पंजाब: दोआबा के तीन दिग्गज थे कैप्टन से नाराज, किसी का काटा था नाम तो किसी की छीनी थी कुर्सी

सुरिंदर पाल, अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 26 Sep 2021 06:28 PM IST

सार

वहीं, मौजूदा मंत्री शाम सुंदर अरोड़ा की विदाई होगी । तीनों नए चेहरे सिख हैं और कैप्टन के धुर विरोधी हैं। राणा गुरजीत सिंह हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जुड़े रहे हैं, लेकिन कुर्सी छिनने का उनको मलाल रहा। कैप्टन ने उन्हें फिर मंत्री नहीं बनाया। सुशील रिंकू, रमनजीत सिंह सिक्की, लाडी शेरोवालिया आदि राणा के नजदीकी माने जाते हैं।
 
पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह।
पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की कैबिनेट में दोआबा से तीन सिख चेहरों को प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। इसमें राणा गुरजीत सिंह पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, जबकि परगट सिंह और संगत सिंह गिलजियां को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया जा रहा है। दोआबा से मौजूदा मंत्री शाम सुंदर अरोड़ा की छुट्टी तय है। जिन तीन सिख चेहरों को सीएम चन्नी ने मंत्री चुना है, वे तीनों कैप्टन के धुर विरोधी हैं। राणा गुरजीत सिंह हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ जुड़े रहे हैं, पर कुर्सी छिनने का उनको हमेशा मलाल रहा। उन्होंने एड़ी चोटी का जोर भी लगाया पर कैप्टन ने उन्हें मंत्री नहीं बनाया। दरअसल राणा गुरजीत सिंह पंजाब कांग्रेस के कद्दावर नेता बन चुके थे और उनकी टीम में कई युवा विधायक जुड़ गए थे। इनमें सुशील रिंकू, रमनजीत सिंह सिक्की, लाडी शेरोवालिया आदि शामिल हैं। राणा गुरजीत की घंटी सीधी दिल्ली दरबार में बजती थी। इस कारण कैप्टन ने उनके पर काट घर बैठा दिया। जबकि उनके धुर विरोधी सुखपाल सिंह खैहरा की पीठ पर कैप्टन ने हमेशा हाथ रखा। यहां तक कि सुखपाल खैहरा ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा तो उसको मंजूर ही नहीं किया गया।
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खैहरा के आने के बाद असहज थे राणा 
तब खैहरा आप में थे, जिन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह बाद में कांग्रेस में ले आए। इससे राणा गुरजीत सिंह खुद को काफी असहज महसूस कर रहे थे। राणा गुरजीत सिंह लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं और उनकी छवि दमदार नेताओं में मानी जाती है। एक बार तो वे विधानसभा में बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ तल्ख तेवरों से पेश आ चुके हैं। पद्मश्री परगट सिंह ने जब नवजोत सिंह सिद्धू के साथ कांग्रेस का दामन थामा था तो हाईकमान ने सरकार बनने के बाद मंत्री पद देने का आश्वासन दिया था। लेकिन कैप्टन ने परगट सिंह को मंत्री नहीं बनाया।

 
कई बार उठी थी परगट को मंत्री बनाने की चर्चा
हालांकि कैप्टन ने सिद्धू को कैबिनेट में शामिल कर लिया था। इसके बाद भी पिछले साढ़े चार साल में कई बार परगट सिंह को मंत्री बनाने की चर्चा उठी, पर कैप्टन ने उनका नाम आगे नहीं आने दिया। इसके बाद परगट सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उनके निकटवर्ती कैप्टन संदीप संधू का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए उन्होंने कैप्टन को न केवल हर मुद्दे पर कटघरे में खड़ा किया, बल्कि असहज भी कर दिया। रेत-बजरी से लेकर बेअदबी के मामलों में परगट सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को पूरी तरह से घेरकर रखा।

सिद्धू के पाले में चले गए थे  गिलजियां 
तीन बार कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा पहुंचे गिलजियां भी मंत्री पद न मिलने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाराज थे। उनकी नाराजगी खुले तौर पर झलकती भी थी। कुछ समय बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गिलजियां को अपना राजनीतिक सलाहकार बनाकर उन्हें पावरफुल बनाने की कोशिश की, लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं हुए। जब नवजोत सिंह सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला तो गिलजियां भी उनके पाले में चले गए। इस तरह कहीं न कहीं पर सिद्धू के राजनीतिक सिक्सर मारने के लिए गिलजियां भी राजनीतिक भागीदारी निभाते रहे। 
 
ओबीसी वोटों की ओर देख रही कांग्रेस
सिद्धू जब पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान बने तो उन्होंने उनका इनाम देते हुए गिलजियां को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यवाहक प्रधान बनाया। इससे उनका राजनीतिक कद ऊंचा हुआ। इतना ही नहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुख्यमंत्री की कुर्सी हिलाने की लड़ाई में गिलजियां ने सिद्धू का पूरा साथ दिया। इसलिए सिद्धू ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की कैबिनेट में संगत सिंह गिलजियां का नाम जुड़वाने में अहम भूमिका निभाई। एक बार आजाद विधायक बन चुके गिलजियां को कैबिनेट मंत्री बनाकर कांग्रेस ओबीसी वोटों को भी अपने पाले में करने की भरपूर कोशिश में है।
 

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