ये भी शिक्षक: जरूरतमंद बच्चों को मुक्केबाजी सिखा रहे पंजाब पुलिस के एएसआई, अभावों में भी दे रहे आगे बढ़ने की सीख

संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 05 Sep 2021 12:55 PM IST

सार

पंजाब मुख्यालय में तैनात जोगिंदर सिंह गरीब बच्चों को सेक्टर-3 स्थित बोगनवेलिया गार्डन में मुक्केबाजी का मुफ्त प्रशिक्षण देते हैं। 30 से अधिक बच्चे इस समय मुक्केबाजी के गुर सीख रहे हैं।
बच्चों को बाक्सिंग सिखाते जोगिंदर सिंह।
बच्चों को बाक्सिंग सिखाते जोगिंदर सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

न रिंग है, न पंचिंग बैग। है तो सिर्फ बॉक्सिंग का जुनून। खुले आसमान तले अभ्यास करते बच्चे कल सुनहरा इतिहास लिखने के लिए पसीना बहा रहे हैं। एशियन यूथ व जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता रोहित चमोली की तरह खेलों में छाने की हसरत है। उनके इसी सपने को पूरा करने में दिनरात जुटे हैं कोच जोगिंदर सिंह। 
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पंजाब पुलिस में एएसआई जोगिंदर सिंह ने ही रोहित चमोली को बॉक्सिंग के पंच सिखाए थे। इसके बाद रोहित ने दुबई में आयोजित चैंपियनशिप में 48 किलो भार वर्ग के फाइनल में मंगोलिया के ओटगेनबयार तुबश्जिया को 3-2 से शिकस्त दी थी। जोगिंदर कहते हैं कि जिनमें कुछ कर गुजरने का जुनून होता है, बाधाएं उनका मार्ग नहीं रोक सकतीं। इसीलिए वह इन खिलाड़ियों को तराशने में जुटे हैं। वह मानते हैं कि इन बच्चों के पास आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं। न खेल उपकरण हैं और न खुराक का खास इंतजाम। फिर भी चुनौतियों को हराकर यही बच्चे कल चैंपियन बनेंगे। 



पंजाब मुख्यालय में तैनात जोगिंदर सिंह गरीब बच्चों को सेक्टर-3 स्थित बोगनवेलिया गार्डन में मुक्केबाजी का मुफ्त प्रशिक्षण देते हैं। 30 से अधिक बच्चे इस समय मुक्केबाजी के गुर सीख रहे हैं। अधिकतर बच्चे मिस्त्री, कुक, माली और छोटा मोटा काम करने वाले परिवारों से संबंधित हैं। तमाम असुविधाओं के बीच जोगिंदर हर साल जूनियर, राज्य व राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर रहे हैं। 

खुराक नहीं मिली तो कुछ बच्चों को भेजा खेल सेंटर
जोगिंदर सिंह ने बताया कि मैं खुद नौकरी कर अपने परिवार का खर्चा चलाता हूं। मेरे सिखाए बच्चे जब मेडल जीतकर लाते हैं तो मेरा सीना चौड़ा हो जाता है। बेहतर खुराक और अन्य सुविधाओं के लिए कई काबिल बच्चों को पंजाब के खेल और साई सेंटर में भर्ती करवाया। वहां उन्हें पेशेवर कोच मिलेंगे। अच्छी सुविधाएं मिलेंगी तो एक दिन इतिहास रचेंगे। 

गुरु ने सिखाए पंच, चमोली ने सोना जीतकर दी दक्षिणा
दुबई में चैंपियन बनने वाले रोहित चमोली के पिता कुक हैं। परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि अच्छी कोचिंग दिला पाते। किसी के माध्यम से पिता ने रोहित को जोगिंदर सिंह के पास भेजा। जोगिंदर सिंह ने उन्हें बॉक्सिंग के पंच सिखाए। दिन रात मेहनत की। जिंदगी में पहली बार दुबई में रिंग में उतरे रोहित ने स्वर्ण पदक जीतकर अपने गुरु को दक्षिणा दी। चैंपियन बनने के बाद जोगिंदर सिंह से मिलने पहुंचे रोहित बेहद भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी को नई दिशा देने का श्रेय कोच जोगिंदर सिंह को ही जाता है। उन्होंने कड़ी मेहनत कराई, जिसकी बदौलत मैं अंतरराष्ट्रीय जूनियर मुक्केबाज बना। 

नहीं चाहता किसी और का सपना टूटे
नयागांव में रह रहे जोगिंदर सिंह ने बताया कि उन्हें बचपन से ही मुक्केबाजी का शौक था। इसी में कॅरिअर बनाने का जुनून था, लेकिन बेहतर सुविधाएं न मिल पाने के कारण वह अपना सपना पूरा नहीं कर पाए। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि पेशेवर प्रशिक्षण ले पाता। लिहाजा अपने उसी टूटे सपने को जरूरतमंद बच्चों की आंखों में जी रहा हूं। पांच साल हो चुके हैं बच्चों को बॉक्सिंग सिखाते हुए। कितने ही बच्चे आज सफल हो चुके हैं।  
 

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