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फिर गरजे सिद्धू: तीन ट्वीट से चन्नी सरकार पर साधा निशाना, कहा-हर महीने पंजाब के खजाने का हिसाब दो

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 15 Nov 2021 04:54 PM IST

सार

नवजोत सिद्धू और चरणजीत चन्नी के बीच सब कुछ सही होने की उम्मीद पर फिर धुंध छाने लगी है। चन्नी जहां लगातार पंजाब के लोगों के लिए घोषणाएं कर रहे हैं, वहीं सिद्धू उन पर हमलावर हैं।   
नवजाेत सिद्धू।
नवजाेत सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार को प्रदेश की वित्त व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार को निशाने पर ले लिया। अब तक सिद्धू बेअदबी, नशे के कारोबार, शराब, रेत और ट्रांसपोर्ट माफिया के मुद्दे को लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमलावर रहे थे।

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सिद्धू ने लगातार तीन ट्वीट कर राज्य पर चढ़े हजारों करोड़ के कर्ज का हवाला देते हुए चन्नी सरकार को न सिर्फ कई सुझाव दिए, बल्कि प्रदेश की मौजूदा वित्त व्यवस्था की खामियां भी गिना डालीं। सिद्धू ने पहले ट्वीट में लिखा- आज पंजाब भारत का सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में ऋण का हिस्सा 50 फीसदी है। हमारे खर्च का आधा हिस्सा महंगे कर्ज से आता है। उन वास्तविक मुद्दों से न हटें, जिनका प्रत्येक पंजाबी और पार्टी कार्यकर्ता समाधान की मांग करता है।


सिद्धू ने दूसरे ट्वीट में लिखा- वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पंजाब मॉडल के स्तंभ हैं। जवाबदेही, प्रत्येक योजना की घोषणा के साथ उसके धन के स्रोतों का खुलासा करने की मांग करती है, भले ही वह अधिक कर्ज से होने वाली आय से लिया गया हो। इसी तरह पारदर्शिता हर महीने राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य को सार्वजनिक करने की मांग करती है। 

सिद्धू ने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा- उधार लेना आगे बढ़ने का रास्ता नहीं है! टैक्स का पैसा कर्ज चुकाने के लिए नहीं बल्कि विकास के रूप में लोगों तक वापस जाना चाहिए। समाधान उन्मुख मॉडल वही होगा, जिसमें राज्य के संसाधनों की चोरी को रोकना, सरकारी खजाने को भरना और आय सृजन के माध्यम से एक कल्याणकारी राज्य का सृजन किया जाए।

पंजाब के सिर ढाई लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज
पंजाब की मौजूदा कांग्रेस सरकार 2022 में विधानसभा चुनाव तक राज्य के सिर पर लगभग 2.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ देगी। मार्च 2017 में जब कांग्रेस ने प्रदेश की कमान संभाली, उस समय पिछली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार राज्य के सिर 1.82 लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़  गई थी। बीते पांच साल के दौरान मौजूदा सरकार ने जनता से किए वादे और अपना कामकाज चलाने के लिए बाजार से और एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज उठा लिया है।

केंद्र के फैसले के बाद पर फिर मिली कर्ज की अनुमति 
बीते सप्ताह पंजाब वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन एक्ट, 2003% की धारा 4, उप-धारा (2) और क्लॉज (ए) में संशोधन को मंजूरी देकर केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी गई उस राहत का फायदा उठाने का फैसला किया है, जिसके तहत राज्य की अनुमानित जीएसडीपी में 0.50 फीसदी की छूट दी गई है। यह छूट राज्यों को बाजार से और कर्ज लेने का अवसर प्रदान करेगी। पंजाब की अनुमानित जीएसडीपी 4 फीसदी होने के कारण राज्य सरकार अब बाजार से कर्ज नहीं ले सकती थी लेकिन केंद्र का फैसला मानने के बाद उसे 0.50 फीसदी की छूट मिल गई है। दरअसल केंद्र ने राज्यों द्वारा 2021-22 के दौरान तय लक्ष्य के विरुद्ध किए पूंजी खर्च के आधार पर उन्हें जीएसडीपी के 0.50 फीसदी की बाकी उधार सीमा की अनुमति दी है। 

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