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हरियाली के प्रहरी: पहले उठाते हैं कूड़ा फिर लगाते हैं बूटा, पीयू के इन प्रोफेसरों का योगदान है महान

आज हम हरियाली के एक ऐसे प्रहरी से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं जिनके शोध तो देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं हीं, साथ ही पर्यावरण बचाने के लिए बेहतरीन कार्...

24 अक्टूबर 2021

Digital Edition

उपलब्धि: पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के डॉ. विशाल शर्मा विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल, 16 और वैज्ञानिक भी रैंकिंग में

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। फॉरेंसिक साइंस विभाग के अध्यक्ष डॉ. विशाल शर्मा विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल हो गए हैं। उनका कार्य क्षेत्र अप्लाई फिजिक्स, फॉरेंसिक, मेटीरियल्स रहा है। इनके अलावा 16 अन्य वैज्ञानिक भी दो फीसदी वैज्ञानिकों में शामिल हुए हैं। यूएसए की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने वैज्ञानिकों की विश्व रैंकिंग जारी की है। पिछले एक साल के डाटा के आधार पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं।

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विभिन्न क्षेत्रों के एक लाख वैज्ञानिकों का चयन किया गया है। शोध के परिणाम, उनका प्रभाव आदि पर यह रैंकिंग जारी हुई है। इस सूची में पीयू के प्रो. संजय छिब्बर, प्रो. एसके मेहता, प्रो. नवनीत कौर, प्रो. आरके कोहली, प्रो. रजत संधीर, प्रो. रोहित शर्मा, प्रो. एसके त्रिपाठी, यूआईपीएस विभाग के प्रो. अनिल कुमार, यूआईईटी के डॉ. विशाल गुप्ता, यूआईपीएस विभाग के ए कुहड़, डॉ. गजांनद शर्मा आदि शामिल हैं।

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पीयू के बड़ी संख्या में प्रोफेसरों के नाम इस रैंकिंग में आने से सभी खुश हैं। इस सूची को देखकर अन्य वैज्ञानिक भी और बेहतर कार्य करने की तैयारी में हैं, ताकि उनका नाम भी इसमें शामिल हो। हर साल यह रैंकिंग स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी की जाएगी।
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़

नई पार्टी के एलान से पहले कैप्टन का बड़ा बयान: कहा- पहले किसानों की समस्या हल करे केंद्र, तभी भाजपा से होगी गठबंधन पर बातचीत

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अगले महीने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का एलान करेंगे। इन दिनों वह पार्टी के गठन की तैयारियों में जुटे हैं। भविष्य में उनका कौन सहयोगी होगा, इसका भी खुलासा उन्होंने कर दिया है। कैप्टन को भाजपा के साथ गठबंधन से गुरेज नहीं है लेकिन कांग्रेस उन्होंने कुबूल नहीं है। भाजपा के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह की नई राजनीतिक पार्टी का गठबंधन सशर्त होगा। कैप्टन की यह शर्त क्या है, इसकी जानकारी उन्होंने खुद अपने फेसबुक पेज पर दी है। 

किसानों की समस्या हल के बाद ही गठबंधन की पहल
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए किसानों का मुद्दा बेहद अहम हैं। इनके समाधान के बगैर वह भाजपा से नाता नहीं जोड़ेंगे। अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर कैप्टन ने लिखा कि केंद्र सरकार को पहले किसानों के समस्याओं का समाधान करना चाहिए, इसके बाद भारतीय जनता पार्टी से किसी भी राजनीतिक समझौते पर चर्चा की जाएगी। पंजाब में भाजपा को एक कद्दावर नेता की तलाश है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि कैप्टन को अपने साथ लाने से पहले भाजपा को किसानों का मुद्दा हल करना होगा। 

नाराज नेता बनेंगे कैप्टन के सिपाही
सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब में अपनी सियासी फौज खड़ी करेंगे। कैप्टन की इस फौज का हिस्सा दूसरे दलों के नाराज नेता बनेंगे। कहा जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस के कई नेता कैप्टन की पार्टी का हिस्सा बन सकते हैं। विधानसभा टिकट बंटवारे के दौरान पंजाब कांग्रेस में असंतोष पनपने की आशंका है। अगर ऐसा होता है तो अमरिंदर सिंह इस अवसर को भुनाने की कोशिश जरूर करेंगे। वहीं शिअद से नाराज टकसाली नेताओं पर भी कैप्टन का फोकस है। हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह दावा किया था कि कई विधायक उनके संपर्क हैं। 
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आरूसा मामले के बीच सिद्धू की चुप्पी टूटी: कहा- पंजाब के वास्तविक मुद्दों पर वापस लौटे, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों से जुड़े

पंजाब की राजनीति में आरूसा आलम को लेकर घमासान मचा है। इस बीच नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट कर बड़ी बात कह दी। सिद्धू ने कहा कि राज्य को अपने वास्तविक मुद्दों पर वापस आना चाहिए। यह मुद्दे हर पंजाबी और आने वाली पीढ़ियों से जुड़े हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह असली मुद्दों को पीछे नहीं हटने देंगे।

नवजोत सिंह सिद्धू का यह बयान पंजाब के कई कांग्रेस नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच पाकिस्तानी पत्रकार अरूसा आलम से दोस्ती को लेकर चल रही जुबानी जंग के मध्य आया है। नवजोत सिंह सिद्धू ने ट्वीट किया कि पंजाब को अपने वास्तविक मुद्दों पर वापस आना चाहिए। यह हर पंजाबी और हमारी आने वाली पीढ़ियों से संबंधित हैं। हम वित्तीय आपातकाल का मुकाबला कैसे करेंगे? मैं वास्तविक मुद्दों पर टिका रहूंगा और उन्हें पीछे नहीं जाने दूंगा।

पंजाब को लेकर चिंतित सिद्धू, सोनिया गांधी को लिख चुके हैं खत
पंजाब के वास्तविक मुद्दों को लेकर नवजोत सिंह सिद्धू काफी चिंतित हैं। कुछ दिन पहले ही नवजोत सिंह सिद्धू ने दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और हरीश रावत के साथ बैठक की थी। इस दौरान सिद्धू ने 18 सूत्रीय एजेंडे पर चिंता जताई थी। वहीं 13 सूत्रीय एजेंडे वाला एक पत्र सोनिया गांधी को भी लिखा था। इस पत्र में सिद्धू ने नशा, बेअदबी, खनन माफिया, बिजली और एमएसपी का मुद्दा उठाया था और इन पर काम करने के लिए पंजाब सरकार को निर्देश देने की अपील की थी। सिद्धू ने पत्र में लिखा था कि पंजाब के लोग शिअद-भाजपा शासन में हुए बेअदबी मामले और कोटकपूरा पुलिस फायरिंग मामले न्याय चाहते हैं।
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गर्व की बात: जयपुर में होने वाली चैलेंजर ट्रॉफी में चंडीगढ़ की काशवी गौतम और आराधना बिष्ट मचाएंगी धमाल

बीसीसीआई की ओर से 2 नवंबर से जयुपर में शुरू होने वाली वुमन चैलेंजर ट्रॉफी अंडर-19 के लिए शहर की काशवी गौतम और आराधना बिष्ट का चयन हुआ है। यूटी क्रिकेट एसोसिएशन (यूटीसीए) के अध्यक्ष संजय टंडन ने बीसीसीआई को बताया कि चयनित दोनों खिलाड़ियों को 25 अक्तूबर को जयपुर में रिपोर्ट करना है। इसके बाद उन्हें एक सप्ताह के क्वारंटाइन से गुजरना होगा। हिमाचल प्रदेश में चुनाव की तैयारियों के बीच यूटीसीए अध्यक्ष संजय टंडन ने नेशनल स्तर के इस टूर्नामेंट में चंडीगढ़ के दोनों महिला खिलाड़ियों के चयन पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे शहर की लड़कियों में क्रिकेट के प्रति जागरूकता आएगी। उनके चयन से घरवालों में खुशी का माहौल है।

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बेहतरीन ऑलराउंडर हैं काशवी
सेक्टर- 26 स्थित खालसा कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा काशवी गौतम सेक्टर- 37 में रहती हैं। इस महिला क्रिकेटर ने यूटीसीए महिला डोमेस्टिक क्रिकेट टूर्नामेंट में रॉक जोन की कप्तानी की थी। इस दौरान काशवी ने तीन मैचों में 62 रन बनाए थे और गेंदबाजी करते हुए 7 विकेट चटकाए थे। वहीं, हाल ही में संपन्न हुई महिला अंडर- 19 में वर्षा बाधित टूर्नामेंट में काशवी ने दो मैच खेलकर तीन विकेट लिए थे, जबकि एकमात्र पारी में निचले क्रम पर खेलते हुए 11 रन बनाए थे। काशवी ने गत सीजन दुबई में आयोजित किए गए महिलाओं के आईपीएल में ट्रेब्लेजर्स टीम का भी प्रतिनिधित्व किया था।

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डोमेस्टिक टूर्नामेंट की विजेता टीम की कप्तान रही आराधना
जीरकपुर की रहने वाली और खालसा कॉलेज सेक्टर- 26 में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा आराधना बिष्ट भी यूटीसीए डोमेस्टिक टूर्नामेंट की विजेता रॉक जोन टीम की कप्तान रही हैं। बिष्ट ने तीन मैचों में 82 रन जड़े, जबकि दो विकेट भी चटकाए थे। बीसीसीआई अंडर-19 टूर्नामेंट में खेली दो पारियों में 101 रन बनाए थे, जबकि 5 विकेट चटकाने में कामयाब रही थीं। 
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पंजाब: 17 साल से कैप्टन अमरिंदर सिंह की दोस्त हैं अरूसा आलम, केंद्रीय एजेंसियों की जांच रिपोर्ट के बाद लगातार मिलता रहा वीजा

काश्वी गौतम और आराधना बिष्ट
जालंधर का पंजाब प्रेस क्लब का उद्घाटनी समारोह अरूसा आलम और पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पहली सार्वजनिक मुलाकात का गवाह रहा है। जब अरूसा पहली बार कैप्टन के साथ देखी गई थीं। कैप्टन ने विशेष तौर पर अरूसा को मंच पर बुलाकर पास बैठाया था। इसके बाद अरूसा को लेकर चर्चा शुरू हुई और पता चला कि वह कैप्टन अमरिंदर सिंह की पाकिस्तानी पत्रकार मित्र हैं। वे कैप्टन को पाक दौरे के दौरान मिली थीं। अरूसा 2017 में हुए अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण में उन चंद लोगों में शामिल थीं, जिनके लिए कैप्टन ने विशेष व्यवस्था की थी। 2017 में भी कैप्टन की तरफ से अरूसा को बुलाया गया था।

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वीडियो होते रहे हैं वायरल
केंद्र सरकार ने बाकायदा एजेंसियों से पूरी जांच करवाने के बाद वीजा दिया था। इसके बाद अरूसा लगातार पंजाब में रहीं और उनकी मंत्रियों के अलावा डीजीपी दिनकर गुप्ता व विनी महाजन के साथ उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं। पंजाब की कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना भी अरूसा के साथ तस्वीरों में दिखाई देती रही हैं। अकसर वीडियो वायरल होते रहे, जिसमें अरूसा पंजाब के मंत्री राणा सोढी समेत कई दिग्गजों के साथ दिखाई देती थीं, लेकिन कैप्टन ने कभी भी कुछ नहीं छिपाया।

कभी मुद्दा नहीं बनीं अरूसा आलम
17 साल से लगातार अरूसा और कैप्टन के बीच दोस्ती का रिश्ता बना रहा। इस दौरान होने वाले तमाम चुनाव में अरूसा कभी मुद्दा नहीं बनीं। विरोधी दल शिअद व आप ने कभी अरूसा को लेकर चुनाव में कैप्टन को नहीं घेरा। इतना ही नहीं, अमृतसर लोकसभा चुनाव में अरुण जेटली व कैप्टन के बीच मुकाबले में भी अरूसा का नाम सुना नहीं गया। कैप्टन ने भी अरूसा से अपनी दोस्ती को कभी नहीं छिपाया। बताया जाता है कि कैप्टन जब दूसरी बार सीएम बने तो शिमला के पास मशोबरा में अरूसा के साथ जन्मदिन मनाया। दोनों की दोस्ती की चर्चा अमरिंदर सिंह की बायोग्राफी ‘कैप्टन अमरिंदर सिंह द पीपल्स महाराजा’ में एक अध्याय में है, जिसे मशहूर पत्रकार खुशवंत सिंह ने लिखा है।

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अगस्ता-90बी पनडुब्बी सौदों पर अरूसा ने दी थी रिपोर्ट
अरूसा आलम को अगस्ता-90बी पनडुब्बी सौदों पर अपनी रिपोर्ट के लिए जाना जाता है, जिसके कारण 1997 में पाकिस्तान के तत्कालीन नौसेना प्रमुख मंसूरुल हक की गिरफ्तारी हुई थी। आरूसा, अकलीम अख्तर की बेटी हैं, जिन्हें 70 के दशक में पाकिस्तान की ताकतवर महिला माना जाता था। उन्हें जनरल रानी के नाम से जाना जाता था, क्योंकि पाकिस्तान के तीसरे राष्ट्रपति के साथ उनके घनिष्ठ संबंध थे।

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पाक नागरिक को आसानी से नहीं मिलता वीजा
2010 में अमरिंदर की किताब ‘द लास्ट सनसेट’ के विमोचन के दौरान अरूसा को दिल्ली में देखा गया था। अरूसा को लेकर एजेंसियां सक्रिय हुईं, लेकिन आईबी व अन्य खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद अरूसा को भारत का लगातार वीजा दिया गया। हालांकि उस दौरान भारत में डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार थी। सूत्रों की मानें तो पाक नागरिक को वीजा देने की प्रक्रिया काफी जटिल है और इसमें आईबी, रॉ के अलावा बीएसएफ की इंटेलिजेंस सर्विस और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट मंगवाई जाती है, जिसके आधार पर ही वीजा जारी किया जाता है।
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चंडीगढ़ प्रशासन की नाकामी: 10 संपर्क सेंटरों पर हो रहे ओपीडी पंजीकरण की लोगों को नहीं दी जानकारी, जीएमएसएच-16 में बढ़ रही भीड़

कोविड से बचाव के मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 10 संपर्क केंद्रों में जीएमएसएच-16 के ओपीडी पंजीकरण की सुविधा शुरू की है। सुविधा शुरू होने के 6 दिन गुजरने के बाद भी लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाई है। नतीजतन शनिवार का दिन होने के बावजूद अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर सुबह 8 से 12 बजे तक लंबी कतार लगी रही। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें संपर्क केंद्र पर पंजीकरण शुरू होने की जानकारी ही नहीं है, वरना वे वहीं से कार्ड बनवाकर आते।

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दूसरी तरफ सुविधा के तहत जीएमएसएच-16 में बार-कोडेड ओपीडी कार्ड जारी करने के लिए एक अलग काउंटर उपलब्ध कराया गया है। इसके तहत ऑनलाइन पंजीकरण के बाद मरीज बिना किसी परेशानी के विशेष काउंटर से ओपीडी कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। हालाकि ऑनलाइन काउंटर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अस्पताल प्रशासन इनकी संख्या बढ़ाने की योजना बना रहा है, लेकिन मरीजों की संख्या ही उस काउंटर पर न के बराबर है। लोग अब भी जीएमएसएच-16 में फ्री वॉक इन रजिस्ट्रेशन कराने ही पहुंच रहे हैं।

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इन केंद्रों पर है पंजीकरण की सुविधा
  • संपर्क केंद्र सेक्टर-10
  • संपर्क केंद्र सेक्टर-15
  • संपर्क केंद्र सेक्टर-40
  • संपर्क केंद्र सेक्टर-43
  • संपर्क केंद्र इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1
  • संपर्क केंद्र धनास
  • संपर्क केंद्र मौलीजागरां
  • संपर्क केंद्र बापूधाम कॉलोनी
  • संपर्क केंद्र मनीमाजरा
  • संपर्क केंद्र मलोया

धीरे-धीरे मरीजों को सुविधा की जानकारी हो रही है। 10 संपर्क केंद्रों पर मरीजों के पंजीकरण की क्या स्थिति है, इसका आकलन अब तक नहीं कराया गया है।
-डॉ. सुमन सिंह, निदेशक, स्वास्थ्य
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किसान आंदोलन: गुरनाम चढूनी का छलका दर्द, बोले- राज बिना धर्म नहीं चल सकता, ये तो आंदोलन है

राजनीति में उतरकर चुनाव में भाग लेने का बयान देकर विवादों में आ चुके किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी का एक बार फिर दर्द छलका उठा। राजनीति में भागीदारी का पक्ष लेते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त मोर्चा को ऐलनाबाद उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारना चाहिए था। 

सक्रिय राजनीति में उतरने के पक्षधर गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि राज बिना तो धर्म भी नहीं चल सकता, हम तो फिर भी आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ये है कि जिनके पास वोट हैं, उनके पास राज नहीं है और जिनके पास राज है, उनके वोट ही नहीं है। जिनके वोट हैं, किसान वे तो सड़कों पर प्रदर्शन करके डंडे खाने का काम कर रहे हैं। कॉर्पोरेट घरानों के पास वोट नहीं है लेकिन वे देश पर राज कर रहे हैं।

आंदोलन की मजबूती के सवाल पर चढूनी ने कहा कि अच्छा तो तब होता जब संयुक्त मोर्चा को अपना उम्मीदवार यहां मैदान में उतारना चाहिए था। क्योंकि जब तक आम जनता विधानसभा और संसद में नहीं जाएंगे, तब तक बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमने विधानसभा और संसद में डाकू बैठा दिए। ये देश को लूट रहे हैं।

गुटबंदी आई नजर, टिकैत ग्रुप ने बनाई दूरी
चढूनी के सिरसा और ऐलनाबाद दौरे के दौरान टिकैत ग्रुप के लोगों ने दूरी बनाए रखी। किसान आंदोलन को लेकर गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो तरह के घोड़े होते हैं, जंगी घोड़े और दरबारी घोड़े। बदकिस्मती ये है कि लोग दरबारी घोड़ों को ज्यादा पसंद करते हैं जबकि जंगी घोड़ों को पसंद नहीं किया जाता। चढूनी ने कहा कि ये किसान आंदोलन केवल आंदोलन नहीं है बल्कि धर्मयुद्ध है।
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क्रिकेट का क्रेज: भारत-पाकिस्तान के बीच हाई वोल्टेज मुकाबला आज, चंडीगढ़ के होटलों और बाजारों में बड़ी स्क्रीन पर देख सकेंगे मैच

वर्ल्ड कप टी-20 मुकाबले में रविवार को चिरप्रतिद्वंद्वी भारत-पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने होंगी। इस मैच के लिए प्रशंसक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। चंडीगढ़ के होटलों की बड़ी स्क्रीन से लेकर लोग अपने घरों की टीवी स्क्रीन पर यह मुकाबला देखेंगे। भारत और पाकिस्तान की टीमें पांच साल बाद आमने-सामने होंगी। इससे पहले दोनों टीमों के बीच वर्ष 2016 के विश्व कप में भिड़ंत हुई थी, जिसमें भारत छह विकेट से जीता था। शहर में कई होटलों में हाई वोल्टेज मुकाबला बड़ी स्क्रीन पर देखा जाएगा।

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इसके लिए रेस्टोरेंट वालों ने अपना मेन्यू भी बनाया है, ताकि लोंग मैच के दौरान क्रिकेट से जुड़े फूड का भी भरपूर स्वाद ले सकें। वहीं, सेक्टर-22 की मेन मार्केट में किरण सिनेमा के साथ बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। मार्केट में खरीदारी करने वाले लोग इस महामुकाबले का आनंद ले सकेंगे। वहीं, मनीमाजरा के निवासी अंकित अरोड़ा कन्नू की ओर से समाधि गेट स्थित श्री युगल विहार निंकुज मंदिर के बाहर बड़े प्रोजेक्टर लगाकर लोगों को मैच दिखाया जाएगा। शहर के बच्चों ने भी इस मैच को देखने के लिए टीम इंडिया को अभी से चियर करना शुरू कर दिया है।

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भारत का पलड़ा भारी, लेकिन नहीं बरतनी होगी ढील
भारतीय टीम के दाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज और शहर के रहने वाले दिनेश मोंगिया का कहना है कि भारत-पाक मैच हमेशा से ही हाई वोल्टेज वाला होता है। पिछले साल के टी-20 रिकॉर्ड को देखते हुए भारत का पलड़ा भारी हैं। हमारे पास बेहतर बल्लेबाज और गेंदबाज हैं। इसके बावजूद हमें इस मुकाबले में बिल्कुल भी ढील नहीं बरतनी होगी, क्योंकि टी-20 मुकाबला आखिरी गेंद पर भी पलट सकता है।

टीम इंडिया फेवरेट, बेहतरीन मुकाबला देखने को मिलेगा
शहर के रहने वाले आईपीएल और रणजी खिलाड़ी प्रशांत चोपड़ा ने कहा कि भारत-पाक मैच को देखने के लिए वह उत्सुक हैं। इस मुकाबले को देखने के लिए विश्व के सभी क्रिकेट प्रेमी इंतजार करते हैं। मौजूदा समय में भारत की टीम मैच जीतने की फेवरेट हैं। मुकाबला बेहतर होने वाला है।

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आंकड़ों में भारत-पाकिस्तान मैच
भारत और पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप में पांच बार भिड़ चुके हैं। भारत ने इन सभी मैचों में पाकिस्तान को हराया। ओवरऑल टी-20 में दोनों टीम आठ बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इसमें टीम इंडिया ने सात और पाकिस्तान ने एक मैच जीता है। सात में से एक मैच (2007) भारत ने टाई के बाद बॉल आउट में जीता था।

 
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महंगाई की मार: चंडीगढ़ में रोजाना 35 पैसे बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम, सरसों और रिफाइंड तेल भी आम आदमी की पहुंच से बाहर

त्योहारी सीजन में महंगाई की मार भारी पड़ रही है। पेट्रोल-डीजल के साथ आम जरूरत के सामानों के अलावा सर्राफा, कपड़ा बाजार, इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटो मोबाइल के क्षेत्र में भी महंगाई का असर देखा जा रहा है। खाद्य तेल, दालें और दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे हैं। फल और सब्जियों पर भी महंगाई की मार पड़ी है। महंगाई ने त्योहारी सीजन की रौनक फीकी कर दी है। लोग अपने बजट के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। लोग सबसे ज्यादा परेशान पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से हैं। शहर में पेट्रोल 103, डीजल 96, तो एलपीजी सिलेंडर 910 रुपये तक पहुंच गया है।

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एक सप्ताह में इस तरह बढ़े तेल के दाम
            दिनांक         पेट्रोल       डीजल
  • 19 अक्तूबर   101.87     94.29
  • 20 अक्तूबर   102.21     94.64
  • 21 अक्तूबर   102.54     94.99
  • 22 अक्तूबर   102.88     95.33
  • 23 अक्तूबर   103.21     95.68
  • 24 अक्तूबर .............................

खाने की थाली पर पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों का असर
डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दामों ने आम आदमी से लेकर मध्यम परिवारों के लोगों का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। टमाटर और प्याज के बढ़ते दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। बाजार में चने की दाल को छोड़ सभी दालों के रेट 100 रुपये से ऊपर चल रहे हैं। अरहर की दाल 115 रुपये किलो पर पहुंच गई है। उड़द की दाल 110 रुपये किलो है। छोले, राजमा, चावल, आटा, मैदा, बेसन, घी, तेल, वनस्पति रिफाइंड, सरसों का तेल आदि के दामों में भी तेजी का दौर जारी है।

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आवश्यक वस्तुओं के दैनिक खुदरा मूल्य
            वस्तु              दाम
  • चावल               35-40 रुपये
  • आटा (गेहूं)         25 (नॉन-ब्रांड)
  • चना दाल          75-80 रुपये
  • अरहर दाल        115 रुपये
  • उड़द दाल         110 रुपये
  • मूंग दाल        105 रुपये
  • मसूर दाल       102 रुपये
  • चीनी            43 रुपये
  • दूध             26 रुपये (500 एमएल ग्रीन)
  • सरसों तेल (पैक) 200 रुपये (मशाल तेल)
  • रिफाइंड         160 रुपये (910 एमएल)
  • साबुन नंबर-1   90 रुपये (पांच का सेट)
  • खुली चाय       65 रुपये (250 ग्राम नॉन-ब्रांड)
  • नमक पैक        22 रुपये
  • आलू              25-30 रुपये
  • प्याज            40-45 रुपये
  • टमाटर          70-80 रुपये

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ऑटो सेक्टर: जनवरी से अब तक 60 से 70 हजार रुपये महंगी हुई कारें
इस दिवाली ऑटो सेक्टर से जुड़े कारोबारियों ने उम्मीद जताई थी कि बंपर कारें बिकेंगी, लेकिन सेमी कंडक्टर की वैश्विक कमी और महंगाई ने उम्मीदों को फीका कर दिया। जनवरी से अब तक 60 से 70 हजार रुपये तक कारें महंगी हो चुकी हैं। इसका असर बिक्री पर भी पड़ा है। इसकी वजह से शहर में मध्यम श्रेणी की कारों की मांग बढ़ी है, जिनकी कीमत छह लाख से आठ लाख रुपये के बीच है। इनमें आई 20, निसान मैग्नाइट, किआ सोनेट, ब्रेजा, बलेनो, स्विफ्ट, मारुति सुजुकी अर्टिगा, हुंडई वेन्यू आदि की मांग ज्यादा है। बड़ी कारों में टोयोटा, महिंद्रा थार, हुंडई क्रेटा, मर्सिडीज की कारें शामिल हैं।

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इलेक्ट्रॉनिक सामान व कपड़ा व्यवसाय पर भी पड़ा असर
दिवाली रोशनी का त्योहार है। इस पर्व के नजदीक आते ही लोग इलेक्ट्रिक लाइटें व अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खरीदारी करते हैं, लेकिन इस बार महंगाई ने इनकी चमक भी फीकी कर दी है। फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक सामान पर महंगाई का असर देखने को मिल रहा है। बिजली की झालरों से लेकर सभी सजावटी सामानों के दाम बढ़ गए हैं। त्योहारी सीजन में कपड़ा बाजार में भी असर दिख रहा है। रेडीमेड गारमेंट्स के दाम बढ़ गए हैं। ब्रांडेड से लेकर सामान्य वेरायटी के कपड़ों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है।
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चंडीगढ़: डेंगू के मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या, सेक्टर-48 का अस्पताल खुलने के बाद भी जीएमसीएच-32 में नहीं घटी भीड़

चंडीगढ़ में डेंगू के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या को गंभीरता से लेते हुए यूटी प्रशासन ने कोविड आरक्षित सेक्टर-48 के अस्पताल को 18 अक्तूबर को खोल दिया था। लेकिन योजना के अनुसार इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने डेंगू के स्थिर मरीजों को सेक्टर-48 में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। जीएमसीएच-32 की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीज वहां जाने से इनकार कर रहे हैं। उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि वहां उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाएगा। नतीजतन इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर भर्ती मरीजों की संख्या कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है।

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सेक्टर-48 के अस्पताल में सिर्फ 28 मरीज
स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड और गैलरी फुल होने के बाद मरीजों को रैंप पर स्ट्रेचर लगाकर भर्ती किया जा रहा है, जबकि सेक्टर-48 के अस्पताल में 100 बेड पर मौजूदा समय में सिर्फ 28 मरीज शिफ्ट किए गए हैं। इस बारे में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सेक्टर-48 में गंभीर मरीजों के बजाय स्थिर मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे इमरजेंसी वाली स्थिति वहां उत्पन्न न हो, लेकिन स्थिर मरीज भी वहां जाने से मना कर रहे हैं।

नहीं तय हो पा रहा किसे शिफ्ट किया जाए
उन्हें स्ट्रेचर पर जीएमसीएच-32 में रहना मंजूर है। वहीं, दूसरी तरफ रेफरल सेंटर होने के कारण जीएमसीएच-32 में 90 प्रतिशत गंभीर मरीज हैं। इससे अस्पताल प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहा कि किन मरीजों को सेक्टर-48 अस्पताल में शिफ्ट किया जाए और किसे जीएमसीएच-32 में ही रहने दिया जाए।

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सेक्टर-48 के अस्पताल में 100 बेड संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन जीएमसीएच-32 में भर्ती मरीज वहां शिफ्ट नहीं होना चाह रहे, जबकि वहां 24 घंटे रोटेशन पर डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक, जीएमसीएच-32
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