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Income Tax Return: 31 जुलाई 2022 तक दाखिल नहीं किया रिटर्न तो कितना भरना पड़ेगा जुर्माना? जानिए नियम

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Mon, 25 Jul 2022 04:46 PM IST
सार

यदि 31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने पर आपके ऊपर आयकर बकाया है तो आपको लेट फीस के साथ बकाया राशि पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज भरना पड़ सकता है। आयकर के जानकारों के मुताबिक महीने की शुरुआत से ही ब्याज की गणना होने लगती है।

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itr new income tax new - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

वित्तीय वर्ष 2021-22 या कर निर्धारण वर्ष 2022-23 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2022 है। सरकार ने तिथि को आगे नहीं बढ़ाने के संकेत दे दिए हैं। ऐसे में, अगर आप अंतिम तिथि से पहले बचे हुए दिनों में आपका आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं तो आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा चूकने पर जुर्माना भी लगता है और देरी से रिटर्न दाखिल करने पर ब्याज भी भरना पड़ता है। 

अगर आप 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न नहीं दाखिल करते हैं तो आपको 31 दिसंबर तक लेट आईटीआर फाइल करने का मौका मिलेगा पर इसके लिए आपको लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ेगी। पांच लाख रुपये से अधिक की आय के लिए जुर्माने की राशि पांच हजार रुपये है। जबकि अन्य के जुर्माने की यह राशि 1000 रुपये है।  

साल में एक लाख से अधिक का बिजली बिल भरने पर आयकर रिटर्न भरना जरूरी

लेट फाइलिंग की यह फीस उन टैक्सपेयर्स पर भी लागू होगी जिनकी आय ढाई लाख रुपये की कर छूट सीमा से कम हो सकती है, लेकिन जिनके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। ऐसे करदाताओं में वे लोग शामिल होते हैं जिनके पास विदेशी संपत्ति है या जिन्होंने विदेशों से आय अर्जित की है। इसके तहत वे लोग भी आते हैं जिन्होंने वित्तीय वर्ष के दौरान एल लाख से अधिक के बिजली बिल का भुगतान किया है या फिर रिटर्न भरना उनलोगों के लिए अनिवार्य है जिन्होंने एक या अधिक खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक जमा किया है। 

इसके अलावे ऐसे लोगों के लिए भी आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है जिन्होंने स्वयं या उनके परिवारवालों ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान विदेश यात्रा पर दो लाख रुपये से अधिक रुपये खर्च किए हैं। 

कैसे की जाती है लेट फीस पर ब्याज की गणना?

यदि 31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने पर आपके ऊपर आयकर बकाया है तो आपको लेट फीस के साथ बकाया राशि पर एक प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज भरना पड़ सकता है। आयकर के जानकारों के मुताबिक महीने की शुरुआत से ही ब्याज की गणना होने लगती है। मान लीजिए अगर किसी व्यक्ति ने अगस्त महीने की पांच तारीख को बकाया कर का भुगतान किया तो उसे पूरे महीने के लिए बकाया आयकर पर एक प्रतिशत का ब्याज भड़ना पड़ेगा। 

इसके बाद दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी अगर व्यक्ति ने लेट टैक्स भर दिया और आयकर विभाग को उसके आयकर आकलन के दौरान यह लगा कि उसने आयकर की सही गणना नहीं की है तो ऐसी परिस्थिति में उस व्यक्ति को अतिरिक्त राशि पर पूर्व के समय से ही ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा।

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