जा सकती है।


सामाजिक प्राणी होने के नाते हम बिना करुणा कुछ नहीं कर सकते। मानसिक शांति के लिए करुणा ही एकमात्र रास्ता है। दुनिया हिंसा की चपेट है, खासकर धर्म के नाम पर। ऐसा नहीं होना चाहिए और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

 
चीन में बौद्ध धर्म को मानने वाले बढ़े
दलाईलामा ने कहा कि चीन पारंपरिक रूप से बौद्ध धर्म मानने वाला देश रहा है। वहां बौद्ध धर्म मानने वालों की बड़ी आबादी है। चीन के बहुत से लोग ‘तिब्बती बौद्ध’ का अनुसरण करते हैं। वहां विश्वविद्यालयों में भी बौद्ध धर्म मानने वाले बहुत से विद्वान हैं। बौद्ध धर्म को मानने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। चीजें बदल रही हैं।

50 देशों के श्रद्धालु सुनेंगे प्रवचन
दलाईलामा बुधवार को महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध को नमन किया। वह 14 दिवसीय प्रवास पर मंगलवार रात बिहार के बोधगया पहुंचे हैं। दलाईलामा के प्रवचन में 50 से अधिक देशों के 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं के मौजूद रहने की संभावना है। प्रवचन में ब्राजील, चीन, वियतनाम, जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, इस्राइल, पोलैंड, आस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, रूस, दक्षिण कोरिया समेत अन्य देशों के श्रद्धालु मौजूद रहेंगे।

मोदी-जिनपिंग के बीच हुई दो वार्ताओं से भारत-चीन संबंध 2019 में रहे स्थिर : चीन

पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो अनौपचारिक शिखर सम्मेलनों से बनी खुशमिजाजी से भारत-चीन 2019 में संबंधों की गतिशीलता बनाए रखने में सफल रहे। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा, चीन आम सहमति के तहत भारत के साथ मजबूत विकास साझेदारी कायम करने का इच्छुक है।

दोनों देशों के बीच बढ़ते राजनीतिक विश्वास, व्यावहारिक सहयोग में विस्तार, मतभेदों के ठीक तरह से प्रबंधन और एक मजबूत व स्थिर तरीके से द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से संबंधों को बल मिला। इस समय, विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान और सहयोग से चीन-भारत संबंधों में विकास की अच्छी गति देखने को मिली है।

उन्होंने कहा कि मोदी और जिनपिंग के बीच महाबलीपुरम में हुई दूसरी वार्ता से द्विपक्षीय संबंधों में अगले चरण की शुरुआत हुई है। दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व का मार्गदर्शन इसलिए जरूरी है क्योंकि चीन द्वारा अपने सहयोगी पाकिस्तान का साथ देने के चलते इस साल दोनों देशों के बीच संबंध मिलेजुले रहे।
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