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लोकसभा चुनाव 2019: होशियारपुर क्षेत्र दोआबा में बेहद अहम, दो विधायकों के बीच मुकाबला

डॉ. संजीव कुमार बख्शी, अमर उजाला, होशियारपुर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 17 May 2019 02:04 PM IST
होशियारपुर के प्रत्याशी
होशियारपुर के प्रत्याशी - फोटो : amar ujala
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होशियारपुर पंजाब और खासकर दोआबा में बेहद अहम माना जाता है। 1980 में यहां से ज्ञानी जैल सिंह ने चुनाव जीता था, जो बाद में देश के राष्ट्रपति बने। इसके अलावा बसपा के पूर्व सुप्रीमो कांशी राम, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना और केंद्रीय राज्यमंत्री संतोष चौधरी भी यहां से सांसद रह चुके हैं।
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नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ने पिछली बार भी यहां जनसभाएं की थीं और इस बार भी। 1952, 1957, 1962, 1967, 1971, 1980, 1984, 1989, 1991, 1999 और 2009 में कांग्रेस यहां से जीती जबकि 1967 में जनसंघ, 1977 में भारतीय लोकदल, 1996 में बसपा के सुप्रीमो कांशीराम सांसद बने। 1998, 2004, और 2014 में भाजपा ने जीत हासिल की थी।


संसदीय क्षेत्र में 9 विधानसभा सीटें
होशियारपुर, कपूरथला और गुरदासपुर में फैले इस विशाल संसदीय क्षेत्र में नौ विधानसभा सीट हैं, जिनमें होशियारपुर, चब्बेवाल (सुरक्षित), शामचौरासी (सुरक्षित), उड़मुड़, दसूहा, मुकेरियां, फगवाड़ा (सुरक्षित), भुलत्थ और श्री हरगोबिंदपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीटें शामिल हैं। इनमें से सात विस हलकों में कांग्रेस के विधायक हैं, जबकि दो पर अकाली भाजपा के। हलके का बड़ा इलाका कंडी के नीम पहाड़ी क्षेत्र का है जिसके अपने अलग मुद्दे, समस्याएं और जरूरतें हैं।

इस बार का मुकाबला
होशियारपुर लोकसभा क्षेत्र से 8 प्रत्याशी मैदान में हैं, पर मुख्य रूप से कांग्रेस के डॉ. राजकुमार चब्बेवाल और भाजपा के सोमप्रकाश के बीच मुकाबला है। आप प्रत्याशी डॉ. रवजोत भी मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। पीडीए की ओर से बसपा के खुशी राम मैदान में हैं।  कांग्रेस के प्रत्याशी चब्बेवाल से विधायक हैं तो भाजपा के फगवाड़ा से।

कुल मतदाता - 15,79,618
महिला मतदाता - 8,14,498
पुरुष मतदाता - 7,65,090
ट्रांसजेंडर - 30

उम्मीदवार

डॉ. राजकुमार (कांग्रेस )
हलके के लोगों के लिए विकास, मेडिकल कालेज व अस्पताल, तकनीकी संस्थान, औद्योगिक पैकेज, कंडी में मेगा प्रोजेक्ट के साथ-साथ कंडी इलाके में वन आधारित कुटीर उद्योगों की स्थापना कराने का वादा करने के साथ साथ पंजाब की कांग्रेस सरकार की कारगुजारी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। संतोष चौधरी की नाराजगी के बावजूद बड़ी जीत का दावा कर रहे हैं।

भाजपा प्रत्याशी - सोम प्रकाश
मौजूदा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला की टिकट काट कर यहां से मैदान में उतारे गए भाजपा प्रत्याशी का मुख्य तौर पर मोदी के नाम पर और केंद्र सरकार की कारगुजारी के बूते और स्थानीय मुद्दों पर मतदाताओं से नैया पार लगाने की उम्मीद कर रहे हैं। पार्टी में व्यापक गुटबाजी के बावजूद अपनी जीत को लेकर भाजपा प्रत्याशी आश्वस्त नजर आते हैं।

आम आदमी पार्टी प्रत्याशी - डॉ. रवजोत
आप की ओर से डा. रवजोत स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और बाकायदा स्थानीय मेनिफेस्टो जारी कर चुके हैं। पहले शाम चौरासी से आप की टिकट पर विस चुनाव लड़ चुके हैं। इस बार आप की पुरानी प्रत्याशी यामिनी गोमर सहित आप के कई नेताओं का कांग्रेस में होने व पार्टी में बिखराव मुश्किल का सबब बन सकता है।

पीडीए (बसपा) प्रत्यासी - खुशी राम
कभी हलके में व्यापक जनाधार हुआ करता था बसपा का, पर बसपा के सामने इस बार पार्टी के पुनर्जीवित करने की ही चुनौती है क्योंकि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष गुरलाल सैला, दो राज्यों के प्रभारी व कांशी राम तक के कवरिंग कैंडिडेट रह चुके व गत बार के प्रत्याशी भगवान सिंह चौहान सहित बसपा के टकसाली नेता पार्टी के रूख्सत हो चुके हैं वैसे पिछली बार भी बसपा 40 हजार पर सिमट गई थी।

ताकतें और कमजोरियां

डॉ. राजकुमार (कांग्रेस)
ताकत - हलके के स्थानीय मुद्दों को लेकर मैदान में उतरना, हलके के 9 विस क्षेत्रों में से इनके खुद के समेत कांग्रेसी विधायक, विरोध का बड़ा मुद्दा न होना
कमजोरी - काग्रेस सरकार के सारे वादे वफा न होना, संतोष चौधरी की नाराजगी

सोम प्रकाश (भाजपा)
ताकत - केंद्र सरकार की कारगुजारी, मोदी के नाम पर वोट मांगना, स्थानीय मुद्दे उठाना
कमजोरी -  मौजूदा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला, पार्टी उपाध्यक्ष  व पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना का चुनाव मुहिम से गायब रहना, पार्टी में व्यापक गुटबाजी

डॉ. रवजोत (आम आदमी पार्टी)
ताकत - स्थानीय मुद्दों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना, स्थानीय मुद्दों का अलग मेनिफेस्टो, शाम चौरासी से आप की टिकट पर चुनाव लड़ चुके।
कमजोरी - आप की पिछली प्रत्याशी यामिनी गोमर सहित आप के कई नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना व पार्टी में बिखराव

खुशी राम (पीडीए प्रत्याशी)
ताकत - विभिन्न दलों के साथ गठबंधन, इलाके के दो दो हलकों में एसडीएम रह चुके हैं
कमजोरी -पार्टी के जनाधार को पुनर्जीवित करने की चुनौती, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष गुरलाल सैलाव गत बार के प्रत्याशी भगवान सिंह चौहान समेत बसपा के टकसाली नेता पार्टी से बाहर होना।
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