इस तरह 14 सालों में बन सकते हैं किसी कंपनी के सीईओ, मिलेगी अपार सफलता

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 10 Oct 2019 12:42 PM IST
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अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर कोई कड़ी मेहनत करता है। लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिल पाती है। समझदारी से काम करना और अपने लक्ष्य के लिए हर संभव प्रयास करना आपके लिए सहायक होगा। बिजनेस जगत की बात करें, तो इसमें सफलता को जोखिम लेने की क्षमता से जोड़ा जाता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि एक एक्जीक्यूटिव को पहली नौकरी से सीईओ बनने में औसतन 24 साल लगते हैं। लेकिन जोखिम लेने वाला एक्जीक्यूटिव 14 सालों में ही सीईओ का पद हासिल कर सकता है।
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14 साल में बन सकते हैं सीईओ

सीईओ जिनोम प्रोजेक्ट में 10 साल तक की स्टडी की गई है, जिससे यह निष्कर्ष निकला है कि जोखिम लेने वाला एक्जीक्यूटिव 14 साल में ही कंपनी का सीईओ बन सकता है। बता दें कि 17,000 एक्जिक्यूटिव के सर्वे से यह बात सामने आई है। सर्वे में 2,000 सीईओ भी शामिल थे। 


जोखिम को अच्छे से मैनेज करना सीईओ की सबसे बड़ी खासियत होती है। जोखिम लेने से एक्जीक्यूटिव को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है। जोखिम से कर्मचारी एक नई पहल कर सकते हैं और सही कदम उठाकर साबित कर सकते हैं कि वो कितने काबिल हैं। 

स्टडी में रिस्क की श्रेणी में दिवालिएपन जैसी स्थिति में संभालना और ऐसे बिजनेस की कमान संभालना है जो अच्छा नहीं चल रहा है। अगर कोई एक्जीक्यूटिव छोटे कारोबार को या कम मुनाफे वाले कारोबार को अपनी समझदारी से बढ़ा देता है, तो यह उसके लिए बहुत अच्चा अवसर साबित हो सकता है। 

हालांकि अगर आप उम्मीदों पर नहीं खरे उतरे, तो इससे आपकी नौकरी जा भी सकती है। छोटी कंपनियों की जिम्मेदारी संभालकर बड़े फैसले लेना और कंपनी को ऊंचाइयों तक पहुंचाना किसी एक्जीक्यूटिव के लिए सुनहरे अवसर की तरह होगा। 

महिलाओं के लिए जोखिम लेना ज्यादा अहम

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए जोखिम उठाने की क्षमता और भी अहम हो जाती है। रिसर्च के अनुसार, 85 वरिष्ठ महिला एक्जीक्यूटिव ने सफलता के लिए जोखिम लेने की क्षमता को बेहद अहम माना है। जब महिलाएं खुद को उस काम के लिए तैयार नहीं समझतीं, तब जोखिम लेना और उस पर विजय प्राप्त करना और भी अहम हो जाता है। 

स्टडी से यह बात सामने आई है कि महिलाएं किसी भी नए पद को संभालने से पहले खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहती हैं। हालांकि, यह संभव नहीं है। कईं बार ऐसा होता है कि महिलाएं पूरी तरह से तैयार नहीं होतीं और नया पद या कोई नई भूमिका संभाल लेती हैं और जिम्मेदारी के हिसाब से जरूरी स्किल भी डेवलप कर लेती हैं।  

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