Hindi News ›   Chandigarh ›   History created in Puta election, first time Dr. Mrityunjaya selected president, Amarjit Singh Naura secretary

पुटा चुनाव में रचा इतिहास... पहली बार नॉन टीचिंग के डॉ. मृत्युंजय अध्यक्ष और नौरा बने सचिव

अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 10 Oct 2020 09:54 AM IST
पुटा चुनाव में जीते प्रत्याशी
पुटा चुनाव में जीते प्रत्याशी - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिए गए। इस बार इतिहास रचते हुए शिक्षकों ने नॉन टीचिंग से आए डॉ. मृत्युंजय कुमार को अध्यक्ष चुना। वहीं इसी ग्रुप से अमरजीत सिंह नौरा सचिव बने। वहीं दूसरी ओर खालिद-सिद्धू ग्रुप ने भी चुनाव खूब लड़ा, लेकिन उन्हें कामयाबी हाथ नहीं लगी। मृत्युंजय ग्रुप की पूरी टीम विजयी घोषित हुई।
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दूसरे दिन का चुनाव शुक्रवार की सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक हुआ। इस दौरान यूआईईटी, केमिकल इंजीनियरिंग व यूआईएचटीएम विभाग के शिक्षकों ने वोट डाले। कुल 627 वोटों में से दोनों दिन 521 वोट पड़े। मतगणना दोपहर बाद शुरू हुई। लगभग दो घंटे चली मतगणना के बाद रुझान आना शुरू हो गया। मृत्युंजय ग्रुप को पता चलता गया कि अधिकांश लोग चुनाव जीत रहे हैं। वह खुशी भी मनाने लगे थे, लेकिन अध्यक्ष व सचिव पद को लेकर वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।


शाम 4 बजे के बाद परिणामों की घोषणा हुई। इसमें डॉ. मृत्युंजय कुमार को 276 वोट मिले। वहीं प्रो. मोहम्मद खालिद को 235 वोट मिले। दोनों के मध्य 41 वोटों का अंतर रहा। वहीं सचिव बने प्रो. अमरजीत सिंह नौरा को 274 वोट मिले। वहीं प्रो. एमसी सिद्धू को 240 वोट मिले। उपाध्यक्ष बनीं सुपिंदर कौर को 268 वोट मिले और अमित चौहान को 242 वोट मिले। सुपिंदर कौर ने 26 वोटों से जीत दर्ज की।

इसी तरह उपसचिव सर्वनरिंदर कौर को 288 व अनुपम बहरी को 214 वोट मिले। कोषाध्यक्ष नीतिन अरोड़ा को 306 और समरजीत सिहोत्रा को 194 वोट मिले। मृत्युंजय ग्रुप की पूरी टीम के विजयी होने पर पुटा जिंदाबाद के नारे लगे। कहा गया कि यह शिक्षकों की जीत है। उसके बाद जनरल बॉडी की बैठक हुई और इसमें खुशी जताते हुए आगे भी शिक्षकों के हित में बेहतर कार्य करने की प्रतिज्ञा ली गई।

कौन क्या बने

पद नाम कितने मिले वोट
अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार 276
उपाध्यक्ष सुपिंदर कौर 268
सचिव अमरजीत सिंह नौरा 274
उपसचिव सर्वनरिंदर कौर 288
कोषाध्यक्ष नीतिन अरोड़ा 306

ग्रुप एक
नाम वोटों की संख्या
राजेश गिल 339
नीलम पॉल 230
सुमन सुमी 336
जसबीर सिंह 267

ग्रुप दो
नवनीत कौर 281
गुलदीप सिंह 295
संतोष उपाध्याय 228
विजयेता चड्ढा 256

ग्रुप तीन
अमृतपाल कौर 278
अनिल कुमार 296
जेके गोस्वामी 353
नीरज अग्रवाल 238

ग्रुप चार
केशव मल्होत्रा निर्विरोध
कुल वोट : 627
वोट पड़े : 521
 

मृत्युंजय-नौरा ग्रुप की जीत के ये बने कारण

 -इस ग्रुप का नाम भले ही मृत्युंजय-नौरा ग्रुप रहा है, लेकिन पूरे चुनाव का गणित प्रो. केशव मल्होत्रा, प्रो. राजेश गिल, प्रो. जेके गोस्वामी लगा रहे थे। यह चुनावी चाणक्य सिद्ध हुए और शिक्षकों के वोट अपने पाले में किए।
- चुनाव से पहले सीनेट के चुनाव निरस्त करना भी शिक्षकों को एकजुट कर गया और अधिकांश वोट मृत्युंजय ग्रुप के पास आ गए।

- यूआईईटी विभाग में सर्वाधिक 91 वोट थे। यहां से सचिव प्रो. जेके गोस्वामी आते हैं। वह खुद भी कार्यकारी सदस्य का चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन उनका विभाग है इसलिए उन्होंने सर्वाधिक वोट अपने पाले में की। वह डीन भी हैं और विभागाध्यक्ष भी बनने जा रहे हैं।
- भाजपा के पास लगभग 50 वोट थे, लेकिन यह वोट दो हिस्सों में बंट गए। भाजपा के कई शिक्षकों ने मृत्युंजय ग्रुप का साथ दिया। क्योंकि उनके व्हाट्सग्रुप के स्टेट्स पर मृत्युंजय ग्रुप के लोगों को जिताने की अपील थी।

- प्रो. खालिद-सिद्धू ग्रुप की ओर से कुछ पत्र ऐसे जारी हुए थे जिनका समर्थन कुछ शिक्षकों ने नहीं किया।
- सिंडिकेट व सीनेट के सदस्यों ने भी इस ग्रुप का पूरा साथ दिया। यूआईईटी के वोटों को इस पाले में लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- मृत्युंजय ग्रुप ने वोट शिक्षकों के पास जाकर मांगे थे। इसका विरोध हुआ था लेकिन शिक्षकों ने उनको याद रखा कि वोट मांगने आए थे। कोरोना के कारण खालिद ग्रुप ने फोन के जरिए वोट मांगे थे।
 

खालिद-सिद्दू ग्रुप बोला- सीनेट के चुनाव हों प्रभावित, इसलिए परिणाम कुछ बदले

खालिद-सिद्दू ग्रुप का कहना है कि प्रो. एमसी सिद्धू सीनेट का चुनाव लड़ने जा रहे थे। साथ ही प्रो. प्रोमिला पाठक भी चुनाव लड़ रही थीं। सीनेट चुनाव में उनका प्रदर्शन बेहतर न रहे, इसलिए पुटा चुनाव में ऐसा किया गया। उनका कहना है कि शिक्षक समझेंगे कि जो पुटा चुनाव नहीं जीत पाए वह सीनेट का चुनाव कैसे जीत सकेंगे। उनके साथ सिंडिकेट व सीनेट के सदस्य जुड़े हुए थे जो वर्षों से पीयू पर राज कर रहे हैं।

सभी शिक्षकों का आभार जिन्होंने हमें अच्छे मतों से विजयी बनाया। हम तीन साल से शिक्षकों की लगातार सेवा करते आ रहे थे। उसी का परिणाम आज हमारे सामने है। शिक्षकों ने जिस उम्मीद से हम पर भरोसा किया है हम भी उसी उम्मीद के साथ उनका कार्य करेंगे। सातवां वेतनमान, पदोन्नित, पास्ट सर्विस काउंट आदि मुद्दों को हल करवाएंगे।
- डॉ. मृत्युंजय कुमार, अध्यक्ष

पीयू को जैसी लीडरशिप चाहिए थी, वह मिल गई। एक लेक्चरर के लिए जो व्यक्ति संघर्ष कर रहा है वह जीता और प्रोफेसर हारा। सिंडिकेट व सीनेट से पुटा सीधी जुड़ी है। ऐसे में इन दोनों सदनों के लोगों ने चुनाव जिताया। हमने बहुत कम समय में नए चेहरे मैदान में उतारे और अच्छा मुकाबला किया। जिन लोगों ने हमें वोट किया उनका आभार। हम शिक्षकों के साथ हमेशा खड़े रहेंगे।
- प्रो. मोहम्मद खालिद, अध्यक्ष पद उम्मीदवार
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