ई-कॉमर्स कंपनी : सख्ती को लेकर उपभोक्ता मंत्रालय के प्रस्तावों पर वित्त मंत्रालय ने जताई आपत्ति

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Wed, 22 Sep 2021 01:38 AM IST

सार

उपभोक्ता मंत्रालय के प्रस्तावों पर वित्त मंत्रालय ने करीब 12 प्रस्तावों पर असहमति जताई है। हालांकि, इसमें कौन-कौन से नियम शामिल हैं, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। उपभोक्ता मंत्रालय ने 21 जून, 2021 में ई-कॉमर्स नियमों को सख्त बनाने के लिए मसौदा तैयार किया था।
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विस्तार

ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सख्त नियम बनाने को लेकर सरकार के मंत्रालयों में ही सहमति नहीं बन पा रही। नियमों में बदलाव पर जारी उपभोक्ता मंत्रालय के प्रस्तावों पर वित्त मंत्रालय ने आपत्ति जताई है। मंत्रालय का कहना है कि इसमें कई प्रस्ताव अतिरिक्त में बनाए गए और उनका कोई आर्थिक औचित्य नहीं है। 
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उपभोक्ता मंत्रालय के प्रस्तावों पर वित्त मंत्रालय सहमत नहीं 
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय ने करीब 12 प्रस्तावों पर असहमति जताई है। हालांकि, इसमें कौन-कौन से नियम शामिल हैं, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। उपभोक्ता मंत्रालय ने 21 जून, 2021 में ई-कॉमर्स नियमों को सख्त बनाने के लिए मसौदा तैयार किया था। इसमें कंपनियों को भारी-भरकम छूट वाली सेल चलाने पर भी रोक लगा दी गई थी, जिसे बाद में सुधार करते हुए बाजार नियमों के साथ चलाने की अनुमति दी थी।


सरकार की सार्वजनिक नीतियों की जानकारी रखने वाली कानूनी फर्म पीएलआर चैंबर्स के प्रबंध भागीदार सुहान मुखर्जी का कहना है कि वित्त मंत्रालय ने अपनी चिंताएं बताते हुए ई-कॉमर्स नीतियों पर दोबारा विचार करने को कहा है। नीतियों में यह बदलाव ब्रिक एंड मोर्टर रिटेलर्स की ओर से विदेशी कंपनियों द्वारा बाजार नियमों के उल्लंघन की शिकायत पर किया गया था। 

छोटे कारोबारियों पर भी होगा असर 
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को 6 जुलाई को भेजे पत्र में कहा था कि ई-कॉमर्स पर गैर जरूरी नियम लादने से छोटे कारोबारियों को भी नुकसान होगा। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा है कि सभी हितधारकों से सलाह-मशविरे के बाद ही नियमों में बदलाव किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों को अनावश्यक निशाना बनाए जाने के आरोपों पर खंडन करते हुए पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां भारतीय कानून में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं। 

ज्यादा सख्ती से नौकरी और राजस्व की चिंता
वित्त मंत्रालय के साथ वाणिज्य मंत्रालय और नीति आयोग ने भी ई-कॉमर्स नियमों में ज्यादा सख्ती बरतने पर असहमति जताई है। उनका कहना है उपभोक्ता मंत्रालय के प्रस्ताव न तो उपभोक्ताओं के हित में हैं और न ही इनमें नियामकीय स्पष्टता है। इसके अलावा तेजी से बढ़ते इस बाजार पर अनावश्यक सख्ती से नौकरियां पैदा करने और कर राजस्व जुटाने में भी बाधा आ सकती है। ग्रांट थार्टंन के अनुसार, 2025 तक भारतीय ई-कॉमर्स बाजार 188 अरब डॉलर पहुंच सकता है। 

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