एयर इंडिया : कंपनी के 209 कर्मचारियों और टाटा समूह ने लगाई बोली

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 15 Dec 2020 01:51 AM IST

सार

  • दीपम सचिव ने कहा...विमानन कंपनी के रणनीतिक विनिवेश के लिए मिले हैं कई रुचि पत्र
  • 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को कर्मचारियों ने लगाई है बोली
एयर इंडिया
एयर इंडिया - फोटो : Air India
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विस्तार

घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के अधिग्रहण के लिए टाटा समूह समेत कई कंपनियों ने शुरुआती बोली लगाई है। इस बीच, एयर इंडिया के 209 वरिष्ठ कर्मचारियों ने भी बोली में हिस्सा लिया है। उधर, निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहीन कांत पांडेय ने ट्वीट किया कि एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए कई रुचि पत्र मिले हैं। सौदा अब दूसरे चरण में जाएगा। हालांकि, उन्होंने अधिग्रहण के लिए बोली लगाने वालों के नाम उजागर नहीं किए। सूत्रों के अनुसार, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने सोमवार को समय सीमा समाप्त होने से पहले रुचि पत्र जमा किया। हालांकि, यह पता नहीं चल पाया है कि टाटा ने अकेले या अन्य के साथ मिलकर बोली लगाई है। एक अधिकारी ने बताया, सौदा सलाहकार 6 जनवरी से पहले उन बोलीदाताओं को सूचित करेंगे, जिनकी बोलियां पात्र पाई जाती हैं। उसके बाद पात्र बोलीदाताओं से वित्तीय बोलियां जमा करने को कहा जाएगा।
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...तो पहली बार कर्मचारी ही खरीदेंगे सरकारी कंपनी
209 कर्मचारियों के एक समूह ने अमेरिका स्थित एक निजी इक्विटी फर्म ‘इंट्रूूप्स इंक’ के साथ 50 फीसदी हिस्सेदारी के लिए बोली में हिस्सा लिया है। अमेरिकी कंपनी के चेयरमैन लक्ष्मी प्रसाद ने इसकी पुष्टि की है। अगर बात बनती है तो देश के कॉरपोरेट इतिहास का यह पहला मामला होगा, जब किसी सरकारी कंपनी को उसके ही कर्मचारी खरीदेंगे। 


67 साल बाद एयर इंडिया की ‘घर वापसी’ संभव
दरअसल, कर्ज में फंसी एयर इंडिया को खरीदने के लिए टाटा समूह ने रुचि पत्र सौंप दिया है। माना जा रहा है कि टाटा ने इसके लिए एयर एशिया इंडिया का इस्तेमाल किया है, जिसमें टाटा संस की ज्यादा हिस्सेदारी है। हालांकि, इस संबंध में एयर एशिया इंडिया के सीईओ सुनील भास्करन ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अगर सौदा पक्का हो जाता है तो विमानन कंपनी की 67 साल बाद ‘घर वापसी’ हो सकती है। टाटा समूह ने अक्तूबर, 1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से एयर इंडिया की शुरुआत की थी, जिसे भारत सरकार ने 1953 में अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। 

विमानन कंपनी पर 60 हजार करोड़ का कर्ज
सरकार ने इस एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। इसके साथ ही एयर इंडिया एक्सप्रेस लिमिटेड में भी एयर इंडिया की 100 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी। एयर इंडिया एसएटीएस एयरपार्ट सविर्सिज प्राइवेट लिमिटेड में 50 फीसदी हिस्सेदारी बेची जाएगी। वर्तमान में एयर इंडिया पर 60,074 करोड़ का कर्ज है, लेकिन अधिग्रहण के बाद खरीदार को 23,286.5 करोड़ रुपये ही चुकाने होंगे। शेष कर्ज को विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए एयर इंडिया एसेट होल्डिंग्स लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि बाकी का कर्ज खुद सरकार उठाएगी।
 

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