हरियाणा: जहां पराली नहीं जली, वहां भी सांस लेना कठिन, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम में पराली जलाने के मामले नहीं, एक्यूआई अधिक

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 25 Oct 2021 02:26 AM IST

सार

हरियाणा में धान कटाई के बाद अक्सर पराली जलाने के मामले सामने आते हैं, जिससे वायु की गुणवत्ता खराब होती है। इस साल करनाल, कैथल में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली और आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण के लिए अकेले हरियाणा के किसानों द्वारा जलाई गई पराली जिम्मेदार नहीं है। कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। इस समय भी प्रदेश के उन जिलों में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) अधिक है, जहां एक भी स्थान पर पराली जलाने का मामला सामने नहीं आया है या फिर नाम मात्र केस ही मिले हैं।
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पराली नहीं जलाने के बावजूद सोनीपत 221, गुरुग्राम 188 और रोहतक 187 एक्यूआई के साथ सबसे ऊपर हैं। क्योंकि तीनों ही शहरों में अच्छी संख्या में उद्योग हैं। वहीं, पराली जलाने में अव्वल रहने वाले करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक इन जिलों से नीचे है। करनाल में सबसे अधिक 516, कैथल में 454 और कुरुक्षेत्र में 293 मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन यहां एक्यूआई का स्तर 182 है।

 
बारिश से आधा हुआ प्रदूषण
सप्ताह पहले की बात करें तो गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, सोनीपत का सूचकांक 350 से पार था। पिछले दिनों हुई बारिश से इन शहरों में हवा साफ हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 0 से 100 तक सूचकांक संतोषजनक माना जाता है। इसके बाद से सांस के मरीजों को दिक्कत हो सकती है।
 
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1644 स्थानों पर जलाई पराली, 10 जिलों में एक भी केस नहीं
प्रदेश में हरसेक (हरियाणा अंतरीक्ष उपयोग केंद्र) के माध्यम से अब तक पराली जलाने के कुल 1644 मामले रिपोर्ट किए हैं। वहीं, दस जिलों रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चरखीदादरी, भिवानी, पंचकूला, रोहतक, झज्जर, नूंह महेंद्रगढ़ में एक भी स्थान पर पराली नहीं जलाई गई है। सबसे अधिक मामले धान के इलाके कहे जाने वाले करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र में रिपोर्ट किए हैं।

जिला        एक्यूआई     पराली जली
  • सोनीपत        221            7
  • गुरुग्राम        188             0
  • रोहतक        187             0
  • पानीपत        168             20
  • फरीदाबाद     158             1
  • फतेहाबाद      103           105
  • हिसार            68               6
  • जींद              112            63
  • कैथल            182           454
  • करनाल          181           516
  • कुरुक्षेत्र          180            293
  • सिरसा           113             17
  • पलवल           91               25

प्रदूषण के लिए किसान जिम्मेदार नहीं हैं। किसान मजबूरी में पराली जलाता है, वो भी उसने काफी कम दिया है। बढ़ते प्रदूषण के लिए उद्योग, वाहन आदि जिम्मेदार हैं। -रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।
 
पिछले साल के मुकाबले कम संख्या में पराली जली है। वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार इस बात को दर्शा रहा है। हम लगातार पराली प्रबंधन करने को लेकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं।- डॉ. सुमिता मिश्रा, एसीएस, कृषि विभाग।

 

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