CourageInKargil पांच दुश्मनों को मार शहीद हुए थे कैप्टन विक्रम बत्रा, पिता ने सुनाई बहादुरी की कहानी

कविता बिश्नोई, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 25 Jul 2020 11:39 PM IST
कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
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वर्ष 1999, कारगिल में सेना दुश्मन के सामने थी। तब देश के जांबाज सैनिकों ने मोर्चा संभाला। जोश इतना था कि दुश्मन को मैदान छोड़ना पड़ा। यह शौर्य गाथा बचपन से ही बच्चों को पढ़ाई जाए तो देश के प्रति उनमें प्रेम पैदा होगा। एनसीईआरटी की किताबों में कारगिल हीरो का जिक्र सचित्र होना चाहिए।
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कारगिल युद्ध के हीरो रहे कैप्टन विक्रम बत्रा के पिता जीएल बत्रा ने अमर उजाला से अपने दिल की बात कही। जीएल बत्रा ने बताया कि विक्रम ने युद्ध में अंतिम समय में पांच दुश्मनों से लोहा लिया और उन्हें मार गिराया। अंत में अपने देश के लिए शहीद हो गए। इस बहादुरी के लिए सरकार ने विक्रम को परमवीर चक्र से सम्मानित किया। अपने बेटे की बहादुरी को याद करते हुए जीएल बत्रा भावुक हो गए।



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जीएल बत्रा ने बताया कि आज इन कारगिल हीरोज को एक आदर्श के रूप में सामने लाना होगा। एनसीईआरटी की किताबों में कारगिल युद्ध के साथ ही उसके नायकों के बारे में बताना होगा। ताकि बचपन से बच्चों में वही जोश व जज्बा पैदा हो सके। जीएल बत्रा ने कहा कि कारगिल युद्ध का विस्तृत वर्णन सेकेंडरी क्लास की सामाजिक विज्ञान की किताबों में पढ़ाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही पेज के साइड कॉलम में शहीदों का स्केच देकर उनके जीवन के बारे में संक्षेप जानकारी दें। जीएल बत्रा ने बताया कि विक्रम के नाना फौज में थे। इसके अलावा मेरे घर में भी बुजुर्ग आर्मी में सेवाएं दे चुके थे, इसलिए बिक्रम के दिमाग में बचपन से ही देश-प्रेम की भावना थी।

जब छात्रा को बचाने कूद गए चलती बस से
जीएल बत्रा ने विक्रम के स्कूल के दिनों को याद करते हुए बताया कि विक्रम 10वीं कक्षा में था। एक बार स्कूल बस में ज्यादा विद्यार्थी होने के कारण एक छात्रा नीचे गिर गई। छात्रा को बचाने के लिए विक्रम ने चलती बस से छलांग लगा दी। इस दौरान उसको कुछ खरोंच भी आ गई। छात्रा को गंभीर हालत में विक्रम ही हॉस्पिटल तक लेकर गया। वह बचपन से ही साहसी था।

डीएवी कॉलेज में शौर्य भवन
कैप्टन विक्रम बत्रा ने डीएवी कॉलेज-10 से बीएससी की पढ़ाई की। विक्रम को बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद था। विक्रम और उनके जुड़वां भाई दोनों एक ही क्लास में थे। विक्रम ने 1995 में डीएवी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पीयू से अंग्रेजी में एमए की। डीएवी कॉलेज में विक्रम बत्रा के अलावा महावीर चक्र विजेता मेजर संदीप सागर, सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू और वीर चक्र विजेता मेजर विजयंत थापर ने भी शिक्षा पाई थी। कॉलेज ने इन्हीं वीरों के सम्मान में डीएवी एडमिन ब्लॉक का नाम शौर्य भवन रखा गया है।
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