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रेलवे पुराने इंजनों को बोलेगा बाय-बाय, पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर और सुहाना होगा सफर

संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 22 Feb 2020 01:08 AM IST

सार

  • 12 इंजनों को बदलने की कवायद शुरू, मुंबई के परेल में बन रहे नए इंजन।
  • दो महीने में दूसरा नया इंजन पठानकोट की लोको शेड पहुंचा।
पठानकोट पहुंचा नया इंजन।
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विस्तार

पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच नैरोगेज रेलवे को मजबूत करने के लिए उत्तर रेलवे ने बूढ़े हो चुके 12 रेल इंजनों को बाय-बाय कहने का मन बना लिया है। दो महीने में दूसरा नया इंजन पठानकोट-जोगिंद्रनगर सेक्शन को मिल गया है। शुक्रवार को परेल (मुंबई) लोको वर्कशॉप से नया इंजन पठानकोट की लोको शेड पहुंच गया। इंजन को हिमाचल भेजने से पहले इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों के नेतृत्व में ट्रायल किया जाएगा। फिट होने के बाद इसे ट्रैक पर भेजा जाएगा। 

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इसके इलावा आने वाले डेढ़ वर्ष में पठानकोट लोको को 12 और नए इंजन मिलेंगे। इन्हें असेंबल करने का काम शुरू हो गया है। रेल इंजीनियरों का कहना है कि नए तैयार होने वाले इंजन अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। इनकी आयु 35 वर्ष होगी। रेलवे को उम्मीद है कि नए इंजन जब पठानकोट से पालमपुर के बीच की हसीन वादियों से डिब्बों को लेकर निकलेंगे तो उनका दम नहीं फूलेगा।


रोजाना 21 हजार यात्री करते हैं सफर
पठानकोट से पालमपुर व जोगिंद्रनगर के बीच हर रोज 14 ट्रेनें चलती हैं। इनमें 21 हजार यात्री सफर करते हैं। इस तरह यह रेल जहां पठानकोट की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है वहीं हिमाचल प्रदेश में करीब 100 किमी में बसे लोगों के लिए लाइफ लाइन भी है। इस ट्रैक पर नए रेल इंजनों की मांग लगातार की जा रही थी लेकिन फंड के अभाव में रेलवे यह जोखिम ले पाने के मूड में नहीं था। 

रूट के 17 इंजन पूरी कर चुके हैं मियाद

रेलवे के अनुसार नैरोगेज इंजन पर चलने वाले इंजन की आयु 36 साल मानी गई है। पठानकोट-जोगिन्द्रनगर के बीच नैरोगेज रेल ट्रैक पर चल रहे 17 इंजनों में से अधिकांश अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। 1976 में इस ट्रैक को 5 इंजन मिले थे जो अब 44 साल पुराने हो चुके हैं। साल 1977 में ट्रैक को 5 इंजन मिले थे जो इस समय 43 साल के हो चुके हैं। 

साल 1981 में इस रूट को 5 अन्य इंजन मिले थे जिनकी आयु 39 साल की है। साल 1982 में इस रूट को 2 इंजन मिले थे जो 38 साल पुराने हो चुके हैं। यह इंजन औसतन 34 साल चलने थे जबकि इनमें से 15 को आयु पूरी होने के बाद भी लगातार चलाया जाता रहा।

पठानकोट रेलवे लोको अधिकारी ने बताया कि परेल वर्कशॉप से दूसरा नया इंजन पठानकोट लोको पहुंच गया है। परेल वर्कशॉप इंजीनियरिंग ब्रांच को इसका ट्रायल लेने के लिए लिख दिया गया है। मार्च के पहले सप्ताह में टीम के पठानकोट आने की उम्मीद है। टीम के नेतृत्व में ट्रायल लिया जाएगा। इसके बाद इंजन को नैरोगेज ट्रेनों के साथ जोड़कर हिमाचल प्रदेश भेजा जाएगा।
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