सरकार की लाइसेंस प्रणाली में भी सेंध लगा गए रियल लाइफ के 'बंटी और बबली', समेट ले गए करोड़ों

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 05 May 2019 02:06 PM IST
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सरकार की लाइसेंस प्रणाली में सेंध लगाई। सरकारी नियमों व कायदे कानून की धज्जियां उड़ाईं और करोड़ों रुपये हड़पकर फरार हो गए 'बंटी और बबली'। मामला पंजाब के जालंधर का है। सरकार से लाइसेंस लेकर भी स्टडी एक्सप्रेस कंपनी लोगों का करोड़ों रुपये समेटकर खिसक गई। कंपनी का मालिक कपिल शर्मा व उसकी पत्नी अनिता शर्मा फरार हो गए। कपिल मुंबई से खाली हाथ आया था और उसने जालंधर में महंगी व लग्जरी गाड़ियों में घूमकर प्रभाव पैदा कर रखा था। अब सरकार व पुलिस हाथ मलती रह गई है और लकीर पीट रही है।
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कपिल शर्मा करीब सात पहले पंजाब आया था, तब यहां पर उसने दो बड़े विदेशी एजुकेशन सेंटरों के साथ काम किया और फिर अपना कार्यालय द स्टडी एक्सप्रेस नाम से खोला। कपिल शर्मा जहां महंगी कारों को लेकर अपना शौक पूरा करता था, वहीं वह महंगे होटलों के अलावा कपड़े पहनने का पूरा शौक रखता था। उसने अपना काम चलाने के लिए काफी पैसा विज्ञापनों पर खर्च किया। इमिग्रेशन कंपनी ‘स्टडी एक्सप्रेस’ के मालिक कपिल शर्मा और उसकी पत्नी अनीता लोगों के करोड़ों रुपये लेकर दफ्तर और अपने घर को ताला मारकर फरार हो गए हैं।


सुरजीत सिंह, वासी लांबड़ा ने बताया कि उसने कनाडा जाने के लिए 13 लाख रुपये कपिल शर्मा को दिए थे। जब उसकी वीजा फाइल रिजेक्ट हो गई तो अनीता शर्मा ने फीस रिफंड के एवज में चेक दे दिए। इसी तरह रमनप्रीत कौर ने भी कनाडा जाने के लिए 10 लाख रुपये दिए थे और वीजा रिजेक्ट होने के बाद उसे भी अनीता शर्मा ने चेक दे दिए। जब उन्होंने चेक अपने खातों में लगाने चाहे तो बैंक ने चेक पर स्टॉप पेमेंट का हवाला देकर उन्हें चेक वापस कर दिए।

शाहकोट में तैनात एएसआई सुखविंद्र कुमार ने 13 लाख 50 हजार 250 रुपये में उनके बेटे शुभम को कनाडा में स्टडी बेस पर भेजने की डील कपिल की पत्नी अनीता से की थी, जिसकी शिकायत भी पुलिस को दी गई और केस दर्ज हो गया।

ये है मामला

ट्रेवल एजेंटों द्वारा युवाओं को जाल में फंसाने व ठगी की दुकानों को रोकने के लिए पंजाब सरकार ने 2013 में ट्रेवल प्रोफेशनल रेगुलेशन एक्ट पास किया। जिसमें अनिवार्य कर दिया गया था कि अगर एयर टिकट से लेकर स्टडी वीजा तक किसी को विदेश भेजना है तो उसके लिए लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए सरकार की तरफ से सख्त नियम बनाए गए थे। इसके तहत किरायानामा, मालिकों का पूरा लेखा जोखा, पुलिस की वेरिफिकेशन घर व दफ्तर के अलावा कई तामझाम व शर्तें थीं।

सरकार की तरफ से यह एक्ट इसलिए लाया गया था, ताकि कोई एजेंट जालसाजी कर न सकें। इतना ही नहीं विज्ञापन देने के लिए भी लाइसेंस नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया गया था। 2013 से लेकर 2018 तक धंधा बेखौफ चलता रहा, हालात ये थे कि जालंधर में दो हजार एजेंटों में से करीब 200 लोगों ने ही लाइसेंस ले रखे थे, बाकी सब कार्यालय दो नंबर में नियम तोड़कर चलाए जाते रहे। 2018 में गृह सचिव निर्मलजीत सिंह कलसी ने इसे गंभीरता से लेकर आदेश जारी किए।

जालंधर में ही एक दिन में 12 नामी स्टडी कंपनियों पर शिकंजा कसकर उनको जेल में भेजा गया, क्योंकि उनके पास लाइसेंस नहीं था। 2019 मार्च तक 850 विदेशी ट्रेवल एजुकेशन एजेंटों ने लाइसेंस ले लिए और धंधा बुलंदियों पर पहुंच गया, लेकिन सरकार की इस नियमों व लाइसेंस की प्रक्रिया को भी एजेंटों भेदना शुरू कर दिया है। स्टडी एक्सप्रेस के मालिक कपिल शर्मा ने भी लाइसेंस लिया था, लेकिन रातोंरात वह सारा पैसा और सामान समेटकर निकल गया। लोगों का कहना है कि उन्होंने तो सरकार के अधिकृत एजेंट को पैसा दिया था, लेकिन फिर भी उनके साथ लूट हो गई।

हमारी पुलिस चौकस, कसा जाएगा शिकंजा
डीसीपी गुरमीत सिंह का कहना है कि पुलिस काफी चौकस है और स्क्रीनिंग की जाएगी। एजेंटों पर शिकंजा कसा जाएगा। एजेंट लाइसेंस लेकर ठगी कैसे कर गया इसकी उच्च स्तरीय जांच भी होगी।
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