Income Tax Law: बेटे को कितना महंगा तोहफा दे सकता है पिता, आयकर के दायरे से कैसे बचेगा यह गिफ्ट?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sat, 16 Oct 2021 03:17 PM IST

सार

Income Tax Law: भारतीय आयकर कानून के तहत एक पिता अपने बेटे को कितना महंगा तोहफा दे सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार

पिता और पुत्र के बीच क्या संबंध होता है, इसे परिभाषित करने की दरकार नहीं है। यब सभी को पता है। वहीं, अगर बात महंगा गिफ्ट देने की हो तो ऐसे मौकों पर एक डर बना रहता है कि कहीं आयकर विभाग के चक्कर में न फंस जाएं। मगर कुछ मामलों में भारतीय आयकर कानून में ऐसे प्रावधान हैं, जो उपहार देने व लेने वालों के हित में हैं। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि इनकम टैक्स नियमों के मुताबिक एक पिता अपने पुत्र को कितने रुपये तक का गिफ्ट दे सकता है, जो कानून के दायरे में हो। 
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वर्तमान कर कानूनों के तहत किसी भी व्यक्ति को उपहार देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में 'क्लबिंग' के प्रावधान लागू होते हैं। उदाहरण के तौर पर, बहू और किसी के जीवनसाथी, सास या ससुर, आदि। मगर पिता और पुत्र का संबंध एक अलग तरह का संबंध होता है, इसलिए एक पिता अपने बेटे को बिना किसी कर प्रभाव के कितने भी रुपये का गिफ्ट दे सकता है। दरअसल, कर कानूनों के वर्तमान प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति दो लाख रुपये से अधिक का कोई भी उपहार नकद में स्वीकार करता है तो वह नकद में स्वीकार किए गए उपहार की राशि के बराबर दंड के लिए उत्तरदायी हो सकता है। इसलिए नकद में दो लाख रुपये से अधिक का गिफ्ट लेने से बचें। 


आप कभी भी किसी को भी और कितनी भी राशि का उपहार दे सकते हैं। यह आपका रिश्तेदार भी हो सकता है, गैर रिश्तेदार भी। बस शर्त यही है कि जो भी उपहार आप देने जा रहे हैं, उस पर मालिकाना हक आपका ही होना चाहिए। टैक्स की दृष्टि से उपहार लेना भी उतना ही आसान है, जितना कि देना, लेकिन इसमें थोड़ी-सी सावधानी जरूर रखनी होगी। भारतीय आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 में प्रावधान है कि यदि कोई उपहार किसी गैर रिश्तेदार द्वारा धनराशि (नकदी, चेक, बैंक ड्रॉफ्ट आदि)) के रूप में दिया जाता है तो वह एक पूरे वित्त वर्ष में कुल मिलाकर 50 हजार रुपए से अधिक का नहीं होना चाहिए। इसमें उपहार देने वाले को तो कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन लेने वाले के साथ समस्या यह होगी कि 50 हजार रुपए से अधिक का उपहार स्वीकारने पर वह अतिरिक्त राशि स्वीकारने वाले की आय में जुड़ जाएगी। इस प्रकार उपहार स्वीकारने वाले को उसी के अनुरूप टैक्स का भुगतान करना होगा। 

क्लबिंग के प्रावधान
यदि कोई व्यक्ति किसी फर्म में हिस्सेदार हैं और उसकी पत्नी को उस फर्म से किसी तरह का लाभ जैसे वेतन, कमीशन, फीस प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से नगद या किसी अन्य प्रकार से मिल रहा है तो यह आय उसके पति की आय में जोड़ी जाएगी। मगर पत्नी के पास इस पद के लिए आवश्यक डिग्री है। ऐसी स्थिति में इनकम को क्लब करने का नियम लागू नहीं होगा।

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