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Tokyo Olympic 2021: पिता ने कहा था- गांव की बेटियों को विदेश कौन ले जाएगा, अब टोक्यो ओलंपिक में खेलेगी बेटी

हॉकी खेल से जो सम्मान मिला है उसे मैं लब्जों में बयान नहीं कर सकती। मैंने मेहनत की और आज मैं भारतीय टीम के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हूं।

23 जुलाई 2021

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Digital Edition

हरियाणा में कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: सरकार ने 28 फीसदी किया महंगाई भत्ता, एक जुलाई से लागू होगी बढ़ी दर

पैसा पैसा

राकेश टिकैत की हुंकार: 35 महीने चलेगा किसान आंदोलन, हरियाणा सरकार की सख्ती का भी इंतजार

दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार अपने हठ पर अड़ी हुई है इसलिए अभी किसानों का आंदोलन अगले 35 महीने और चलेगा। सरकार शर्तों के साथ बात करना चाहती है लेकिन किसान तीनों कानूनों को रद्द करवाने से कम नहीं मानेंगे। 

हरियाणा सरकार की सख्ती के सवाल पर टिकैत ने कहा कि किसान हरियाणा सरकार की सख्ती का इंतजार कर रहे हैं। किसान किसी भी कीमत पर डरने वाले नहीं हैं। बॉर्डर पर किसानों की संख्या कम होने के सवाल पर टिकैत ने कहा कि रणनीति के मुताबिक ऐसा किया जा रहा है यदि सरकार हमारी शक्ति देखनी चाहती है तो एक बार बताए। दोबारा दिल्ली में 5 लाख ट्रैक्टर पहुंच जाएंगे। 


गुरनाम चढ़ूनी के अलग होने के सवाल पर टिकैत ने कहा कि विचार अलग होने के चलते ऐसा किया गया है। किसान मोर्चा चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं है, लेकिन चढ़ूनी चुनाव लड़ना चाह रहे थे। वह भी जल्दी ही साथ आ जाएंगे और उनका विचार भी बदलेगा।

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा किसानों को मवाली बताने के सवाल पर कहा कि किसान महिलाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ लोगों द्वारा ऐसा करवाया जा रहा है। किसान अपने हक की लड़ाई के लिए लड़ता रहेगा।
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हरियाणा: भाजपा प्रदेश प्रधान ओपी धनखड़ को किसानों ने दिखाए काले झंडे, सड़क के बीचों बीच बैठे

हरियाणा में कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा-जजपा नेताओं के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। भाजपा के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को बादली में किसानों ने काले झंडे दिखाए। धनखड़ बादली में भाजपा मंडल कार्यकारिणी की मीटिंग को संबोधित करने पहुंचे थे। 

सूचना मिलते ही बैठक स्थल के बाहर ही किसान एकत्रित हो गए और काले झंडे दिखाकर धनखड़ का विरोध प्रकट किया। वहीं किसानों के बैठक स्थल के बाहर पहुंचने से पहले ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। डीएसपी राहुल देव और उपमंडल अधिकारी (नागरिक) विशाल कुमार पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। किसानों ने भाजपा सरकार के विरोध में नारेबाजी की और धनखड़ को काले झंडे दिखाए। किसान सड़क के बीचोंबीच बैठ गए और भाजपा के कार्यक्रम पर रोष प्रकट किया।
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विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को झटका: एफआईआर का आदेश रद्द करने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का इनकार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लोक इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष और लुधियाना से विधायक सिमरजीत सिंह बैंस को बड़ा झटका देते हुए लुधियाना की ट्रायल कोर्ट के उस फैसले पर मुहर लगा दी है जिसमें बैंस पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया था। याचिका दाखिल करते हुए बैंस ने बताया था कि पीड़िता ने उनके और उनके साथियों के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने मंजूर करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर का निर्देश जारी करते हुए स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। 

याची ने बताया था कि महिला बीते कई माह से उन पर दुष्कर्म के आरोप लगा रही है। आरोप यह है कि एक संपत्ति विवाद के चलते वह याची से मिली थी। याची ने अपने दफ्तर में बने एक कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसके बाद उस महिला ने 16 नवंबर 2020 को पुलिस कमिश्नर सहित अन्य अधिकारियों को इसके खिलाफ लिखित शिकायत दी थी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। 


हर स्तर पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने का महिला ने आरोप लगाया था। निचली अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीड़िता की याचिका को मंजूर करते हुए लुधियाना पुलिस को याची और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया था। याची ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बैंस की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ दी गई शिकायत एक संज्ञेय अपराध की है और ऐसे में इसकी जांच करना बेहद जरूरी है। एडिशनल सीजेएम द्वारा 7 जुलाई को जारी एफआईआर के आदेश में कोई खामी नही है। ऐसे में एफआईआर दर्ज करने के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता।
   
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पर्यावरण संरक्षण : हरित अंतिम संस्कार से हरियाणा और पंजाब बचा रहे हजारों पेड़, अब प्रोजेक्ट को देशव्यापी बनाने की तैयारी

विधायक सिमरजीत सिंह बैंस
हरियाणा और पंजाब में हरित अंतिम संस्कार के जरिए हर साल हजारों पेड़ बचाए जा रहे हैं। विशेष मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुनील गुलाटी और आपसी संस्था के डॉ. रामजी जैमल ने इसका बीड़ा उठाया है। संस्था ने दोनों राज्यों में लगभग साढ़े तीन सौ हरित शवदाह गृह बनाए हैं। इसमें एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार पर दो पेड़ बचते हैं।

इस प्रोजेक्ट को अब देशव्यापी बनाने की तैयारी है। संस्था व सेवानिवृत्त आईएएस ने इसी हफ्ते नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण व वन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें 76 हजार करोड़ रुपये के कैंपा फंड के जरिए हरित शवदाह गृह हर पंचायत में बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।


केंद्रीय मंत्री चौबे ने इसका अध्ययन करने के बाद उचित कदम उठाने का भरोसा दिया है। डॉ. रामजी जैमल ने हरित शवदाह गृह प्रोजेक्ट की शुआत कुछ साल पहले सिरसा जिले के दड़बी गांव से की थी। इनमें गोबर के डंडों और उपलों से शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसमें एक व्यक्ति का शव जलाने में केवल 60 किलोग्राम गोबर के डंडे ही प्रयोग होते हैं। साथ ही अगर दूसरा शव भी जलाना है तो भट्ठी के गरम होने के कारण उसमें गोबर के 30 किलोग्राम डंडों का ही इस्तेमाल होता है।

डॉ. सुनील गुलाटी ने बताया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में हरित शवदाह गृह बनाने में केवल तीन लाख रुपये खर्च आता है, जिसमें तीन साल की गारंटी भी है। गोबर से डंडे व उपले बनाने की डी-वाटरिंग मशीन ढाई लाख रुपये तक स्थापित हो रही है। इससे अगरबत्ती व गमले भी बना सकते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री को भी इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। चूंकि, हरियाणा में कैंपा फंड में 950 करोड़ रुपये हैं। इस फंड से पौधरोपण तो बड़े पैमाने पर हो नहीं रहा, हरित शवदाह गृह बनाकर पेड़ों को बचाया जा सकता है।    

पर्यावरण में मीथेन कम होगी, गंगा भी दूषित होने से बचेगी
डॉ. गुलाटी ने बताया कि हरित दाह संस्कार से पर्यावरण संरक्षित होगा। लकड़ी के बजाय गोबर के डंडों से शव जलाने पर अस्थियों में राख कम होगी, साथ ही मीथेन भी वातावरण में घटेगी। वायु प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। लकड़ी से जलाए शव की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने से जल प्रदूषण होता है, उससे बचाव होगा। केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट में इसका विस्तृत अध्ययन है। उन्होंने बताया कि अगस्त महीने में इस प्रोजेक्ट पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस भी करने जा रहे हैं।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट में दिए गए तर्क
  •  देश में 70 फीसदी शवों का अंतिम संस्कार लकड़ी से होता है
  • देश में 28 वृक्ष प्रति व्यक्ति हैं, जबकि अमेरिका में 716
  • देश में सालाना 90 लाख मृत्यु औसतन
  • 70 लाख शव जलाए जाते हैं, जिसमें 1.40 करोड़ पेड़ लगते हैं
  • हरित दाह संस्कार प्रोजेक्ट लागू होने पर ये पेड़ बचाए जा सकते हैं
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Tokyo Olympic 2021: संघर्ष की आग में तप कर भिवानी के मुक्केबाजों ने पाई ओलंपिक की राह, निश्चय-इस बार नहीं चूकेंगे

टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भिवानी के तीनों मुक्केबाजों के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। खेल के प्रति जुनून और लगातार संघर्ष की बदौलत इन खिलाड़ियों ने गांव की पगडंडियों से टोक्यो की उड़ान भरी है। कोच संजय श्योराण ने कहा कि जिले के सभी बॉक्सर हालातों से लड़कर यहां तक पहुंचे हैं। किसी की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि उसके पास दस्ताने खरीदने के पैसे भी नहीं होते थे तो किसी को परिवार से ही सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद ये पीछे नहीं हटे और अपने लक्ष्य को साधे रहे। यही इन सबकी ताकत भी है। सभी बॉक्सरों में जीत के लिए भूख है और यही भूख उन्हें मेडल भी दिलाएगी।

लगातार अभ्यास से बीमारी पर पाई जीत, अब पहुंचे ओलंपिक
69 किलोभार वर्ग के बॉक्सर विकास कृष्णन यादव ने महज नौ वर्ष की आयु में मुक्केबाजी शुरू की थी। विकास की माता दर्शना देवी ने बताया कि विकास को बचपन में जुकाम जैसी मौसमी बीमारियां जल्द पकड़ लेती थीं। ऐसे में उन्होंने विकास को अच्छे स्वास्थ्य के उद्देश्य से बैडमिंटन खिलाना शुरू किया था। लेकिन धीरे-धीरे विकास का रुझान मुक्केबाजी की ओर होने लग गया। फिर उसने बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बना लिया। विकास के कोच विष्णु भगवान ने बताया कि विकास दुनिया के छठे नंबर के बॉक्सर हैं।


रिंग में उतरने से पहले सामाजिक बंधन तोड़ने पड़े
75 किलो भार वर्ग की बॉक्सर पूजा बोहरा के कोच संजय श्योराण ने बताया कि पूजा आदर्श महिला महाविद्यालय में पढ़ती थीं। उनकी पत्नी मुकेश रानी कॉलेज में लेक्चरर थी। उसी दौरान उसका पूजा से संपर्क हुआ और उसकी प्रेरणा से पूजा ने बॉक्सिंग शुरू कर दी। शुरुआत में परिजनों का सहयोग न होने के कारण पूजा को काफी दिक्कतें आई। इसी कारण पूजा बीच-बीच में मुकेश रानी के पास भी रहती थी। 2014 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद परिजनों ने पूजा का साथ देना शुरू कर दिया और आज वे ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्हें विश्वास है कि पूजा बोहरा गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम रोशन करेंगी।

मनीष के पास न गलव्ज थे और न था अच्छी खुराक
मनीष कौशिक ने वर्ष 2008 में बॉक्सिंग शुरू की थी। उन दिनों परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बॉक्सिंग के अभ्यास के हिसाब से डाइट नहीं मिल पाती थी। अभ्यास के लिए बॉक्सिंग गलव्ज और अन्य उपयोगी साधन भी नहीं थे। मनीष ऑटो का किराया बचाने के लिए देवसर से भिवानी साइकिल पर आते थे। साईं हॉस्टल में चयन होने के बाद उन्हें पर्याप्त डाइट मिलनी शुरू हुई। अभ्यास न छूट जाए इसलिए होली और दिवाली जैसे त्यौहार पर भी मनीष घर नहीं आते थे। परिजनों और मनीष का ओलंपिक में गोल्ड मेडल का सपना है, जिसको साकार करने के लिए उन्होंने अपने जीवन को उसी अनुसार ढाल लिया है।
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हरियाणा: पहले दिन 6 से 8वीं तक के 45 प्रतिशत विद्यार्थी पहुंचे स्कूल, जींद में सबसे अधिक रही हाजिरी

हरियाणा में बेशक इस समय कोरोना के केस कम आ रहे हैं लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों में अभी इसका भय बना हुआ है। इसी कारण छठी से आठवीं कक्षा तक स्कूल खोलने के पहले दिन शुक्रवार को प्रदेश में मात्र 45 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूलों में पहुंचे, जबकि 55 प्रतिशत विद्यार्थी गैर हाजिर रहे। सबसे अधिक जींद में 71 प्रतिशत और महेंद्रगढ़ में 68 और रेवाड़ी 64 प्रतिशत बच्चों की हाजिरी रही, जबकि सबसे कम नूंह 12, पलवल जिले में मात्र 23 प्रतिशत बच्चे ही स्कूल पहुंचे।

बता दें कि प्रदेश में 6 से 8वीं तक के 5784 स्कूल हैं। इनमें कुल विद्यार्थियों की संख्या 6,09,473 है। कोविड नियमों को देखते हुए सरकार की तरफ से 50 प्रतिशत मतलब आधी संख्या 3,04,737 विद्यार्थियों को स्कूल में आने के लिए अनुमति दी थी। लेकिन मात्र 1,38,359 विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। निर्धारित संख्या के हिसाब से यह 55 प्रतिशत कम है। 

गौरतलब है कि सरकार ने कोविड नियमों के तहत ही स्कूल खोले हैं और स्कूल में बच्चे के लिए आने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। दूसरी ओर, 16 जुलाई से खोले गए 9 से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों की हाजिरी 53 प्रतिशत रही। प्रदेश के 3365 स्कूलों में कुल विद्यार्थियों की संख्या 745111 है, आधी संख्या के हिसाब से 372556 को आने की अनुमति है। लेकिन शुक्रवार को 195600 विद्यार्थी ही स्कूलों में पहुंचे।
 
 जिला   उपस्थिति प्रतिशत
 अंबाला  5222 48
भिवानी  6687 48
चरखी दादरी 2888  56
फरीदाबाद 4122 27 
फतेहाबाद 6624 42
गुरुग्राम 6260 35
हिसार  12247  61
झज्जर 4400  58
जींद 11279 71
कैथल  10114 65
करनाल 8479   47
कुरक्षेत्र  6715  59
महेंद्रगढ़ 5493  68
नूंह 3240 12
पलवल 3466 23
पंचकूला 3800 42
पानीपत 6223 46
  रेवाड़ी   5345  64
रोहतक 4814  58
सिरसा 9431  50
सोनीपत 6154 41
यमुनानगर 5347 41
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सिद्धू के मंच से जाखड़ के बोल: मंत्री-विधायकों के नाराज होने की परंपरा बनी, पूछा- क्या ये कांग्रेस के फूफा हैं

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी के जरिए यह बताने की कोशिश की जा रही है कि कांग्रेस में सब कुछ बेहतर है। इसी का नतीजा है कि सिद्धू से नाराज कैप्टन अमरिंदर सिंह कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में पहुंचे। इसके बाद राहुल गांधी ने बयान जारी कर कहा कि पंजाब संकट हल हो चुका है। लेकिन पार्टी के नेताओं के बयान इन दावों पर समय-समय पर सवाल खड़े कर देते हैं। पार्टी में नेताओं के नाराज होने वाली परंपरा को लेकर पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ काफी खफा है। 

शुक्रवार को सिद्धू की ताजपोशी के दौरान सुनील जाखड़ का पारा चढ़ा हुआ दिखाई दिया। उन्होंने पार्टी के नाराज मंत्रियों और विधायकों पर जमकर निशाना साधा। जाखड़ नवजोत सिद्धू को खरी-खरी सुनाने से भी नहीं चूके। अपने भाषण के दौरान जाखड़ ने कहा कि मैंने यू हीं हांडी नहीं छोड़ी। मैं दोस्ती भी खुलकर निभाता हूं और दुश्मनी भी। 

उन्होंने कहा कि कैप्टन के साथ 20 साल काम किया है और उनसे मेरा रिश्ता बहुत गहरा है। कैप्टन मेरे और मैं उनके काम से बहुत प्रभावित हूं। जाखड़ ने नाराज मंत्रियों-विधायकों को भी निशाने पर लेते हुए मंच से उनके नाम लेकर कहा कि रंधावा जी, चन्नी जी और लाल जी मेरी बात ध्यान से सुनें लेकिन बुरा न मानें। 

कांग्रेस की रिवायत बन गई है कि मंत्री-विधायक नाराज होते हैं तो उन्हें मनाने जाना पड़ता है लेकिन वे फिर नाराज हो जाते हैं। जाखड़ ने सवाल किया कि क्या ये कांग्रेस के फूफा हैं, जिन्हें बार-बार मनाया जाए? सिद्धू को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा- सिद्धू मेरी बात ध्यान से सुनें। हाईकमान ने आपको यह जिम्मेदारी सोच-समझकर दी है। इस ओहदे पर पूरी ईमानदारी से काम करना।

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Tokyo Olympic 2021: टोक्यो ओलंपिक ओपनिंग सेरेमनी में मनप्रीत को देख भावुक मां बोली-बेटे पर गर्व

टोक्यो ओलंपिक सेरेमनी में हॉकी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह और मुक्केबाज मैरीकॉम ने भारतीय दल का नेतृत्व किया। लाइव सेरेमनी को ट्राइसिटी से ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के अभिभावकों, कोच और प्रशंसकों ने उत्साह के साथ देखा और शुभकामनाएं दीं। हाथ में तिरंगा उठाए मनप्रीत सिंह को देखने के लिए उनकी मां और परिजन बेहद उत्साहित दिखे। 

इससे बड़ा दृश्य और कोई नहीं हो सकता
मनप्रीत सिंह जालंधर के गांव मिट्ठापुर के रहने वाले हैं। वह टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने ओलंपिक सेरेमनी में भारतीय दल की अगुवाई की। गांव में लाइव सेरेमनी को जब मनप्रीत सिंह की मां मंजीत कौर ने टीवी स्क्रीन पर जब देखा तो उनकी आंखें भर आईं और टीवी स्क्रीन की ओर इशारा करते कहा.. ओ देख मेरा मुंडा आ गया। मंजीत कौर ने बताया कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है। ऐसा दृश्य और कोई नहीं हो सकता, यह पल मेरे लिए यादगारी लम्हे की तरह रहेगा। ताउम्र इस दृश्य को नहीं भूलूंगी। 


परिवार को अंजुम पर भरोसा
टोक्यो ओलंपिक में भारतीय निशानेबाज टीम की खिलाड़ी अंजुम मोदगिल की मां शुभ और पिता सुदर्शन मोदगिल का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर भरोसा है। वह देश के लिए पदक जरूर जीतेगी। टोक्यो ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी को मोदगिल परिवार ने अपने निवास सेक्टर-37 में लाइव देखा।

पदक के प्रबल दावेदार हैं चोपड़ा
जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने ताऊ देवी लाल स्टेडियम में जैवलीन थ्रो की शुरुआत की थी। तत्कालीन कोच नसीम अहमद ने कहा कि नीरज ओलंपिक में जैवलीन थ्रो में मेडल जीतने के प्रबल दावेदारों में से एक है। नसीम अहमद ने टोक्यो ओलंपिक की लाइव सेरेमनी को लाइव देखा और अपनी शुभकामनाएं दीं।

टीम इंडिया का हौसला बढ़ाया
ओलंपिक सेरेमनी में टीम इंडिया के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने में शहर के युवा और खिलाड़ी भी पीछे नहीं रहे। युवाओं ने हाथ में तिरंगा लेकर बड़ी स्क्रीन पर लाइव देखा और उम्मीद जताई कि उनके खिलाड़ी पदक लेकर देश का नाम रोशन करेंगे।
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