म्यूचुअल फंड से ज्यादा ETF में निवेश आसान, विदेश में निवेश कर हो सकते हैं मालामाल

न्यूज डेस्क,अमर उजाला Updated Sun, 07 Oct 2018 11:02 AM IST
ईटीएफ
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अगर आप इंवेस्टमेंट करने का मन बना रहे हैं तो म्यूचुअल फंड्स के अलावा भी आपके पास कई बेहतरीन विकल्प हैं। म्युचुअल फंड्स की तरह ही ये आपको मुनाफा तो देंगे ही साथ ही इनके खरीद-फरोख्त भी काफी आसान है। भारत के अलावा विदेश में निवेश करने के विकल्प आपके पास है जो ना सिर्फ विश्वसनीय हैं बल्कि ट्रेडिंग में भी आसान है। इन्ही ऑप्शंस में से एक है एक्सचेंज ट्रेडेड फंड जिसे ईटीएफ के तौर पर जाना जाता है ।
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भारतीय शेयर बाजार में म्यूचुअल फंड्स ने काफी बेहतर रिटर्न दिया है लेकिन हाल में हुए उतार-चढ़ाव की वजह से उम्मीद से कम रिटर्न भी आये हैं। अब म्यूचुअल के अलावा भारतीय निवेशक कुछ और विकल्प की तलाश में हैं जिसमें ईटीएफ के तरफ रूझान बढ़ रहा है।


केंद्र सरकार ने भी विदेशी पूंजी जुटाने के लिए ईटीएफ को भारतीय बाजार में ज्यादा से ज्यादा उपलब्ध कराने की योजना बना ली है। सरकार ने मूल्यांकन और विदेशी पूंजी को जुटाने के लिए 'भारत-22 ईटीएफ' को किसी विदेशी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की योजना बना रही है। इससे पहले सरकार ने ईटीएफ के जरिए घरेलू बाजार में 22,900 करोड़ रुपए जुटा लिये। सरकार कैसे ईटीएफ के क्षेत्र में भारतीय बाजार को निवेश कराना चाहती है? क्या है ईटीएफ और कैसे इसमें निवेश करना चाहिए ? आईये आपको बताते हैं ?

क्या है ईटीएफ?
ETF को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड कहते हैं जो निवेश का एक सरल माध्यम है। इसकी खरीद-फरोख्त अन्य शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंज में ही होती है। लेकिन इसे स्टॉक एक्सचेंज में खरीद-बिक्री की सुविधा वाला फंड भी कहा जाता है। यह किसी भी इंडेक्स, बॉन्ड्स या कई एसेट्स के समूह को ट्रैक करता है। पूरे दिन कारोबार होने से इसकी भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है। बेहतर लिक्विडिटी होने की वजह से इसे कभी बेचा जा सकता है। 

कैसे करता है काम?
ईटीएफ किसी इंडेक्स या एसेट को ट्रैक करता है। अगर कोई ईटीएफ बीएसई सेंसेक्स को ट्रैक करता है तो यह अपने फंड का निवेश सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों के शेयरों में करेगा। यह निवेश उसी अनुपात में होगा, जितना हर कंपनी का सेंसेक्स में वेटेज होगा। आपके इस ईटीएफ में निवेश करने पर एसेट मैनेजमेंट कंपनी आपको निवेश के मूल्य के हिसाब से यूनिट्स जारी कर देगी

कैसे म्यूचुअल फंड से आसान ?
ईटीएफ की सबसे बड़ी खासियत है इसका लिक्विड होना। शेयर बाजार में ट्रेडिंग के चलते इसे खरीदना और बेचना म्यूचुअल फंड से अपेक्षाकृत आसान है। इसमें निवेश के लिए आपको म्यूचुअल फंड के डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती। म्यूचुअल फंड की आम स्कीमों में अपनी यूनिट्स बेचने के लिए भी आपको म्यूचुअल फंड कंपनी के पास जाना पड़ता है। शेयर बाजार में खरीद-फरीख्त होने से इसकी कीमत रियल टाइम होती है। यह बात म्यूचुअल फंड स्कीम में लागू नहीं होती।
 
म्यूचुअल फंड की तरह दिन का कारोबार खत्म होने पर इसकी नेट एसेट वैल्यू तय नहीं होती है। अमेरिका में ज्यादातर निवेश ईटीएफ के जरिए होता है तो अगर आप विदेश में निवेश करना चाहते हैं तो ईटीएफ सबसे बेहतर जरिया हो सकता है। इसमें निवेशक को डायवर्सिफिकेशन का भी फायदा मिलता है। 

तो आप भी ईटीएफ में निवेश के लिए सोच रहे हैं तो आईये जानते हैं कुछ और अहम बातें।

भारतीय निवेशक
भारतीय निवेशक
कितना करें निवेश ? 
क्या ईटीएफ में निवेश करने के लिए बड़ी रकम चाहिए ? तो जवाब है नहीं, ईटीएफ में आप छोटी सी रकम से भी निवेश कर सकते हैं। अगर कोई निवेशक निफ्टी में शामिल कंपनियों में निवेश करना चाहता है तो उसे इन 50 शेयरों में निवेश करना पड़ेगा। हालांकि इसके लिए काफी पैसे की जरूरत होगी। अगर आप किसी ऐसे ईटीएफ में निवेश करना चाहते हैं, जिसका अंडरलाइंग निफ्टी 50 इंडेक्स है तो आप थोड़े पैसे से भी इस ईटीएफ की यूनिट्स खरीद सकते हैं। इससे आपको निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों के रिटर्न का फायदा उठाने का मौका मिलेगा। 

टैक्स के नियम?
अगर आपने आपको निवेश से मुनाफा हो ता है तो 15% कर लगता अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर लगेगा। जबकि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर-मुक्त होता है। एक वर्ष से अधिक की निवेश अवधि एक लंबी अवधि मानी जाती है। 

एक्सपेंस रेशियो 
ईटीएफ इसमें एक्सपेंस रेशियो 0.5 से 1 फीसदी के बीच होता है जो म्यूचुअल फंड की स्कीमों के मुकाबले कम होता है। इसके मुकाबले म्यूचुअल फंड्स की स्कीमों का एक्सपेंस रेशियो 2.5 फीसदी तक हो सकता है। इसकी दूसरी खासियत यह है कि इसमें म्यूचुअल फंड्स स्कीम की तरह आपको एग्जिट लोड भी नहीं देना पड़ता। इन खासियतों की वजह से पिछले कुछ सालों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। अब छोटे शहरों में भी निवेशक ईटीएफ में पैसा लगा रहे हैं। 
2001 में पहली बार भारतीय शेयर बाजार में खरीद-बिक्री के साथ इसकी शुरुआत भारत में हुई थी। अब इसे ब्रोकर के अलावा सीधे फंड हाउस से भी खरीदा जा सकता है। 

ईटीएफ की कमियां 
देश में नियमित म्यूचुअल फंड की तुलना में इस तरह के फंड के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि म्यूचुअल फंड में यह पर्याप्त परिमाण में उपलब्ध हैं। भारत में कुछ दर्जन ईटीएफ हैं, जबकि म्यूचुअल फंड योजनाओं की संख्या हजारों में है।  ईटीएफ में सिर्फ 1 ही देश के शेयर होते हैं जो है अमेरिका। कभी-कभी ज्यादा ट्रैकिंग एरर होने से निवेशक के घाटे/मुनाफे पर असर भी पड़ता है। 
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