Year Ender 2020 : चंडीगढ़ में खूब हुई रिसर्च, विद्यार्थियों ने घर बैठकर दी परीक्षा, बनाया रिकॉर्ड

अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 28 Dec 2020 05:09 PM IST
पीयू सैफ लैब में करेंसी सैनिटाइज करने वाली मशीन।
पीयू सैफ लैब में करेंसी सैनिटाइज करने वाली मशीन। - फोटो : फाइल फोटो
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कोरोना के चलते यह साल चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा में बहुत परिवर्तन लेकर आया। ऑफलाइन कक्षाओं से निकलकर ऑनलाइन कक्षाओं की ओर कदम बढ़ाए गए। शिक्षकों से लेकर विद्यार्थियों तक को इस तकनीक में पारंगत किया गया। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली भी मजबूत हो गई। परीक्षाओं से लेकर दाखिला काउंसिलिंग तक ऑनलाइन मोड़ पर पहुंची। 
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पंजाब यूनिवर्सिटी और कॉलेज में खूब रिसर्च भी हुई, क्योंकि लॉकडाउन के कारण शिक्षक घरों में रहे और ऑनलाइन प्रणाली के जरिए ही रिसर्च को आगे बढ़ाया। पब्लिकेशंस की संख्या भी डेढ़ गुना हो गई। कभी यह नहीं सोचा गया था कि विद्यार्थियों की परीक्षाएं घर बैठे होंगी, लेकिन पीयू ने यह कर दिखाया और अब इससे बेहतर प्रणाली विकसित करने की तैयारी चल रही है। 


फाइल से लेकर करेंसी सैनिटाइज करने की मशीन बनाई
पीयू की सैफ लैब ने अल्ट्रावायलेट किरणों के जरिए संचालित होने वाली कई मशीनें तैयार कीं। इस मशीन के जरिए फाइल और करेंसी आदि को सैनिटाइज किया गया। लॉकडाउन में यह काफी कारगर रहा। रसायन विज्ञान विभाग ने सबसे पहले सैनिटाइजर तैयार किया और सभी विभागों को पहुंचाया। एंथ्रोपोलॉजी, फिजिक्स, रसायन विज्ञान, मनोविज्ञान विभाग के कई प्रोफेसर ने रिकॉर्ड रिसर्च की। उनके पब्लिकेशन्स भी प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित हुए। पीयू के 20 वैज्ञानिकों को रिसर्च के जरिए ही विश्व रैंकिंग में जगह मिली।

पीयू के इतिहास में पहली बार सीनेट का कार्यकाल खत्म हुआ
पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट का कार्यकाल आज तक बिना चुनाव के खत्म नहीं हुआ, लेकिन इस साल यह भी हो गया। चुनाव की तिथि तय की गई, लेकिन अगस्त में इन्हें स्थगित कर दिया गया। यह चर्चा का विषय रहा। सीनेट के जरिए ही सिंडिकेट का चुनाव होता है, लेकिन सिंडिकेट का चुनाव भी अब नहीं होगा। उसका कार्यकाल भी 31 दिसंबर को पूरा होने जा रहा है। डीन से लेकर कई पदों का चयन सिंडिकेट के जरिये होना है जो नहीं हो पाएगा। इसको लेकर धरना-प्रदर्शन हुए लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। 

इस तरह तैयार हुआ पढ़ाई का खाका
पीयू और उससे संबद्ध लगभग 200 कॉलेजों में पहली बार ऑनलाइन शिक्षा के जरिये उजाला करने का प्रयास हुआ। शुरुआत धीमी रही, लेकिन धीरे-धीरे सभी ने इस पर दौड़ना शुरू कर दिया। पीयू ने पहली बार देशभर के शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाने के गुर सिखाए। इसमें 22 राज्यों के शिक्षक शामिल हुए।

ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा विद्यार्थियों की सितंबर में परीक्षाएं भी सितंबर में ऑनलाइन करवाई गईं। यह काम आसान नहीं था। विद्यार्थियों को बिना बुलाए ही काम चल गया। यहां तक की पीयू में दाखिला प्रक्रिया और काउंसिलिंग भी ऑनलाइन हुई। 20 हजार से अधिक शोधार्थियों व विद्यार्थियों को डिग्रियां ऑनलाइन दी गईं।

कोरोना काल में कइयों ने गंवाई नौकरियां
कोरोना के कारण पीयू में कार्यरत एमटीएस के 150 से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां चली गईं। अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को अनुबंध पूरा होने के बाद दोबारा नहीं बुलाया गया। यही नहीं गेस्ट फैकल्टी और अनुबंध के शिक्षक भी दोबारा नहीं आ पाए। इनकी संख्या भी लगभग 200 रही। पीयू का खजाना खाली रहा, क्योंकि 40 से अधिक विभागों की कैंटीन बंद रहीं। सेक्टर-14 मार्केट की दुकानें बंद रहीं। छात्रावासों पर ताले लगे रहे थे। अक्तूबर में यह जरूर खुले, लेकिन रिसर्च स्कॉलर ही आ पाए।

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