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चंडीगढ़ः नौ कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया, पीड़ित बोले- यह कैसा न्याय

कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 07 Nov 2019 11:18 AM IST
सेंट्रल लाइब्रेरी के कर्मचारी
सेंट्रल लाइब्रेरी के कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ में सेक्टर-34 स्थित साउथ डिविजनल स्टेट लाइब्रेरी में 10 साल से कांट्रैक्ट पर काम कर रहे ग्रुप-डी के 9 कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए काम से निकाल दिया गया। इससे कर्मचारी सकते में हैं। निकाले गए कर्मचारियों में सफाई कर्मचारी और चपरासी शामिल हैं। कर्मचारियों से कहा गया है कि डायरेक्टर हायर एजुकेशन ने नया पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ग्रुप-डी कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास होनी चाहिए। लाइब्रेरी में कार्यरत 9 कर्मचारियों ने 10वीं पास नहीं की है। इससे कर्मचारियों में रोष है।
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उनका कहना है कि इस तरह रोजी रोटी छिनना कहां का न्याय है। यह निर्णय उनके परिवार को फुटपाथ ला खड़ा कर देगा। यहां 26 कर्मचारी कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं।  सेक्टर-34 लाइब्रेरी में कांट्रैक्ट पर कार्यरत ग्रुप-डी कर्मचारियों ने बताया कि बुधवार सुबह जब वे काम पर आए तो बायोमैट्रिक मशीन ने उनकी हाजिरी स्वीकार नहीं की। हालांकि मंगलवार रात को वे लाइब्रेरी से जाते समय बायोमैट्रिक मशीन में पंच करके गए थे। लाइब्रेरी में पूछताछ पर पता चला कि उन्हें नए आदेशों के अनुसार नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है, क्योंकि उनकी शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास नहीं है।


कर्मचारियों ने बताया कि पहले न तो कोई नोटिस दिया और न ही कोई जानकारी दी गई। बावजूद इसके बुधवार को लाइब्रेरी में सफाई कर्मचारी और चपरासी के लिए नए रिज्यूमे भी आने शुरू हो गए हैं। उन्होंने बताया, डायरेक्टर हायर एजुकेशन के ऑफिस जाने पर वीरवार सुबह आने के लिए कहा गया है। जब इस बारे में डायरेक्टर हायर एजुकेशन रुबिंदरजीत सिंह बराड़ से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उधर, इस मुद्दे पर कांट्रेक्टर दीपक शर्मा भी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने भी फोन का कोई जवाब नहीं दिया। 

कहां का न्याय.. दिवाली के समय भी नहीं दी गई छुट्टी और अब... : राजेश

सफाई कर्मचारी राजेश ने बताया कि उन्हें लाइब्रेरी में सफाई के लिए रखा गया था। लेकिन सफाई के साथ अन्य काम भी करवाए जा रहे हैं। दिवाली के समय भी उन्हें कोई छुट्टी नहीं दी गई थी। दिवाली के समय रात को गार्ड की ड्यूटी की थी। उन्होंने कहा, काम करने का निर्धारित समय साढ़े आठ घंटे हैं। लेकिन गार्ड की ड्यूटी के समय 13-14 घंटे काम लिया जाता है। अब पेट पर लात मारी जा रही है। यह हमारे साथ अन्याय है। 10 साल नौकरी के बाद अचानक इस तरह का निर्णय लेना हमारे परिवार को पटरी पर ला देगा।

लाइब्रेरी मेंबर बोलीं- ये वर्कर्स काफी मददगार, जरूरत पड़ने पर हम इनके साथ
लाइब्रेरी की दो साल से मेंबर रही किरण ने कहा, मैं दो साल से यहां पढ़ने के लिए आती हूं। यहां सफाई करने वाले वर्कर रिसेप्शन काउंटर पर आने जाने वाले मेंबर्स की एंट्री भी करते हैं। महिलाओं का बाथरूम साफ करने वाली वर्कर को सफाई करने के बाद भी साढ़े आठ घंटे वहां बैठने के लिए मजबूर किया जाता है। ये सारे वर्क र्स काफी मददगार हैं। जरूरत पड़ने पर हम लाइब्रेरी के मेंबर्स इनके साथ खड़े हैं।  

ग्रुप-डी कर्मचारियों को अभी नौकरी से नहीं निकाला गया है। ये शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं। इसके लिए उन्हें सर्विस प्रोवाइडर ने समय दिया है कि वे अपने सर्टिफिकेट पूरे कर लें।
- रुपिंदर कौर बेदी, लाइब्रेरी इंचार्ज, स्टेट लाइब्रेरी-34 
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