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बारहवीं परिणाम के फॉर्मूले से विद्यार्थी मायूस, बोले- नंबर कम आने पर नहीं मिल सकेगा मनपसंद कॉलेज

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 17 Jun 2021 10:55 PM IST
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चंडीगढ़। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से वीरवार को बारहवीं परीक्षा के परिणाम के लिए सुझाए गए मूल्यांकन मापदंड से विद्यार्थी मायूस हो गए हैं। उनका कहना है कि इससे उनके नंबर कम आएंगे और मनमुताबिक कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाएंगे। विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा एतराज 11वीं व बारहवीं के आंतरिक नंबरों को जोड़े जाने से है। विद्यार्थियों का कहना है कि दसवीं का आधार तो ठीक है, लेकिन 11वीं व 12वीं के प्रदर्शन को आधार बनाना न्यायसंगत नहीं होगा। 12वीं की आंतरिक परीक्षा कोरोना के साए में हुई है। आधे विद्यार्थियों ने ऑफलाइन परीक्षा दी तो आधे ने ऑनलाइन। ऑफलाइन परीक्षा देने वाले विद्याथियों ने यह सोचकर पेपर दिए थे, ताकि बोर्ड परीक्षा के लिए उनकी प्रैक्टिस मजबूत तरीके से हो सके। इस वजह से उनके मार्क्स ऑनलाइन परीक्षा देने वालों से कम आए हैं। जिन विद्यार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षा दी थी, उनके परीक्षा में नंबर अच्छे आए। विद्यार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षा घर पर बैठकर दी है। घर पर उन्होंने परीक्षा किस हालात में दी, उसके बारे में कोई नहीं जानता।
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11वीं को आधार बनाने पर भी विद्यार्थियों को घोर आपत्ति है। उनका कहना है कि 11वीं कक्षा के दौरान विद्यार्थी ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं। कई विद्यार्थी दूसरी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं। दूसरा कुछ विद्यार्थी 11वीं के बजाए सीधे 12वीं को तवज्जो देते हैं। इसलिए वे 11वीं की परीक्षा पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं।

क्या कहते हैं विद्यार्थी
मापदंड के अनुसार नहीं बन रहे अच्छे अंक
सीबीएसई के मापदंड से असंतुष्ट हैं, क्योंकि ग्यारहवीं में नए विषय होने के कारण इतने अच्छे अंक नहीं आ पाते हैं। वहीं अन्य गतिविधियों और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी अधिक ध्यान होता है। बारहवीं में इस बार इंटरनल परीक्षाओं में ऑनलाइन-ऑफलाइन का विकल्प था। बोर्ड की तैयारी के लिए मैंने सभी परीक्षाएं ऑफलाइन दीं, क्योंकि हमारी काउंसलिंग हुई थी बोर्ड की परीक्षा होगी। मेरा लक्ष्य अच्छे कालेज में दाखिले के लिए बोर्ड में 95 प्रतिशत से अधिक लाने का था, लेकिन इस अनुसार इतने अंक नहीं बन रहे हैं।
- सिद्धार्थ, 12वीं कक्षा छात्र
बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत मेहनत की थी, सब व्यर्थ लग रहा
मैंने बारहवीं बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लेने के लिए बहुत मेहनत की थी और अपना पूरा समय पढ़ाई को दिया था, लेकिन अब ग्यारहवीं के अंकों को आधार बनाने के फैसले से मैं खुश नहीं हूं क्योंकि ग्यारहवीं में नई कक्षा और नए विषय होने के कारण ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं था। इसके साथ ही दो बोर्ड की कक्षा के बीच ग्यारहवीं में पढ़ाई में भी थोड़ी ढिलाई बरती होती है। हालांकि मेरे दसवीं बोर्ड में अच्छे अंक थे। इन तीनों में ये एक ही कक्षा के अंक लेना थोड़ा संतोषजनक है। - महक शर्मा, 12वीं कक्षा छात्र
बारहवीं इंटरनल के अंक लेने से अंसतुष्ट
सभी सरकारी स्कूलों में बारहवीं इंटरनल की परीक्षा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दो विकल्प दिए थे। जिन विद्यार्थियों ने बारहवीं बोर्ड के अभ्यास का आंकलन करना था, उन्होंने ऑफलाइन परीक्षा को चुना था। वहीं बहुत से विद्यार्थियों ने ऑनलाइन परीक्षाएं दीं और बहुत अच्छे अंक हासिल किए। इंटरनल के आधार पर अंक जोड़ने पर लक्ष्य के अनुसार अंक नहीं बन रहे हैं। मेरा दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले का लक्ष्य है, वहां प्रतियोगिता बहुत मुश्किल है। डीयू 50 प्रतिशत अंक बोर्ड के देख रही है, ऐसे में तनाव बढ़ गया है। - अर्पित, विद्यार्थी, 12वीं कक्षा छात्र
हालातों को देखते हुए बोर्ड का फैसला ठीक
मेरे ख्याल से तीनों कक्षाओं के अंक मापदंड में लेने के अलावा और कोई निष्पक्ष तरीका नहीं हो सकता है। बोर्ड की इंटरनल परीक्षाएं मैंने ऑनलाइन दी हैं। वहीं अंतिम प्रैक्टिकल की कई परीक्षा ऑफलाइन दी और अभी एक-दो आनलाइन होने हैं। उम्मीद है कि सभी विद्यार्थियों के अंकों का आंकलन निष्पक्ष तरीकेसे किया जाएगा। - मनन शर्मा, विद्यार्थी, 12वीं कक्षा छात्र
विद्यार्थी बोल रहे फैसले से अंसतुष्ट
सीबीएसई की घोषणा के बाद कई विद्यार्थियों से फोन पर बातचीत हुई है। आंकलन के लिए ग्यारहवीं के अंकों को रखने से विद्यार्थी खुश नहीं है। वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि बारहवीं के इंटरनल परीक्षा भी हर विद्यार्थी ने शिक्षक के मार्गदर्शन में नहीं दी है। मेरी बेटी भी बारहवीं कक्षा में है, हमारे लक्षित कॉलेजों में दाखिले को लेकर अब हमें थोड़ा तनाव हो रहा है। क्योंकि ग्यारहवीं में बच्चा बोर्ड की तुलना में अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है। - सोनिया, बोर्ड विशेषज्ञ शिक्षिका और अभिभावक
बोर्ड में ही पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी
बोर्ड का यह फैसला उन विद्यार्थियों के लिए ठीक है, जो हर कक्षा में अधिक अंक लेने के लिए नियमित मेहनत करते हैं। लेकिन ज्यादातर विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो सिर्फ बोर्ड परीक्षा के दौरान ही मेहनत करते हैं और कई बार मेरिट में भी आ जाते हैं। ग्यारहवीं के अंकों को शामिल करने से ऐसे विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी हुई है। - नितिन गोयल, अध्यक्ष, अभिभावक संघ

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