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छत्तीसगढ़: भूपेश बघेल सिर्फ 13 को मंत्री बना सकते हैं, रेस में ये 17 विधायक

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: अमर शर्मा Updated Mon, 17 Dec 2018 01:21 PM IST
भूपेश बघेल
भूपेश बघेल - फोटो : twitter
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छ्त्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल सोमवार को शपथ लेंगे। हालांकि कैबिनेट गठन की कवायद शुरू हो गई है। बघेल के मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए 17 विधायक जोर लगा रहे हैं। लेकिन संवैधानिक बाध्यता के चलते राज्य में सिर्फ 13 मंत्री ही बनाए जाएंगे। ऐसे स्थिति में बघेल किसने मंत्रिमंडल में किस किसको शामिल करेंगे। यह अहम सवाल है। 
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तैयार कर रहे ये फॉर्मूला

मंत्रिमंडल गठन को लेकर बघेल वरिष्ठ नेताओं के साथ सलाह मश्विरा कर रहे हैं। इसके लिए एक फॉर्मूला निकाला जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार हर संभाग से तीन-तीन और मुख्यमंत्री के गृह संभाग से उनके अलावा एक विधायक को मंत्री पद दिया जा सकता है। 


बघेल का कहना है कि उनकी कैबिनेट में युवाओं और महिलाओं को भी उचित जगह दी जाएगी। विधायक अपने समर्थकों के जरिए मंत्री बनने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। इसी तरह विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का भी चयन किया जाना है।

मंत्री बनने के रेस में ये 17 विधायक और उनकी खासियत

चरणदास महंत 
चरणदास महंत मुख्यमंत्री पद के चार दावेदारों में से एक थे। महंत चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष रहे। केंद्रीय मंत्री रहे महंत को प्रशासन का अनुभव भी है। महंत मध्यप्रदेश में गृहमंत्री रह चुके हैं। हालांकि ऐसे संकेत हैं कि इन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

ताम्रध्वज साहू
ताम्रध्वज साहू मुख्यमंत्री पद के चार दावेदारों में से एक थे। साहू ओबीसी वर्ग के बड़े नेता हैं। मंत्रिमंडल में जगह देकर उनके समर्थकों को संदेश दिया जा सकता है। खास बात यह है कि उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा देकर विधायक का चुनाव लड़ा। 

टीएस सिंहदेव
टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री पद के चार दावेदारों में से एक थे। वे सरगुजा के राज परिवार से हैं। सिंहदेव ने सरगुजा संभाग में जीत के लिए रणनीति बनाई और यहां से 14 विधानसभा सीटों में जीत मिली। सिंहदेव की अगुवाई में कांग्रेस ने चुनाव घोषणा पत्र तैयार किया जो राज्य में प्रचंड जीत का आधार बना। 

सत्यनारायण शर्मा 
सत्यनारायण शर्मा दिग्विजय सिंह और अजीत जोगी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उनका लंबा सियासी अनुभव है और सबको साथ में चलने के उनके व्यक्तित्व के चलते उन्हें विधानसभा का स्पीकर के लिए भी उनके नाम पर विचार किया जा रहा है। 

रविंद्र चौबे
रविंद्र चौबे को पीडब्लूडी और जनसंपर्क विभागों के कामकाज का अनुभव है। संसदीय कार्यों और उनके लंबे सियासी अनुभव के मद्देनजर विधानसभा स्पीकर के रूप में उनके नाम की भी चर्चा की जी रही है।

कवासी लखमा
कवासी लखमा लगातार चौथी बार विधायक बने हैं। लखमा घोर नक्सल प्रभावित इलाके से ताल्लुक रखते हैं। अभी वे सदन में उपनेता प्रतिपक्ष के पद पर हैं और उनकी काफी छवि काफी आक्रामक नेता की हैं। 

 

इनमें से सिर्फ 13 ही बन सकते हैं मंत्री

भूपेश बघेल
भूपेश बघेल
अमरजीत भगत
अमरजीत भगत भी काफी प्रभावशाली आदिवासी नेता हैं। सरगुजा संभाग में 14 में से सभी 14 सीटें कांग्रेस ने जीती है। भगत की इन सीटों में जीत में बड़ी भूमिका रही। 

धनेंद्र साहू
धनेंद्र साहू प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और अजीत जोगी की सरकार में मंत्री रहे हैं। राज्य में अच्छी खासी आबादी वाले साहू समाज के नेता हैं जो प्रदेश की राजनीति का रूख मोड़ देती है।

शिव डहरिया
शिव डहरिया सतनामी समाज के बड़े नेता हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

अमितेष शुक्ल
अमितेष शुक्ल जोगी सरकार में मंत्री रह चुके हैं और इस बार 58 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीता है। उनके पार्टी आलाकमान से भी अच्छे संबंध हैं। 

उमेश पटेल
उमेश पटेल युवा चेहरा हैं। वे दिवंगत नेता नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। पटेल ने हाईप्रोफाइल उम्मीदवार ओपी चौधरी को चुनाव हराया है।

खेलसाय सिंह
खेलसाय सिंह अनुभवी विधायक हैं और सरगुजा संभाग से ताल्लुक रखते हैं। मंत्री पद की दौड़ में उनकी भी मजबूत दावेदारी है।

मोहम्मद अकबर
मोहम्मद अकबर अनुभवी विधायक हैं और पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा हैं। अकबर ने मुख्यमंत्री के शहर कवर्धा से सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। 

अरुण वोरा
अरुण वोरा भी अनुभवी विधायक हैं और दुर्ग शहर से चुनाव जीता है। अरुण वोरा कांग्रेस हाईकमान के सबसे करीबी राष्ट्रीय महामंत्री प्रशासन मोतीलाल वोरा के बेटे हैं। 

प्रेमसाय टेकाम
प्रेमसाय टेकाम 6 बार विधायक चुनाव जीत चुके हैं। वे जोगी सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं। टेकाम की आदिवासी समाज में अच्छी पकड़ हैं और सरगुजा में काफी प्रभावशाली हैं। 

लखेश्वर बघेल
लखेश्वर बघेल दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और आदिवासी समाज में उनका खासा प्रभाव है। उनकी मिलनसार और साफ व्यक्ति की छवि है। 

अनिला भेड़िया
अनिला भेड़िया लगातार दूसरी बार विधायक बनी हैं। आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं। मंत्री पद के लिए महिला कोटे से उनकी दावेदारी मानी जा रही है। 
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