Air India: दिवाली से पहले ही टाटा की झोली में आ सकती है एयर इंडिया, 10 दिनों में विनिवेश प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Fri, 15 Oct 2021 02:12 PM IST

सार

एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राजीव बंसल ने कहा कि एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। टाटा समूह को इरादा पत्र पहले ही जारी कर दिया गया है।
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एयर इंडिया - फोटो : PTI
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विस्तार

टाटा संस ने घाटे में चल रही सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली जीत ली है। नागर विमानन सचिव राजीव बंसल ने कहा है कि एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया अगले 10 दिन में ही पूरी हो सकती है और तब तक केवल आवश्यक राजस्व तथा पूंजीगत व्यय किए जाने चाहिए। मालूम हो कि राजीव बंसल एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं।
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एयर इंडिया के लिए लगाई थी 18 हजार करोड़ की बोली
एयर इंडिया के लिए टाटा संस ने 18 हजार करोड़ की बोली लगाई, जबकि स्पाइसजेट के अजय सिंह ने 15 हजार करोड़ की बोली लगाई थी। पहले निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि यह ट्रांजैक्शन दिसंबर 2021 तक पूरा हो जाएगा। टाटा के हाथ एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की कमान आएगी। Talace Pvt Ltd के जरिए टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया के लिए बोली लगाई थी। इस कंपनी की स्थापना मुख्य रूप से इसी काम के लिए अगस्त 2020 में की गई थी।


कंपनी पर 65 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज
बता दें कि एयर इंडिया स्पेसिफिक अल्टरनेटिव मैकेनिज्म (AISAM) पैनल ने एयर इंडिया की वित्तीय बोली पर फैसला लिया है। इस पैनल में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई महत्वपूर्ण मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। पांडे ने कहा कि एयर इंडिया पर टोटल डेट 46262 करोड़ का है। यह आंकड़ा मार्च 2021 तक का है। अगस्त के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 61562 करोड़ पर पहुंच गया। सरकार को इस डील में 2,700 करोड़ रुपये का कैश मिलेगा। मौजूदा समय में एयर इंडिया 4400 घरेलू उड़ानें और विदेशों में 1800 लैंडिंग और पार्किंग स्लॉट को कंट्रोल करती है। 

1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से हुई थी शुरुआत
विमानन कंपनी की 68 साल बाद 'घर वापसी' हुई है। टाटा समूह ने अक्तूबर 1932 में टाटा एयरलाइंस के नाम से एयर इंडिया की शुरुआत की थी। वर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद एक राष्ट्रीय एयरलाइंस की जरूरत महसूस हुई। ऐसे में भारत सरकार ने एयर इंडिया में 49 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एयर कॉर्पोरेशन एक्ट पास किया और फिर टाटा समूह से इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी खरीद ली। फिर इसे एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बना दिया गया।

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