शोध: सरकारी मशीनरी से हार रहे पंजाब के लोग गैरकानूनी तरीके से जा रहे विदेश, रिसर्च से हुआ खुलासा

सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 20 Aug 2021 04:56 PM IST

सार

जालंधर, अमृतसर व मोगा जिलों के 24 गांवों के 100 लोगों ने यह गैरकानूनी रास्ता चुना। वर्ष 1985 से लेकर 2017 तक के आंकड़े विशेषज्ञों ने अपने शोध के जरिए जुटाए हैं। शोध के आए परिणामों के बाद विशेषज्ञों ने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को सुझाव दिए कि विदेश नीति में बदलाव की जरूरत है।
गैरकानूनी तरीकों से विदेश जा रहे पंजाबी।
गैरकानूनी तरीकों से विदेश जा रहे पंजाबी। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

सरकारी मशीनरी से हारकर विदेश जाने के लिए पंजाब के लोग गैरकानूनी रास्ते अपना रहे हैं। इसका खुलासा पंजाब विश्वविद्यालय के यूबीएस विभाग के डॉ. कुलविंदर सिंह, पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. निरवैर सिंह और केंद्रीय विश्वविद्यालय बठिंडा के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. नरेश सिंगला के शोध में हुआ है।
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शोध में इन लोगों ने पाया कि जालंधर, अमृतसर व मोगा जिलों के 24 गांवों के 100 लोगों ने यह गैरकानूनी रास्ता चुना। वर्ष 1985 से लेकर 2017 तक के आंकड़े विशेषज्ञों ने अपने शोध के जरिए जुटाए हैं। शोध के आए परिणामों के बाद विशेषज्ञों ने केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार को सुझाव दिए कि विदेश नीति में बदलाव की जरूरत है। साथ ही सरकारी सिस्टम नियमों का सरलीकरण करे ताकि लोग गैरकानूनी तरीकों को मजबूरन न अपनाएं।



इन गांवों के लोग गए विदेश
जालंधर के बाजवा खुर्द, बठान, ढड्डा, हरिपुर खालसा, चक छेला, नांगल जीवान, मदार, राज गोमल, संगवाल, सितालपुर गांव में 2453 घर हैं। यहां के 998 परिवार ऐसे मिले, जिनमें से कोई न कोई व्यक्ति विदेश गया है। अमृतसर के भयनी, छठीविंड लेहाल, दालम, फतुवाल, इस्सापुर, नांगल पुनन, रानीके, तलवंडी डोगरान, तपियाला में 2513 घर हैं और यहां के 212 परिवारों में से कोई न कोई विदेश गया है। इसी तरह बरवाला, बटरखुर्द, जोगेवाला, कोट सदर खान, लांगेनाकला के 1437 में से 107 घरों से कोई न कोई व्यक्ति विदेश गया है। शोधकर्ताओं ने इन 24 गांवों के 360 परिवारों से संपर्क साधा, जिनमें से 260 लोग ऐसे मिले, जिन्होंने कानूनी तरीकों का प्रयोग किया और 100 लोग गैरकानूनी तरीके से विदेश गए।

71 फीसदी लोग टेस्ट में हो जाते हैं फेल
यूरोपियन देशों, अरब देशों के अलावा कनाडा, यूएसए या एशिया के देशों में नौकरी या किसी काम करने के लिए जाने वाले लोग ऑनलाइन आवेदन करते हैं। उसके बाद परीक्षा होती है। आंकड़ों के मुताबिक, 71 फीसदी लोग परीक्षा पास नहीं कर पाते, जो अंग्रेजी में होती है। एक ही नहीं दो से तीन बार भी परीक्षा देते हैं, तब भी उन्हें सफलता नहीं मिलती। इसके कारण लोग दूसरे रास्ते अपनाते हैं। इस समय एक बार आवेदन करने से लेकर अन्य प्रक्रियाओं में एक व्यक्ति लगभग पांच लाख रुपये खर्च कर रहा है। लगभग 10 से 12 लाख रुपये खर्च करने के बाद यह लोग दूसरे रास्ते के जरिए विदेश जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने से पहले यह कर्ज में डूब जाते हैं और मजबूरी के कारण विदेश जाते हैं। गैरकानूनी रास्ते अपनाने से पहले यह सरकारी मशीनरी आदि के पास भी गए हैं लेकिन वहां से उन्हें मदद नहीं मिल सकी। 

इसलिए जाते हैं विदेश
बेरोजगारी यहां अधिक है लेकिन विदेश में कहीं न कहीं उन्हें योग्यता के मुताबिक काम मिल जाता है। इसका पता उन्हें रिश्तेदार आदि के जरिए मिल जाते हैं, जो विदेशों में रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, वहां जाकर यह पांच साल बाद पीआर यानी स्थानी नागरिक भी बन जाते हैं। गैरकानूनी तरीके से गए लोगों ने निजी एजेंटों के जरिए रास्ता निकाला। कुछ लोग टूरिस्ट बनकर विदेश गए और वहीं ठहर गए। 

तीन जिलों के 360 परिवारों का अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि 260 लोग नियमों का पालन करते हुए विदेश गए और 100 लोगों ने गैरकानूनी तरीकों का प्रयोग किया। विदेश जाने के लिए सरकारी मशीनरी से भी संपर्क साधा लेकिन कामयाबी नहीं मिली। आखिर में मजबूरी के कारण इन्होंने गैर कानूनी तरीकों का सहारा लिया। ऐसी नौबत न आए, इसलिए माइग्रेशन विदेश नीति के नियम सरल होने चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार पहल करे। -डॉ. कुलविंदर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, यूबीएस विभाग, पीयू 

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