आपके काम की खबर: फायदे में रहना है तो स्वास्थ्य बीमा खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें वरिष्ठ नागरिक

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Sat, 25 Sep 2021 01:30 PM IST

सार

नई तकनीक और आविष्कारों से स्वास्थ्य खर्च बढ़ गया है। ऐसे में आज के दौर में स्वास्थ्य बीमा बेहद जरूरी है। कोरोना काल में इसका महत्व और भी बढ़ा है।
Health Insurance
Health Insurance - फोटो : pixabay
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

भारत में कई कर्मचारी जीवनभर ग्रुप मेडिक्लेम या ऑफिस की ओर से दिए गए मेडिक्लेम पर निर्भर रहते हैं। लेकिन जब वे रिटायर होते हैं, तो उनके पास हेल्थ कवर नहीं होता है। अगर होता भी है तो इतना कम जो अस्पताल के खर्च को पूरा नहीं कर सकता। वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस बेहद जरूरी है। रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च बढ़ता जाता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस रिटायरमेंट के बाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कामकाजी जीवन के दौरान। 
विज्ञापन


बाजार में जनता के लिए कई हेल्थ इंश्योरेंस प्लान उपलब्ध हैं। लेकिन जब बात रिटायरमेंट की आती है, तो ज्यादा लाभ के लिए आपको उस वक्त के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं इसके बारे में। 


गंभीर बीमारी की कवर सूची को ध्यान से पढ़ें
क्लेम के खारिज होने से बचने के लिए दस्तावेजों और गंभीर बीमारी की कवर सूची को ध्यान से पढ़ें। कुछ बीमारियों के मामले में क्लेम की राशि पॉलिसी में तय सम अश्योर्ड राशि से परे अपेक्षाकृत कम होती है। 

मौजूदा बीमारी के वेटिंग पीरियड का रखें ध्यान
हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले ही जान लें कि कंपनी मौजूद बीमारी को कवर करेगी या नहीं। कुछ बीमा कंपनियां पहले से मौजूद बीमारी को कवर करती हैं और कुछ नहीं। ऐसे में आपको सावधानी बरतने की जरूरत है। पॉलिसी खरीदने से पहले ही उसका मूल्यांकन करें। वेटिंग पीरियड 24 महीने से 48 महीने तक का हो सकता है। इसलिए वही योजना चुनें जो कम वेटिंग पीरियड में आपकी मौजूदा बीमारी कवर करती हैं।

को-पेमेंट क्लॉज भी जरूरी
पॉलिसीधारक बीमित सेवाओं के लिए पहले से तय राशि का अपनी जेब से भुगतान करता है। इसे को-पेमेंट क्लॉज कहा जाता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बाजार में उपलब्ध लगभग सभी योजनाएं को-पेमेंट की शर्त के साथ आती हैं। इसलिए आप वहीं योजना चुनें जो आपको पहले से मौजूद और अन्य क्लेम पर कम फीसदी भुगतान करने का ऑफर देती हो। अतिरिक्त प्रीमियम देकर इस को-पेमेंट को माफ करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

अस्पताल में कमरे और ICU की सीमाएं
कई ऐसी कंपनियां हैं जो अस्पताल में कमरे और आईसीयू के लिए भुगतान को सीमित रखती हैं। उन सीमाओं के बाद का भुगतान पॉलिसीधारक को ही करना होता है। इसलिए इंश्योरेंस लेने से पहले इस बात पर ध्यान देना जरूरी है। केवल उन्हीं इंश्योरेंस पॉलिसी को चुनें जो आपके अस्पताल में भर्ती होने पर आपके पूरे इलाज (कमरे का किराया और नर्सिंग के खर्चों सहित) को कवर करती हैं।

प्रीमियम के भुगतान से जुड़ी जानकारी जरूरी
रिटायरमेंट के बाद पॉलिसी टर्म के प्रीमियम के भुगतान के लिए आपको दिक्कत आ सकती है। मालूम हो कि अनेक बीमा कंपनियां अधिकतम पॉलिसी टर्म पर एकमुश्त प्रीमियम भरने पर छूट देती करती हैं। इसलिए आप फैमिली डिस्कांउट और कंपनी द्वारा निर्धारित अवधि में टेस्ट रिपोर्ट्स को जमा करने पर डिस्काउंट का लाभ ले सकते हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और बजट 2020 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00