इनसाइड स्टोरी: कैप्टन नहीं, सिद्धू होंगे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा, सत्ता और संगठन दोनों में दिखेगी हनक

प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 20 Sep 2021 03:09 AM IST

सार

2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू ही कांग्रेस का मुख्य चेहरा होंगे। इससे पहले पार्टी ने कहा था कि विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे लेकिन अब समीकरण बदल चुके हैं। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले चुनाव में सिद्धू ही कमान संभालेंगे।
नवजोत सिंह सिद्धू।
नवजोत सिंह सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब कांग्रेस में चल रही सियासी उठापटक के बीच पार्टी नवजोत सिंह सिद्धू को पूरी तरह साध कर चलेगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पद से हटाने से लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने तक सिद्धू की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने भी साफ कर दिया है कि 2022 विधानसभा चुनाव में सिद्धृ ही पार्टी का चेहरा होंगे।
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फिलहाल चन्नी को सीएम का चेहरा बनाकर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू ने सत्ता और संगठन दोनों में ही अपनी धाक जमा ली है। संगठन में ताजपोशी के बाद भी कैप्टन के चलते सिद्धू अपनी नहीं चला पा रहे थे। चन्नी के सीएम बनने के बाद यह साफ हो गया है कि पार्टी में सत्ता से लेकर संगठन तक सिद्धू की ही चलेगी।


पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने चन्नी के सहारे दोहरा दांव चला है। रविदासिया समाज से आने वाले चन्नी के जरिए कांग्रेस 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में 32 प्रतिशत वोट को साधने की कोशिश करेगी। साथ ही भाजपा और शिअद के दलित मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के कार्ड को फेल करने में भी कांग्रेस प्रधान आज कामयाब रहे हैं। 

अब कैप्टन के इस्तीफे के बाद हाल फिलहाल नवजोत सिद्धू के पक्ष में सियासी समीकरण पंजाब में और आसान हो गए हैं। चन्नी को मुख्यमंत्री बनाने में अपनी सहमति जताने के साथ ही उन्होंने 2022 में आने वाली चुनौतियों को भी खत्म करने का प्रयास किया है।



गांवों में मिलेगी मजबूती
पंजाब में दलित दो हिस्सो में बंटा है। यहां रविदासी और वाल्मीकि दो बड़े वर्ग दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला दलितों का बड़ा हिस्सा डेरों से जुड़ा हुआ है। चुनाव के समय यह डेरे अहम भूमिका निभाते हैं। नए मुख्यमंत्री के जरिए कांग्रेस पार्टी को ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत आधार मिलेगा। दोआबा क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश दलित परिवारों का एक सदस्य एनआरआई है। इस नाते वह आर्थिक रूप से काफी सपन्न भी हैं।

पंजाब का यह है जातीय समीकरण
पंजाब का जातीय गणित माझा मालवा और दोआबा में बंटा है। सूबे में 20 प्रतिशत जट सिख हैं, 32 फीसदी दलित वोट और 38 प्रतिशत हिंदू हैं। ऐसे में कांग्रेस ने दलित सीएम की घोषणा कर जातीय ध्रुवीकरण करने की कोशिश की है। मुस्लिम, ईसाई और अन्य के 10 प्रतिशत के करीब वोटर सूबे में हैं।
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