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18 अप्रैल 2021

Digital Edition

पंजाब मंत्रिमंडल का गठन: नौ पुराने और छह नए चेहरों को मिली जगह, 15 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने रविवार को राज्य के 15 कैबिनेट मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के इस मंत्रिमंडल में नौ पुराने मंत्रियों के अलावा छह नए चेहरों को जगह दी गई है जबकि एक कैबिनेट मंत्री कैप्टन सरकार के दौरान ही मंत्री पद से हटाए जा चुके थे और उन्हें अब चन्नी मंत्रिमंडल के जगह दी गई है।

पंजाब राज भवन में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी भी उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने किया। इस सादे समारोह के दौरान जिन विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, उनके परिवारों के सदस्य भी उपस्थित थे। इस समारोह में राज्य के सिविल और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। 

समारोह के दौरान सभी मंत्रियों ने पंजाबी में ईश्वर को साक्षी मानते हुए शपथ ग्रहण की जबकि डॉ. राजकुमार वेरका ने डा. बाबासाहेब आंबेडकर को भी याद किया। समारोह के दौरान शपथ लेने वाले कैबिनेट मंत्रियों में ब्रह्म मोहिंदरा, मनप्रीत सिंह बादल, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, राणा गुरजीत सिंह, रजिया सुल्ताना, विजय इंदर सिंगला, भारत भूषण आशु का नाम शामिल है। ये सभी पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल में भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, जबकि अमलोह के चार बार के विधायक रणदीप सिंह नाभा, अमृतसर से तीन बार के विधायक डॉ. राज कुमार वेरका, उड़मुड़ से विधायक संगत सिंह गिलजियां, जालंधर केंट से दो बार विधायक परगट सिंह, गिदड़बाहा से विधायक अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और खन्ना से विधायक गुरकीरत सिंह कोटली को पहली बार कैबिनेट मंत्री पद मिला है। 



 
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पंजाब कैबिनेट विस्तार। पंजाब कैबिनेट विस्तार।

पंजाब कांग्रेस में बढ़ी नाराजगी: मंत्री पद छीना तो रो पड़े बलबीर सिद्धू, कांगड़ बोले- अमरिंदर से वफादारी की कीमत महंगी पड़ी

चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार के साथ ही नया विवाद खड़ा हो गया है। नई सरकार ने कई नए चेहरों को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिला दी है लेकिन कैप्टन सरकार में मंत्री रहे कई वरिष्ठ नेताओं को नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई है।
 
कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर नाराजगी व्यक्त करते हुए रविवार दोपहर प्रदेश के दो वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और पूर्व कैबिनेट मंत्रियों गुरप्रीत सिंह कांगड़ और बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्हें जानबूझ कर नजरअंदाज किया गया है। कई साल तक अपने-अपने विभागों में मंत्री के रूप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें नई सरकार में शामिल करके उनके साथ घोर अन्याय किया गया है।

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कांगड़ ने कहा, ‘बिजली और राजस्व मंत्री के रूप में मैंने दिन-रात काम किया और खस्ताहाल हो चुकी कई चीजों को पटरी पर लाया। फिर भी मेरे साथ अन्याय किया गया है।’ वहीं बलबीर सिंह सिद्धू अपनी बात रखते हुए रो पड़े। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों और सफलताओं को सामने रखते हुए कहा, ‘कोविड-19 महामारी के दौरान मैंने यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम किया कि राज्य के लोगों को किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े लेकिन यह हमारे जैसे प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं से व्यवहार का तरीका नहीं है, जिन्होंने पार्टी के लिए अपनी जिंदगी के बेहतरीन साल दिए हैं। अब उनको पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया गया है।’

दोनों नेताओं ने हाईकमान को लिखा पत्र
दोनों पूर्व मंत्रियों ने रविवार को पंजाब कैबिनेट से बाहर रखने पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस हाईकमान को पत्र भी लिखा है। उन्होंने कारण पूछा है, किसकी वजह से आलाकमान ने उनकी अनदेखी की। उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ हैं। हमने आलाकमान की सलाह के अनुसार ही पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन का समर्थन किया। अब हम पार्टी आलाकमान के निर्देश पर नए मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम करेंगे।

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हमारे साथ ऐसा क्यों किया गया: कांगड़
कांगड़ ने कहा कि ‘अगर आलाकमान ने हमसे इस्तीफा मांगा होता तो हम खुद ही दे देते। हमारे साथ जो किया गया है, वह काफी शर्मनाक और अपमानजनक भी है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति उनकी वफादारी की कीमत उन्हें काफी महंगी पड़ी है। हम कांग्रेस के प्रति वफादार रहे हैं और इस तरह से हम पर अंगुली उठाई जा रही है। हमने कांग्रेस के खिलाफ जाकर कभी काम नहीं किया गया और न ही कोई बयान दिया है। फिर हमारे साथ ऐसा क्यों किया गया है।’
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Punjab Cabinet Expansion: ये है चरणजीत सिंह चन्नी का नया मंत्रिमंडल, पढ़ें नए-पुराने मंत्री चेहरों का राजनीतिक सफर

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने रविवार को पंजाब मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई। 15 विधायकों को मंत्री बनाया गया है। रणदीप सिंह, संगत सिंह गिलजियां और परगट सिंह समेत कई नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया गया है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट का हिस्सा रहे विधायकों को भी मंत्रिमडंल में शामिल किया गया। कई पुराने मंत्रियों को छुट्टी भी कर दी गई है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी पहले ही पद और गोपनीयता की शपथ ले चुके हैं। 

राजकुमार वेरका
20 मार्च 1963 को जन्मे राजकुमार वेरका ने साल 2002 में वेरका विधानसभा से चुनाव लड़ा। 2007 में उन्हें इसी विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2012 में अमृतसर (पश्चिम) से विधायक बने। 2017 में दूसरी बार इसी सीट से विधानसभा चुनाव जीता। 

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अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग
43 वर्षीय अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को भी पंजाब के नए सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की कैबिनेट में जगह मिली है। श्री मुक्तसर साहिब के गांव वडिंग के रहने वाले राजा वडिंग अपने गृह जिले की गिद्दड़बाहा सीट से दूसरी बार जीतकर आए हैं। इन्होंने पहला चुनाव 2012 में मनप्रीत बादल जैसे नेता को हराकर जीता था। ये कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं। छात्र राजनीति से सक्रिय रहे वडिंग को अपनी तेजतर्रार और आक्रामक छवि के लिए जाना जाता है। 
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पंजाब: चन्नी कैबिनेट शपथ ग्रहण से पहले फिर घमासान, छह विधायकों ने सिद्धू को लिखा पत्र

राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाने की खबरों के बाद आम आदमी पार्टी से आकर कांग्रेस का हाथ थमने वाले सुखपाल सिंह खैहरा व पांच अन्य विधायकों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के छह विधायकों ने मंत्रिमंडल के शपथग्रहण से कुछ समय पहले ही नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र लिखा। पत्र में विधायकों ने राणा गुरजीत सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर विरोध जताया है। इन विधायकों ने राणा गुरजीत सिंह के स्थान पर एससी चेहरे को कैबिनेट में शामिल करने की अपील की। 

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पत्र लिखने वाले नेताओं में मोहिंदर सिंह केपी, सुल्तानपुर से विधायक नवतेज सिंह, भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा, फगवाड़ा के विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल, जालंधर (नॉर्थ) बावा हेनरी और शाम चौरासी से विधायक पवन अदिया शामिल हैं। 




भुलत्थ से आप की टिकट पर चुनाव जीतने वाले सुखपाल सिंह खैरा अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भी मोर्चा खोल चुके हैं। आप से अलग होकर उन्होंने पंजाब एकता पार्टी का गठन भी किया था। कुछ माह पूर्व खैरा ने तीन अन्य विधायकों के साथ कैप्टन की अगुवाई में कांग्रेस का हाथ थामा था।

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आप में रहते हुए खैरा ने राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ जमकर हमला बोला था। खनन मामले में नाम आने के बाद गुरजीत सिंह की कैप्टन कैबिनेट से छुट्टी कर दी गई थी। अब खैहरा ने फिर से पांच अन्य विधायकों के साथ राणा गुरजीत सिंह का विरोध शुरू कर दिया है। 
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पानीपत में महापंचायत: नई अनाज मंडी पहुंचने लगे किसान, महिलाओं के लिए अलग पंडाल, राकेश टिकैत भरेंगे हुंकार

नवजोत सिंह सिद्धू। (फाइल फोटो)
भारत बंद से एक दिन पहले हरियाणा के पानीपत में किसानों की महापंचायत हो रही है। नई अनाज मंडी में बड़ी संख्या में किसान पहुंचने लगे हैं। ट्रॉलियों में सवार होकर बड़ी संख्या में महिलाएं भी महापंचायत में पहुंच रही हैं।

वहीं बुजुर्ग किसान हुक्का, तिरंगा और किसान यूनियन का झंडा व लंच बॉक्स साथ लेकर पहुंचे हैं। वहीं सुरक्षा को ध्यान में रख मंच में बाउसंरों को तैनात किया गया है। भारतीय किसान यूनियन पानीपत के प्रधान सोनू मालपुरिया भी अनाज मंडी पहुंचे। 

चढूनी ने केंद्र सरकार पर बोला हमला
भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने पानीपत की महापंचायत में केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों को हल्के में न ले सरकार, वरना अगली बार टेंट प्रधानमंत्री की कोठी के बाहर लगा देंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता के नेक्सस को तोड़ना है। 

101 हलवाइयों को सौंपी गई भोजन पकाने की जिम्मेदारी 
महापंचायत में 50 हजार से एक लाख के बीच किसानों के आने की उम्मीद है। ऐसे में उनके भोजन का पूरा प्रबंध किया गया है। भारतीय किसान यूनियन ने भोजन तैयार कराने के लिए 101 हलवाइयों को जिम्मेदारी सौंपी है। ये हलवाई शनिवार की रात से ही भोजन तैयार करने में जुटे हैं।

महिलाओं के लिए तैयार किया गया अलग पंडाल 
महापंचायत में आने वाली महिला किसानों के लिए अलग पंडाल बनाया गया है, जहां महिलाओं के बैठने और भोजन की व्यवस्था की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि महापंचायत में पांच हजार से अधिक महिलाएं शिरकत करेंगी। ज्यादातर महिला किसान हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होगी। 

12 स्थानों पर लगे नाके
पुलिस ने शहर में 12 नाके तय किए हैं और हर नाके पर ट्रैफिक पुलिस के साथ 2-2 किसान स्वयंसेवक तैनात हैं। शहर के अंदर से होकर किसान नई अनाज मंडी स्थित महापंचायत स्थल नहीं जा सकेंगे, इनके लिए दिल्ली-पैरलल नहर का अलग रूट निर्धारित कर दिया गया है। 

यहां लगाए गए नाके
  • असंध रोड पर चौकी के पास
  • जाटल रोड पर नहर के पास देशवाल चौक
  • गोहाना रोड पर एनएफएल के पास
  • जीटी रोड पर टोल प्लाजा पर
  • पानीपत-रोहतक रोड पर डाहर चौक के पास
  • जीटी रोड पर बीबीएमबी कट के पास
  • जीटी रोड पर अनाज मंडी कट के पास
  • सनौली-हरिद्वार रोड पर गांव छाजपुर के पास
  • एक नाका गांव उझा के पास
  • एक नाका गांव डाडौला के पास
  • एक नाका दिल्ली से पानीपत लेन जीटी रोड के पास फ्लाईओवर कट
  •  जीटी रोड से छाजपुर जाने वाले चौटाला रोड पर एक नाका
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हरियाणा: गृह मंत्री विज के कार्यालय से गोपनीय दस्तावेज लीक करने वाला कर्मी सस्पेंड, सीएम बोले-ऐसे लोग बख्शे नहीं जाएंगे

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के कार्यालय से गोपनीय दस्तावेज लीक करने के मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि इस तरह के कार्यों में शामिल किसी भी अधिकारी व कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में इस तरह के कर्मचारियों पर कड़ी नजर रखें। अगर कोई सामने आता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई करें।
 
आज आरोपी कोर्ट में होगा पेश
उधर, शनिवार को पुलिस ने आरोपी को चंडीगढ़ की जिला अदालत में पेश किया। अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब रविवार को फिर आरोपी को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। हाई प्रोफाइल मामला होने की वजह से पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। आरोपी के मोबाइल को केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) में भेजा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी कब से गोपनीय दस्तावेजों को इधर-उधर भेज रहा था।

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जांच में खुलेंगे आरोपी के सभी राज
सीएफएसएल जांच में ये भी सामने आएगा कि आरोपी ने अब तक किस-किस को और कौन-कौन से दस्तावेज भेजे हैं। गौरतलब है कि हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज के कार्यालय से अहम सूचनाएं लीक करने के आरोपी सहायक को शुक्रवार शाम सिविल सचिवालय में पकड़ा गया था। विज ने खुद डेढ़ घंटे तक सहायक का मोबाइल खंगाला था। उसमें सौ से अधिक दस्तावेजों के फोटो मिले। इसके बाद आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी कर्मचारी विज के कार्यालय में ही तैनात था। मामले में विज के निजी सचिव ने मुख्य सचिव विजय वर्धन को लिखित शिकायत की है।

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गोपनीय दस्तावेजों के बदले पैसों के लेनदेन का शक
गृह मंत्री विज ने उनके सात-आठ विभागों के अनेक अहम दस्तावेज लीक होने का संदेह जताया है। उन्होंने आशंका जताई कि उनके विभागों की अनुमोदित फाइलों के फोटो खींचकर यह कर्मचारी आगे भेजता था। काम हो गया है, यह कहकर वह उसके पैसे भी लेता रहा है। चंडीगढ़ पुलिस विभिन्न एंगल से मामले की जांच कर रही है। दस्तावेजों को किसी और को भेजने के पीछे मकसद क्या था, ये भी पता लगाया जा रहा है।
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हरियाणा : सरकार की सख्ती, बच्चों को सड़ा अनाज, खराब दूध वितरित करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे

हरियाणा के स्कूली बच्चों को मिड-डे मील में सड़ा अनाज और एक्सपायरी डेट का दूध वितरित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश सरकार ने जारी किए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के मामले सामने आने पर सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है। निदेशक मौलिक शिक्षा ने सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश जारी किए हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देशों पर कोरोना महामारी के बाद मार्च 2020 से स्कूली बच्चों को सूखा राशन और दूध पाउडर स्कूल शिक्षा विभाग घर-घर जाकर वितरित करवा रहा है।

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अफसर हो या कर्मी, जिम्मेदारी से नहीं बच सकते
अब विभाग के संज्ञान में आया है कि अनेक बार बच्चों को सड़ा राशन और खराब दूध बांटा गया है। यह मिड-डे मील प्रभारियों और स्कूल मुखियाओं की बड़ी लापरवाही है। बीईईओ, डीईईओ भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उनके राशन वितरण का निरीक्षण न करने के कारण ही अनेक बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। वे सभी मिड-डे मील प्रभारियों और स्कूल मुखियाओं को निर्देश जारी करें कि राशन वितरण से पहले सूखे अनाज और दूध पाउडर की गुणवत्ता अवश्य जांची जाए। इस मामले में लापरवाही करने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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दुष्यंत चौटाला का हमला: पंजाब की तरह छत्तीसगढ़ व राजस्थान में देखने को मिलेगी उथल-पुथल, यह अंत की ओर कांग्रेस के कदम

हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने रविवार को कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने पंजाब के ताजा राजनैतिक हालात का जिक्र किया और कहा कि ऐसी ही उथल-पुथल जल्द ही छत्तीसगढ़ और राजस्थान में देखने को मिल सकती है। यह कांग्रेस के अंत की ओर अंतिम कुछ कदम होंगे। जिस पार्टी को अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं, वह देश के विकास के लिए कदम नहीं उठा सकती।

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उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सभी डीसी से 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश वाले क्षेत्रों की रिपोर्ट 48 घंटे में मांगी है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र की विशेष गिरदावरी करवाकर किसानों को नुकसान की भरपाई की जाएगी। जो फसलें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत कवर नहीं होती हैं, उनके नुकसान का भी मुआवजा दिया जाएगा। 



बागवानी व दलहन जैसी फसलों के नुकसान की भी क्षतिपूर्ति की जाएगी। ये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर नहीं होती हैं। वर्तमान में दलहन व कपास की फसल को ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। डीसी की रिपोर्ट मिलने के बाद विशेष गिरदावरी करवाई जाएगी।

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केएमपी के आसपास साढ़े सात हजार एकड़ में जलभराव
दुष्यंत ने कहा कि केएमपी के आसपास के क्षेत्र में करीब साढ़े सात हजार एकड़ में जलभराव की समस्या सामने आई है। जिन-जिन किसानों को नुकसान हुआ है, क्षतिपूर्ति के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। इस वर्ष फसलों के नुकसान की नियमित गिरदावरी की रिपोर्ट आ गई है। चौटाला ने बताया कि इस वर्ष किसानों के खाते में करीब 1300 करोड़ रुपये ज्यादा गए हैं। एक अक्तूबर से शुरू होने वाली फसलों की खरीद का पैसा सीधा किसानों के खाते में जाएगा। वे खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें कब मंडी में फसल बिक्री के लिए आना है।
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पंजाब : पराली जलाने के मामले में आठ जिले संवेदनशील, सरकार इन पर रखेगी नजर

पराली जलाने को लेकर पंजाब के आठ जिलों को संवेदनशील पाया गया है। यहां पिछले साल की अपेक्षा 4000 से अधिक पराली जलाने के मामले मिले हैं। सरकार इस सीजन में पराली जलाने की घटनाएं कम करने के लिए संवेदनशील जिलों में 8500 नोडल अधिकारियों की तैनाती करने जा रही है, जो चिह्नित क्षेत्र पर पल-पल नजर रखेंगे।

पटियाला, संगरूर, बठिंडा, फिरोजपुर, श्री मुक्तसर साहिब, तरनतारन, मोगा और मानसा में अधिक प्रभावित जिलों के तौर पर पहचान की गई है। इन जिलों में पिछले सीजन के मुकाबले धान की पराली को आग लगाने की 4000 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। पिछले सीजन के दौरान हर गांव में पराली को आग लगने की 25 से अधिक घटनाएं घटी थीं।

इस सीजन के लिए पंजाब सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार इन आठ जिलों में आने वाले 8500 गांवों में नोडल अधिकारी तैनात करने जा रही है। नोडल अधिकारी किसानों को पराली जलाने से रोकने के साथ-साथ धान की कटाई के बाद के कार्यों पर भी नजर रखेंगे।

पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, सहकारिता, राजस्व, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, कृषि, बागबानी और भूमि संरक्षण सहित अन्य विभागों के स्टाफ को नोडल अधिकारी के तौर पर तैनात किया गया है, ताकि पराली जलाने के रुझान को रोकने के लिए किए जा रहे कार्यों को और तेज किया जा सके।

ये काम भी करेंगे नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारियों की तरफ से गांवों में जागरूकता पैदा करने के लिए विभिन्न गतिविधियां चलाई जाएंगी, जिसके तहत किसान बैठकें, फसलों के अवशेष के निपटारे के लिए मशीनों का बंदोबस्त, गांवों में प्रचार सामग्री बांटने के अलावा अन्य तौर-तरीकों के साथ भी पराली को आग लगाने के रुझान के खिलाफ अधिक से अधिक जागरूकता पैदा करना रहेगा।

जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को जरूरी निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं। प्रभावित गांवों पर इस बार सरकार का विशेष फोकस है।
-करुनेश गर्ग, सदस्य, पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड
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