पलटवार: कैप्टन ने रावत के बयान का दिया जवाब, कहा- सारी दुनिया ने मेरा अपमान देखा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 01 Oct 2021 04:49 PM IST

सार

हरीश रावत ने कहा था कि इन रिपोर्टों में कोई सच्चाई नहीं है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह का पंजाब कांग्रेस द्वारा अपमान किया गया था। कांग्रेस पार्टी ने अब तक जो कुछ किया है वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के सम्मान के लिए और 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए किया है।  
कैप्टन अमरिंदर सिंह।
कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : ANI
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विस्तार

पंजाब कांग्रेस मामलों के प्रभारी हरीश रावत के बयान पर कड़ी आपत्ति जताकर उनके बयान को सिरे खारिज करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस ने साढ़े चार साल तक जीत की होड़ में रहने के बाद पंजाब में खुद को दयनीय स्थिति की ओर अग्रसर कर लिया है और वर्तमान में बैकफुट पर है।
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कैप्टन ने कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने से तीन हफ्ते पहले मैंने सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा देने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने मुझे पद पर बने रहने के लिए कहा था। उन पर वफादारी का दबाव था, इसके बावजूद सीएलपी (कांग्रेस विधायक दल) की बैठक से कुछ घंटे पहले जिस अपमानजनक तरीके से उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया, वह रिकॉर्ड सार्वजनिक है।


उन्होंने कहा कि दुनिया ने उनके अपमान और अनादर को देखा है फिर भी रावत इसके विपरीत दावे कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर यह अपमान नहीं था तो क्या था? रावत को चाहिए कि वह खुद को मेरी (कैप्टन) जगह रखकर देखें, तब शायद, उन्हें एहसास होगा कि यह पूरा मामला कितना अपमानजनक था। 


पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि रावत ने खुद उनसे मिलने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह 2017 के चुनावी वादों पर कैप्टन सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड से संतुष्ट हैं। कैप्टन ने कहा कि वास्तव में पंजाब के कांग्रेस प्रभारी ने हाल ही में एक सितंबर को स्पष्ट रूप से कहा था कि 2022 का चुनाव उनके (कैप्टन) नेतृत्व में लड़ा जाएगा और आलाकमान का उन्हें बदलने का कोई इरादा नहीं है।

कैप्टन ने पूछा कि अब वह कैसे दावा कर सकते हैं कि पार्टी नेतृत्व मुझसे असंतुष्ट था, और अगर वे थे तो उन्होंने जानबूझकर उन्हें इस समय तक अंधेरे में क्यों रखा? कैप्टन ने कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं है कि रावत जैसे वरिष्ठ और अनुभवी कांग्रेस नेता उनकी धर्मनिरपेक्ष साख पर सवाल उठा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि पार्टी में अब उनका भरोसा और सम्मान नहीं रहा, जबकि उन्होंने इतने वर्षों तक निष्ठापूर्वक सेवा की है।

कैप्टन ने रावत की टिप्पणी पर उठाए सवाल
कैप्टन ने रावत की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह (कैप्टन) दबाव में हैं, इस पर पिछले कुछ माह से उन पर केवल कांग्रेस के प्रति वफादारी का दबाव था, इस कारण उन्होंने एक अपमान के बाद दूसरा अपमान सहना जारी रखा। कैप्टन ने सवाल किया कि अगर पार्टी का इरादा उन्हें अपमानित करने का नहीं था तो नवजोत सिंह सिद्धू को महीनों तक सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर उनकी खुलेआम आलोचना करने और हमला करने की अनुमति क्यों दी गई? पार्टी ने सिद्धू के नेतृत्व में विद्रोहियों को उनके अधिकार को कम करने की खुली छूट क्यों दी?




सिद्धू के आगे कांग्रेस हाईकमान कमजोर क्यों?
कैप्टन ने पूछा कि क्यों कांग्रेस सिद्धू को अब भी पार्टी को ब्लैकमेल करने देने और अपनी शर्तों पर चलाने की इजाजत दे रही है? उन्होंने कहा कि वह (सिद्धू) पार्टी नेतृत्व पर क्या दबाव डालते हैं कि हाईकमान उनके खिलाफ निराश्रय हो चुका है और उन्हें पंजाब में कांग्रेस के भविष्य की कीमत पर भी अपना रास्ता बनाने की अनुमति दे रहा है।

रावत के अन्य आरोपों का भी किया खंडन
रावत का फोन न उठाने के आरोप पर कैप्टन ने कहा कि ‘यह सब बकवास है। हमने सीएलपी की बैठक बुलाए जाने से ठीक एक दिन पहले बात की थी। रावत ने तब मुझे बताया कि कोई खास बात नहीं है और यहां तक दावा किया कि उन्होंने 43 विधायकों द्वारा भेजा गया कोई पत्र नहीं देखा है लेकिन जिस तरह से वह अब इस बारे में झूठ बोल रहे हैं, उससे मैं स्तब्ध हूं।’

कैप्टन ने कहा कि दो बार सीएम और तीन मौकों पर पीपीसीसी प्रमुख के रूप में उन्होंने पंजाब के कांग्रेस प्रभारी प्रणब मुखर्जी, मोती लाल वोहरा, मोहसिना किदवई, मीरा कुमार और शकील अहमद जैसे दिग्गजों के साथ काम किया है। कैप्टन ने कहा कि उन्हें उनमें से किसी के साथ भी कोई समस्या नहीं थी। वह रावत के व्यवहार और कार्यों को समझने में विफल रहे।

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